फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   Widow pawns sons to pay for husband’s funeral

पति के दाह संस्कार के लिए अपने मासूम बच्चों को रख दिया गिरवी

Fri, 19 Feb 2016 04:36 PM IST
Updated Fri, 19 Feb 2016 04:36 PM IST
विज्ञापन
Widow pawns sons to pay for husband’s funeral

एक पत्नी की बेबशी का अंदाजा केवल इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगर उसका पति मर जाए और उसके दाह संस्कार के लिए पैसे ही नहीं हो तो वह अपने बटों को भी गिरवी रख सकती है।

विज्ञापन


ओड़िसा के क्योंझर जिले में भी एक ऐसी ही घटना हुई है जहां एक विधवा ने अपने पति के दाह संस्कार के लिए अपने दो बेटों को गिरवी रख दिया। हम मामला उस वक्त सामने आया जब बच्चों की गिरवी रखकर पति के दाह संस्कार खबर मिलने के बाद चंपुआ के ब्लॉक विकास अधिकारी एस नायक बुधवार को जांच के लिए पहुंचे। यह घटना 26 जनवरी के दिन हुई थी।
विज्ञापन


क्योंझर जिले में गधुली गांव की रहने वाली सावित्री नायक अपने पति राइबा के मर जाने के बाद अपने दो बेटों मुकेश (13) और सुकेश (11) को 5,000 रुपए में गिरवी रख दिया। राइबा के कमाई से ही परिवार का भरण पोषण होता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

कर्जा चुकाने के लिए बच्चों ने छोड़ी पढ़ाई

Widow pawns sons to pay for husband’s funeral

वहीं सावित्री ने कहा, 'मैंने अपने दोनों बच्चों को इसलिए गिरवी रखा क्योंकि मेरे पास बच्चों को खिलाने के लिए पैसे नहीं थे।' इन दो के अलावा सावित्री के तीन और बच्चे भी हैं जिनका नाम आकाश (9), चिलारी (8) और बरशा (4) है।

सावित्री के एक पड़ोसी ने बताया कि राइबा कई दिनों से बीमार था जिसकी वजह से 26 जनवरी को उसकी मौत हो गई थी। पति के ईलाज में सारे पैसे भी खत्म हो गए थे जिसके बाद परिवार ने गांव वालों से मदद की गुहार लगाई लेकिन कोई आगे नहीं आया।

हालांकि, बीडिओ नायक इन सभी बातों को नकार दिया। उन्होंने बताया कि बच्चों को गिरवी नहीं रखा गया बल्कि जो पैसे उधार लिए गए थे उसको चुकाने के लिए वे गांव के तमाम पशुओं की देखभाल करेंगे। नायक ने यह भी बताया की इस काम की वजह से दोनों बच्चों को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी है। उन्होंने सावित्री की हर संभव मदद करने की बात कही। वह यह भी सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें विधवा पेंशन के तहत लाभ मिल सके जिससे की उनके परिवार का भरण पोषण हो सके।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed