वाजपेयी-मालवीय को भारत रत्न पर भड़के काटजू
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भाजपा के शिखर पुरुष अटल बिहारी वाजपेयी और महामना मदन मोहन मालवीय को भारत रत्न दिए जाने के सरकार के निर्णय का बेशक हर तरफ स्वागत हो रहा हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश मार्कंडेय काटजू इससे सहमत नजर नहीं आते।
उन्होंने केन्द्र सरकार के इस निर्णय की आलोचना करते हुए सवाल उठाया है कि दोनों लोगों को ही भारत रत्न क्यों? इनके अलावा भी तो देश में अन्य काबिल लोग थे जिन्हें भारत रत्न दिया जा सकता है।
वहीं इस बहाने काटजू ने बीएचयू की अवधारणा पर भी सवाल उठा दिया है। अपने ब्लॉग पर उन्होंने लिखा है कि क्या विश्वविद्यालय भी हिंदू या मुस्लिम हो सकते हैं। उनका निशाना बीएचयू और एएमयू पर था। बकौल काटजू विश्वविद्यालय तो विश्वविद्यालय है जो संपूर्ण विश्व के लिए है, किसी धर्म या जाति के लिए नहीं।
काटजू ने खुद अपनी तरफ से ऐसे पांच नाम सुझा दिए हैं जो भारत रत्न के लिए वाजपेयी और मालवीय से ज्यादा योग्य हैं। प्रेस परिषद के पूर्व अध्यक्ष काटजू के अनुसार भारत रत्न देने के लिए सरकारों का अलग-अलग पैमाना है।
जानिए कौन हैं काटजू के पसंदीदा पांच
मार्कंडेय काटजू ने अपने ब्लॉग पर उन पांच नामों का जिक्र किया है जिन्हें भारत रत्न सम्मान दिया जा सकता था। इनमें सबसे पहला नाम है मशहूर शायर मरहूम मिर्जा गालिब का। काटजू के अनुसार अपनी बेबाक शायरी और साहित्य को अलग मुकाम देने के लिए मिर्जा गालिब को यह पुरस्कार मिलना चाहिए था।
उनकी लिस्ट में दूसरा नाम है द्वितीय विश्वयुद्ध में चीनी सैनिकों की तहेदिल से सेवा करने वाले डा. द्वारकानाथ कोटनिस का। जिन्हें चीन के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जा चुका है। आज भी लोग चीन में डा. कोटनिस का नाम बड़े सम्मान से लेते हैं।
उनकी सूची में तीसरा नाम है महान साहित्यकार शरत चन्द्र चटोपाध्याय का। जिन्हें जाति व्यवस्था और समाज की कुरीतियों पर अपनी लेखनी के द्वारा कड़ा प्रहार करने के लिए जाना जाता है।
काटजू की चौथी पसंद हैं मशहूर राष्ट्रवादी और महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाले सुब्रमणीय भारती। अपनी लेखनी के जरिए भारती महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहे हैं। वहीं उनकी अंतिम और पांचवी पसंद हैं मशहूर पत्रकार पी साईंनाथ। द हिंदू अखबार से जुड़े रहे पी साईंनाथ अपनी बेबाक लेखनी के लिए अलग पहचान रखते हैं।