वर्ल्ड कपः 'अनफिट' खिलाड़ियों पर क्यों लगाया गया दांव
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आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की धरती पर होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप के लिए 15 सदस्यीय टीम इंडिया का ऐलान कर दिया गया है। इसी के साथ ही सवालों का सिलसिला भी शुरू हो गया है।
टीम को लेकर दो सवाल सबसे ज्यादा पूछे जा रहे हैं, अनफिट होने के बावजूद रवीन्द्र जड़ेजा और स्टूअर्ट बिन्नी क्यों और शानदार फार्म में चल रहे युवराज सिंह क्यों नहीं। हालांकि टीम चुनना चयनकर्ताओं का विशेषाधिकार होता है लेकिन अगर जिस खेल से करोडों देश वासियों की उम्मीदें जुड़ी हों वहां सवाल पूछना जरूरी हो जाता है।
इसलिए इस टीम के संयोजन पर भी उंगलियां उठ रही हैं। सबसे बड़ा सवाल तो सौराष्ट्र के आलराउंडर अजय जड़ेजा पर ही खड़ा हो रहा है क्योंकि पूरी तरह अनफिट होने के बावजूद भी उन्हें वर्ल्ड कप स्कवायड में रखा गया है, जबकि उनकी चोट को लेकर अभी तक कोई स्थिति साफ नहीं हुई है।
चोटिल जडेजा की परफारमेंस पर भी संदेह
ऐसा पहली बार हुआ है कि वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में एक अनफिट खिलाड़ी को लेकर इतना बड़ा दांव खेला गया है। जबकि अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि वो कब तक फिट होंगे और अगर फिट हुए भी हो तो उनकी फिटनेस और फार्म तब कैसी होगी। सवाल यह भी है कि क्या चोट से उबरकर वो एकदम पुराने प्रदर्शन पर लौट पाएंगे?
पिछले वर्ल्ड कप से ठीक पहले शानदार फार्म में चल रहे तेज गेंदबाज प्रवीण कुमार की कोहनी में चोट लग गई थी, चोट गंभीर नहीं थी, लेकिन चयनकर्ताओं ने कोई रिस्क न लेते हुए उनकी जगह इन फार्म खिलाड़ी को टीम में जगह दी। ऐसी परंपरा कभी नहीं रही कि चोटिल खिलाड़ी को टीम में रखा गया वो भी वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में।
दूसरी ओर सवाल स्टूअर्ट बिन्नी को लेकर भी उठ रहे हैं। पूर्व टेस्ट खिलाड़ी और वर्तमान चयनकर्ता रोजर बिन्नी के बेटे स्टूअर्ट बिन्नी का मौजूदा परफारमेंस भी ऐसा नहीं है कि उसके आधार पर उन्हें वर्ल्ड कप की टीम में शामिल किया जाए।
युवराज की जगह औसत प्रदर्शन वाले बिन्नी क्यों
कर्नाटक की ओर से रणजी ट्राफी में खेलने वाले आलराउंडर बिन्नी ने पिछले दस मैचों में मात्र तीन अर्धशतक लगाए हैं, जिसमें उनका अधिकतम 77 रन रहा। जबकि गेंदबाजी में इस दौरान उन्होंने मात्र 16 विकेट लिए। यहां यह बताना भी जरूरी है कि इनमें से छह मैच रणजी ट्राफी के रहे।
ऐसे में कम से कम इस औसत परफारमेंस के आधार पर तो उनका दावा वर्ल्ड कप के लिए नहीं बनता। वहीं अपने छह अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों में भी वह बहुत प्रभावशाली नहीं रहे हैं। अपने 6 मैचों में उन्होंने महज 40 रन ही बनाए हैं। जिसमें 25 उच्चतम स्कोर रहा। इसके अलावा तीस साल के स्टूअर्ट बिन्नी उस मापदंड पर भी खरे नहीं उतरते जिसमें युवा टीम बनाने की बात कही जा रही थी।
दूसरी ओर इस दौरान अगर युवराज सिंह की मौजूदा परफारमेंस की बात करें तो उन्होंने लगातार तीन रणजी मैचों में बड़े शतक लगाए हैं और एक अर्धशतक भी जमाया। सौराष्ट्र के खिलाफ हुए पिछले मैच में तो उन्होंने 182 रनों की बड़ी पारी खेलते हुए अपनी पुरानी फार्म में लौटने का एहसास भी कराया।
गेंदबाजी भी उन्होंने अच्छे हाथ दिखाते हुए इन तीन मैचों में पांच विकेट भी झटके। ऐसे में युवराज सिंह को खारिज करना कहीं से भी जायज नहीं ठहराया जा सकता। वैसे भी वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में युवराज जैसे मैच विनर खिलाड़ी को छोड़कर अनफिट या औसत परफारमेंस वाले खिलाड़ी को टीम में रखना चयनकर्ताओं की मंशा पर सवाल खड़े करता है।