लालू की बांहों में 'फंसे' केजरीवाल का कुछ और था इरादा
पटना में नीतीश सरकार केशपथ ग्रहण समारोह में लालू प्रसाद यादव से गले मिलने को लेकर विरोधियों के निशाने पर आए दिल्ली केमुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिर्फ नीतीश कुमार से निजी तौर पर मिलकर उन्हें बधाई देकर लौट आना चाहते थे। लेकिन जब नीतीश कुमार ने उनसे साफ कहा कि उन्हें शपथ समारोह में आने के लिए आमंत्रित किया गया है, न कि बधाई देने केलिए। और अगर उन्हें शपथ समारोह में शामिल होने में कोई दिक्कत है तो फिर वह न आएं। तब केजरीवाल समारोह में शामिल होने को तैयार हो गए।
यह जानकारी नीतीश कुमार केकरीबी जद(यू) सूत्रों ने अमर उजाला को देते हुए बताया कि जब तमाम गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों को शपथ ग्रहण केलिए आमंत्रित किया गया तो उसी कड़ी में अरविंद केजरीवाल को भी बुलाया गया। केजरीवाल ने चुनाव में महागठबंधन की जीत केलिए अपना समर्थन दिया था इसलिए महा गठबंधन के दोनों नेता नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव उनके प्रति कृतज्ञता भी प्रकट करना चाहते थे। इसलिए भी उन्हें विशेष रूप से समारोह में बुलाया गया था।
नीतीश नहीं हुए राजी
केजरीवाल ने नीतीश कुमार से कहा कि वह समारोह में मंच पर नहीं जाएंगे बल्कि पटना आकर नीतीश कुमार से मिलकर उन्हें बधाई देकर लौट जाएंगे। दरअसल केजरीवाल खुद को उस मंच से दूर रखना चाहते थे, जिस पर लालू प्रसाद यादव, राहुल गांधी, सुखबीर बादल और शिवसेना नेता मौजूद रहेंगे। जद(यू) के एक प्रमुख नेता के मुताबिक नीतीश कुमार इससे सहमत नहीं हुए।
वह शपथ समारोह के ही दिन अपने महागठबंधन के दोनों सहयोगियों राजद और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं और अन्य अतिथियों के साथ इस तरह की राजनीतिक छुआछूत की इजाजत देने को तैयार नहीं थे। इसलिए उनकी तरफ से केजरीवाल को साफ संदेश दिया गया कि उन्हें शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया गया है घर आकर बधाई देने केलिए नहीं। अगर उन्हें मंच पर आने पर कठिनाई है तो बेहतर होगा कि वह पटना न आएं। उनकी बधाई तो वैसे भी फोन पर मिल चुकी है। इसके बाद केजरीवाल ने अपना इरादा बदला और शपथ समारोह में शामिल होने के लिए पटना पहुंच गए।