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मोदी से नजदीकी ने ली सोनी की कुर्सी?

Wed, 15 Oct 2014 10:31 PM IST
Updated Wed, 15 Oct 2014 10:31 PM IST
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Why Suresh Soni was removed from RSS Point Person for BJP

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के बीच समन्वय का जिम्मा सोमवार को सुरेश सोनी के स्थान पर कृष्णगोपाल को सौंप दिया गया। सुरेश सोनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबियों में गिना जाता है।

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केंद्र में भाजपानीत सरकार बनने के बाद संघ की ओर से लिया गया ये सबसे बड़ा फैसला है। सोनी लंबे समय से आरएसएस और भाजपा के बीच समन्व्यक की भूमिका निभा रहे थे।
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सोनी ने लोकसभा चुनावों से पूर्व नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनवाने में भी अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा के आंतरिक मामलों में सोनी की अतिसक्रियता के कारण राजनीतिक हलकों में ये भी कहा जाता था कि सोनी भाजपाई से भी ज्यादा भाजपाई हैं।
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हालांकि चर्चा ये हो रही है कि व्यापमं घोटाले में नाम आने के कारण सोनी को पद से हटाया गया है। राजनीतिक हलकों में ये भी पूछा जा रहा है कि आरएसएस ने सुरेश सोनी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकी के कारण तो पद से नहीं हटा दिया?

व्यापमं घोटाले में सुरेश सोनी का नाम

Why Suresh Soni was removed from RSS Point Person for BJP

मध्य प्रदेश के कुख्यात व्यापमं घोटाले में सुरेश सोनी का नाम भी उछला था। घोटाले की जांच राज्य द्वारा ग‌ठित इकाई कर रही है। माना जा रहा है कि जांच निर्णायक स्थिति में पहुंच चुकी है। कांग्रेस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग करती रही है।

कांग्रेस का कहना है कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान घोटाले में लिप्त संघ नेताओं को बचाना चाहते हैं, इसलिए वे जांच सीबीआई को नहीं सौंप रहे हैं।

घोटाले में सोनी का नाम आने के बाद भी अब तक उन पर शिकंजा नहीं कस सका है। कहा ये भी जा रहा है कि पिछले दिनों में जितनी विवाद सोनी के साथ जुड़े हैं, उतना किसी और संघ पदाधिकारी के साथ नहीं जुड़ा।

आडवाणी समर्थक भी थे नाराज

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भाजपा के वर‌िष्ठ नेता लाल कृष्‍ण आडवाणी को भी सोनी के कटु अलोचकों में माना जाता है। आडवाणी काफी समय से ये चाहते भी थे कि सोनी को समन्वयक पद से हटाया जाए।

मध्य प्रदेश का आडवाणी समर्थक खेमा सोनी से खुन्नस भी रखता था।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश भाजपा इकाई के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने भाजपा के पूर्व अध्यक्षों नीतिन गडकरी और राजनाथ सिंह को समझा भी लिया ‌था कि सोनी को मध्य प्रदेश में संघ-भाजपा समन्वयक पद से हटा दिया जाए।

हालांकि मोदी से नजदीकी के कारण सोनी बचे रहे। मध्य प्रदेश की राजन‌ीति में सोनी एक समय इतने शक्तिशाली हो गए थे कि उन्होंने शिवराज सिंह चौहान को हटाकर प्रभात झा को मुख्यमंत्री बनाने के लिए लॉबियिंग की थी।

शिवराज खेमा भी था असंतुष्ट

Why Suresh Soni was removed from RSS Point Person for BJP

सोनी ने प्रभात झा को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक और कार्यकाल दिलाने का प्रयास भी किया। हालांकि शिवराज खेमे ने सोनी का एक भी दांव सफल नहीं होने दिया।

भाजपा की आतंरिक राजनीति पर नजर रखने वालों का कहना है कि मध्य प्रदेश में सोनी ने स्वेच्छा से कई फैसले लिए और उसे संघ या भाजपा का फैसला बता दिया।

मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाए जाने के बाद आडवाणी ने इस्तीफा दिया था और उस समय उन्होंने इस्तीफा वापस लेने के लिए एक शर्त ये भी रखी थी कि सोनी को पद से हटाया जाए।

सोनी की जगह कृष्‍ण गोपाल

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संघ प्रमुख ने आडवाणी को इस्तीफा वापस लेने के लिए समझाया था और सोनी का पर कतरते हुए उस समय उन्होंने भाजपा और संघ के समन्वय की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय टीम को दी थी, जिसमें भय्याजी जोशी, दत्तात्रेय हंसबोले और कृष्‍ण गोपाल शामिल थे।

कृष्‍ण गोपाल को ही बाद में सोनी के स्‍थान पर समन्वयक बनाया गया। व्यापमं घोटाले की जांच कर रही स्पेशल टास्‍क फोर्स की रिपोर्ट मे भी सोनी का नाम आया था।

हालांकि बाद में एसटीएफ ने ही एक बयान जारी करक कहा था कि उसकी रिपोर्ट में किसी संघ नेता का नाम नहीं है।

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