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दौलतमंदों के घर में इतनी अशांति क्यों है भाई?

Tue, 08 Sep 2015 06:08 PM IST
सुशांत एस मोहन/बीबीसी संवाददाता, मुंबई
सुशांत एस मोहन/बीबीसी संवाददाता, मुंबई Updated Tue, 08 Sep 2015 06:08 PM IST
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Why so much discontent in large families?

उनकी शानोशौकत को देख कर हर कोई उनके जैसा बनना चाहता है। हर कोई उनकी तरह बडी गाड़ियों में घूमना चाहता है, होटलों में खाना चाहता है लेकिन किस कीमत पर?

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हाल ही की कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो बाहरी सामाजिक जीवन में खुश नजर आने वाले बड़े परिवारों में आंतरिक कलह एक आम बात बनती जा रही है।

चर्चा में चल रहा इंद्राणी मुखर्जी का मामला अपनी तरह का पहला हाई प्रोफाईल केस नहीं है, बड़े नाम वाले परिवारों की लंबी फेहरिस्त है जहां विवादों ने 'अमीर' परिवारों की कलह को सड़क पर ला दिया है।
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सामाजिक रुतबा रखने वाले परिवारों के घरों के भीतर किस तरह की तनातनी चलती है इसके कई उदाहरण वक्त वक्त पर सामने आए हैं।

इतनी अशांति क्यों?

Why so much discontent in large families?

दिल्ली के जाने माने बिजनेसमैन और फिल्म निर्माता पोंटी चड्डा को 2012 में उनके सगे भाई ने प्रपर्टी विवाद के चलते गोली मार दी थी।

भाजपा के कद्दावर नेता प्रमोद महाजन को उन्हीं के भाई प्रवीण महाजन ने साल 2006 में उनका हक न दिए जाने के आक्रोश में गोली मार दी थी।

वहीं साल 2005 से मुंबई के जाने माने उद्योगपति घराने मफतलाल परिवार में मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद का एक कड़वा रुप तब सामने आया जब बीते 23 अगस्त को लिंग परिवर्तन करवा कर अपर्णा से अजय बने मफतलाल परिवार के बड़े बेटे के देहांत का उनके परिवार को पता ही नहीं चला।

बड़े परिवारों के विवादों में अंबानी परिवार का विवाद, सुनंदा पुष्कर की हत्या और मुंबई के किलाचंद परिवार का नाम भी याद आता है लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर क्या वजहें हैं कि इन समृद्ध परिवारों के अंदर इतनी अशांति है।

दबाव करता है दूर

Why so much discontent in large families?

जाने माने मनोचिकित्सक डॉ किरण शांडिल्य कहती हैं, "आप ये आम तौर पर नहीं कह सकते कि यह सिर्फ बड़े परिवारों की परेशानी है, लेकिन पैसे को पाने का दबाव इसका एक बड़ा कारण है।"

वो कहती हैं, "परिवार व्यक्ति से बनता है और आजकल एक व्यक्ति पर ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने का दबाव है और यही दबाव उसे अपनों से दूर कर देता है।"

मनोचिकित्सक डॉक्टर श्याम मिठिया के मुताबिक, "परिवार के सदस्य अब एक दूसरे को समय नहीं दे पाते जिससे उनकी आपस की बॉडिंग कमजोर हो जाती है।

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तनाव और असुरक्षा

Why so much discontent in large families?

परिवार जितना अमीर होता जाता है यह व्यस्तता उतनी ही बढती जाती है और साथ ही दूरी भी।""आजकल 'ट्रेंड' में रहने का जमाना है और जो जितना 'ट्रेंडी' होगा, समाज में उसकी पूछ उतनी ही होगी।" कहते हैं मानव व्यवहार पर काम कर रहे मनोचिकित्सक अजीत दांडेकर।

श्यामकहते हैं, "अमीर लोग हर समय एक दबाव में जीते हैं कि उनपर लोगों की नजर है और यह दबाव 'तनाव' और 'असुरक्षा' में बदल जाता है, इंद्राणी मामले में बेटी को बहन बना कर मिलवाना ऐसी ही असुरक्षा का परिचायक है।"

इंद्राणी की कई शादियों के सवाल पर डॉ किरण ने कहा, "ये भी एक ट्रेंड है, जिससे आजकल का समाज गुजर रहा है। यह पश्चिम में सामान्य बात है लेकिन हमारे समाज के लिए नई और बस इसलिए इंद्राणी की शादियों पर चर्चा हो रही है, वर्ना यह एक निजी विचार है।"

लोग अकेले क्यों जीना चाहते हैं?

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ट्रेंड का जिक्र आने पर कई लोग बॉलीवुड को भी इसका दोषी मानते हैं लेकिन बॉलीवुड इस मामले में अलग सोच रखता है।आर्थिक संपन्नता का दबाव और परिवार की दूरी के अलावा एक और कारण है जिसे डॉक्टर्स पारिवारिक उथल पुथल की बड़ी वजह मानते हैं।

आज सफलतम अभिनेत्रियों में मानी जाने वाली कंगना राणौत हिमाचल प्रदेश के एक छोटे गांव से आई हैं और वो कहती हैं, "ये अकेले जीने की पद्धति मुझे परेशान करती है, मुझे नहीं पता क्यों लोग यहां अकेले जीना चाहते हैं?"

वो कहती हैं, "मैं हमेशा से अपने परिवार के सहारे रही हूं और उनसे राय मशविरा करती आई हूं और मैं जानती हूं कि जिंदगी फिल्म नहीं है, जिस दिन मैंने इस चकाचौंध में उन्हें खो दिया मैं अकेली रह जाउंगी।"

सच्चाई और हकीकत का फर्क

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वहीं बड़े फिल्मी परिवार से आने वाले अभिनेता इमरान खान 'संपन्नता' से जुड़े विवाद की बात पर इंकार करते हैं।
वो कहते हैं, "ये आपकी परवरिश पर निर्भर करता है, मैं एक संपन्न परिवार से हूं लेकिन हमें घर में बड़ों और छोटों का फर्क समझाया गया है और मैं आज भी अपने बड़ों से जुबान नहीं लड़ा सकता।"

वहीं निर्माता निर्देशक महेश भट्ट का कहना है कि फिल्में सच्चाई नहीं होती और सच्चाई और हकीकत का फर्क हमें समझना, जमीन पर रहना होगा, वर्ना उदाहरण तो कई हैं।

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