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'डीजल, पेट्रोल कारों से अतिरिक्त शुल्क क्यों न वसूला जाए'

नई दिल्ली/ब्यूरो

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:32 AM IST
why should not be collected additional fees from diesel petrol cars asked supreme court
दिल्ली में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण से चिंतित सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। सर्वोच्च अदालत ने सरकार से पूछा है कि पर्यावरण के नुकसान के एवज में मुआवजे के तौर पर डीजल और पेट्रोल कारों पर अतिरिक्त शुल्क क्यों नहीं वसूला जाना चाहिए। शीर्षस्थ अदालत ने इसके अलावा ईस्टर्न और वेस्टर्न बाईपास के निर्माण के मुद्दे पर केंद्र, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है।
सर्वोच्च अदालत ने सरकार से एमाइकस क्यूरे (अदालत के सहायक) के उस आवेदन पर जवाब तलब किया है जिसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में नए डीजल वाहनों की खरीद पर 25 प्रतिशत पर्यावरण शुल्क और पुराने डीजल वाहनों के सालाना बीमे पर 4 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क वसूला जाना चाहिए, जबकि पेट्रोल वाहनों के सालाना बीमे पर 2 प्रतिशत शुल्क वसूला जाना चाहिए। साथ ही एमाइकस क्यूरे व वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने आवेदन में अदालत से बीमा कंपनियों को वाहनों के प्रदूषण प्रमाण-पत्र और सालाना बीमा कराना सुनिश्चित कराने का निर्देश जारी करने की गुजारिश की है।

जस्टिस अल्तमस आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ ने एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। हाल ही में चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रदूषण की वजह से दिल्ली पर छाए स्मॉग पर गहरी चिंता जताई थी। इस मसले पर एनजीओ सेंटर फॉर साइंस एंड एंवायरमेंट ने भी एक आवेदन दायर कर कहा है कि राजधानी में स्मॉग के लिए खासकर वाहनों की बढ़ती संख्या जिम्मेदार है।

पीठ के समक्ष एमाइकस क्यूरे साल्वे ने कहा कि दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति ने नवंबर के पहले सप्ताह में स्पष्ट किया है कि राजधानी में प्रदूषण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के स्तर पर पहुंच गया है। प्रदूषण की माप में जो स्तर सामने आया है, वह स्वीकार योग्य नहीं है, क्योंकि यह सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। वहीं दिल्ली सरकार ने पीठ के समक्ष दी गई इस दलील पर सहमति जतायी की राजधानी के रास्ते से गुजरकर दूसरे राज्यों को जाने वाले वाहनों के लिए बाईपास जल्द से जल्द बनने चाहिए।

एमाइकस क्यूरे के आवेदन पर सहमति जताते हुए दिल्ली सरकार ने बताया कि ईस्टर्न एक्सप्रेस-वे का कार्य 65 प्रतिशत हो चुका है, जबकि वेस्टर्न एक्सप्रेस-वे में कोई काम नहीं हुआ है। शीर्षस्थ अदालत से बाईपास को जल्द तैयार कराने की मांग पर केंद्र सहित अन्य पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अगले वर्ष जनवरी में सुनवाई करेगी। गौरतलब है कि एमाइकस ने आवेदन में यह साफ किया है कि दिल्ली में प्रतिदिन नए निजी वाहनों की संख्या में 1400 का इजाफा हो रहा है जो सीएनजी आने से पहले का दोगुना है। इसके अलावा डीजल वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
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