प्रियंका ने अपने चाचा को भी कहा था विश्वासघाती!
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वरुण गांधी, प्रियंका गांधी के चचेरे भाई हैं। उम्र में वे वरुण से आठ साल बड़ी हैं, लेकिन इन दिनों उनपर वो जैसे हमले कर रही हैं, मानों इन चुनावों में उनके निशाने पर वही रहने वाले हैं।
दो दिन पहले प्रियंका ने वरुण को रास्ते से भटका हुआ बताया, जवाब में वरुण ने इशारों-इशारों में उन्हें 'लक्ष्मण रेखा' ना पार करने के नसीहत दे डाली। प्रियंका और तीखी हुई और वरुण को 'विश्वासघाती' बता दिया।
प्रियंका आखिर ये हमले क्यों कर रही हैं? क्या प्रियंका के ये बयान सुल्तानपुर में वरुण गांधी को घेरेने की रणनीति का हिस्सा हैं या परिवार से अलग हो चुके सदस्य पर निजी हमले करना उनकी पुरानी आदत है?
नेहरू-गांधी परिवार के बीच हो रहे वाक-युद्घ के बाद ये सवाल एक बार फिर सतह पर आ गए हैं। आरोप-प्रत्यारोप का ये सिलसिला कहां तक जाएगा, ये तो चुनावी सरगर्मी से ही तय होगा।
अरूण नेहरू के खिलाफ भी प्रियंका ने किए थे हमले
दरअसल, प्रियंका वरुण पर जैसे हमले कर रही हैं, वह पहली बार नहीं है। ऐसे ही हमले उन्होंने 15 साल पहले अपने चाचा अरुण नेहरू के खिलाफ भी किए थे। प्रियंका ने अरुण नेहरू को 'विश्वासघाती' और 'पीठ पर छुरा भोंकने वाला' बताया था।
1999 लोकसभा चुनावों में अरुण नेहरू ने गांधी परिवार के गढ़ अमेठी-रायबरेली और सुल्तानपुर में कांग्रेस को टक्कर देने की कोशिश की थी। कुछ ऐसी ही कोशिश इन चुनावों में वरुण गांधी ने की है।
अरुण नेहरू ने भाजपा के टिकट पर रायबरेली सीट से गांधी परिवार के पुराने वफादार सतीश शर्मा को टक्कर दी थी। और इस बार वरुण ने सुल्तानपुर की सीट से गांधी परिवार के दूसरे वफादार संजय सिंह की पत्नी अमिता सिंह को टक्कर दी है।
किसी जमाने में राजीव के बहुत करीबी थे अरूण
मोती लाल नेहरू के बड़े भाई नंदलाल नेहरू के परपोते अरूण नेहरू किसी जमाने में राजीव गांधी के बहुत करीबी थे। 1980 में इंदिरा गांधी के कहने पर वे अपना सफल कॉरपोरेट करियर छोड़ कर राजनीति में आ गए।
उसी वर्ष गर्मियों में इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत हो गई। संजय की राजनीतिक विरासत पर उनकी पत्नी मेनका गांधी ने दावेदारी की तो अरुण पचास सांसदों के साथ इंदिरा गांधी के पास गए और राजीव को संजय का उत्तराधिकारी बनाने की वकालत की। इंदिरा ने अरुण की ही बात मानी।
इंदिरा की मौत के बाद अरूण नेहरू ने ही राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए तैयार किया।
रायबरेली में प्रियंका के भाषण के कैसेट बंटे
बोफोर्स के धमाके में अरुण नेहरू ने भी राजीव का साथ छोड़ दिया। 1999 में वे भाजपा के टिकट पर रायबरेली सीट से गांधी परिवार के करीबी कैप्टन सतीश शर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ रहे थे।
सतीश शर्मा का प्रचार करते हुए प्रियंका ने कहा था, एक आदमी जो मेरे पिता (राजीव गांधी) की कैबिनेट में मंत्री था, उसने उनकी पीठ में छुरा भोंक दिया।
रायबरेली की जनता से सवाल करते हुए उन्होंने कहा था, 'मुझे जवाब दीजिए, आप ऐसे आदमी को यहां कैसे रहने दे रहे हैं। उसने यहां आने की हिम्मत कैसे की।' रायबरेली की जनता से भावानात्मक अपील करते हुए उन्होंने कहा था कि मैं जब यहां आ रही थी, मेरी मां सोनिया ने कहा था कि किसी के खिलाफ न बोलना। लेकिन मैं अपने मन की बात आपसे न कहूं तो किससे कहूं।
उन चुनावों में अरूण नेहरू हार गए थे। कहा जाता है कि रायबरेली में प्रियंका के उस भाषण के कैसेट बनाकर बांटे गए थे।
चचेरे भाई पर प्रियंका ने यों किया पहला हमला
चचेरे भाई वरुण गांधी के खिलाफ प्रियंका गांधी की तल्खी पिछले दिनों सुल्तानपुर की एक सभा में दिखी थी। अमेठी में राहुल गांधी का परचा भराने के बाद प्रियंका ने सुल्तानपुर में कांग्रेस कार्याकर्ताओं के बीच कहा, 'वह (वरुण) मेरे ही परिवार का सदस्य है। वह मेरा भाई है। लेकिन गलत रास्ते पर चला गया है। परिवार को कोई सदस्य गलत रास्ता चुन ले तो घर के बड़े उसे सही रास्ता बताते हैं।'
मुसीनगंज गेस्ट हाउस में प्रियंका ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कहा कि वरुण गांधी को सही रास्ते पर लाने के लिए उन्हें हरा दें। प्रियंका ये भाषण मोबाइल कैमरे से रिकॉर्ड किया गया और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया।
वरुण ने कुछ दिनों पहले ही अमेठी में राहुल गांधी के कार्यों की तारीफ की थी, जिससे भाजपा असहज दिखी थी। ऐसे में प्रियंका वरुण पर सीधा हमला चौंकाने वाला था।
वरुण के बचाव में फिर सामने आईं मेनका गांधी
वरुण गांधी ने अमेठी में राहुल गांधी के काम की तारीफ की, तो उनकी मां मेनका गांधी ने उन्हें सोचसमझ कर बोलने की सलाह दी। प्रियंका के हमले के बाद वरुण के बचाव के लिए मेनका ही पहले समाने आई।
मेनका गांधी ने प्रियंका का नाम लिए बिना कहा कि देश भक्ति और देशप्रेम क्या होता है, इसके सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देशसेवा करना भटकना है तो कौन रास्ता भटक गया है। आने वाले समय में देश बता देगा। हालांकि प्रियंका के आरोपों पर वरुण के जवाब का भी इंतजार था।
वरुण ने मंगलवार को सुल्तानपुर से परचा भरने के बाद कहा कि मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी न समझा जाए। उन्होंने कहा, 'राजनीति में पिछले 10 सालों में मैंने कभी अमर्यादित टिप्पणी नहीं की है। मैंने मर्यादा की लक्ष्मण रेखा पार नहीं की। चुनाव में निजी हमलों के बजाय मुद्दों की बात की जाए।'
वरुण के बयान के बाद और तीखी हुईं प्रियंका गांधी
वरुण गांधी का बयान सामने आते ही प्रियंका गांधी और तीखी हो गईं। उन्होंने कहा, 'कोई भी हो, ये मायने नहीं रखता कि खून के रिश्तों में वह कितना करीबी है, अगर हमारी विचारधारा के विरोध में है, तो वह गलत रास्ते पर है। ये हमारे परिवार के साथ विश्वासघात है।'
प्रियंका के नए आरोप पर वरुण गांधी या उनकी मां मेनका गांधी ने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, माना जा रहा है अपने चाचा संजय गांधी के परिवार के खिलाफ प्रियंका ने पहली बार इतना कड़ा बयान दिया है।