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जानबूझकर पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं कर रही मोदी सरकार?

Fri, 02 Jan 2015 08:17 AM IST
Updated Fri, 02 Jan 2015 08:17 AM IST
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why petrol and diesel price is not cut in india after reach lowest level?

केंद्र सरकार ने एक बार फिर से पेट्रोल के ऊपर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है। केंद्र सरकार ने गुरूवार को प्रति लीटर पेट्रोल पर दो रुपये उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया है।

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सरकार ने कहा है कि इंफ्रास्ट्रकचर डेवलपमेंट के लिए यह बढ़ोतरी की गई है। जहां पर केंद्र सरकार को पेट्रोल-डीजल सस्ता करना चाहिए था। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी कच्चे तेल की कीमत 53 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई है। क्या सरकार दिल्ली में चुनावों का इंतजार रही है?
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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय बॉस्केट के कच्चे तेल कीमत 31 दिसंबर को 53.53 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) ने दिसंबर, 2014 के दौरान कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के अंतर्राष्ट्रीय मूल्यों की समीक्षा की है।
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जनवरी, 2015 से प्रभावी पीडीएस कैरोसीन और घरेलू एलपीजी की अंडर-रिकवरी मूल्य 19.46 रूपये प्रति लीटर (पिछले महीने में 25.69 रूपये प्रति लीटर) और 235.91 रूपये प्रति सिलेंडर (पिछले महीने में 279.91 रूपये प्रति सिलेंडर) होगा।

जनता को नहीं मिल रहा फायदा

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गौरतलब है कि सरकार को सीधे तौर पर फायदा हो रहा है। पर इसका फायदा जनता को नहीं मिल रहा है। वित्‍त वर्ष 2014-15 के छह महीनों के लिए अंडर-रिकवरी 51,110 करोड़ रूपए रही है। वित्त वर्ष 2013-14 के पूरे वर्ष के लिए यह राशि 1,39,869 करोड़ रूपये रही थी।

भारतीय बॉस्‍केट के कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमत 31 दिसंबर को 53.53 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि 30 दिसंबर, 2014 को यह 53.81 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी। रुपये के संदर्भ में कच्‍चे तेल की कीमत 31 दिसंबर, 2014 को घटकर 3390.05 रुपये प्रति बैरल हो गई जबकि 30 दिसंबर, 2014 को यह 3430.39 रुपये प्रति बैरल थी। रुपया 31 दिसंबर, 2014 को रुपया मजबूत होकर 63.33 रुपये प्रति अमेरीकी डॉलर पर बन्‍द हुआ, जबकि 30 दिसंबर, 2014 को 63.75 रुपये प्रति अमे‌रिकी डॉलर था।

जून 2014 और जुलाई 2014 के बीच में ब्रैंट क्रूड (ऑयल) की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी। पर धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने लगी।

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने की वजह अमेरिका, यूरोप और चीन में ब्रैंट क्रूड की मांग में कमी आना था। अमेरिका, चीन और यूरोप के देशों ने अपने यहां ही क्रूड ऑयल का उत्पादन शुरू कर दिया।

इससे ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज(ओपेक)देशों के ब्रैंट क्रूड ऑयल की मांग कम हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि ओपेक देशों के सदस्य देशों कुवैत और इराक ने क्रूड ऑयल पर भारी डिस्काउंट देना शुरू कर दिया। इसके चलते दूसरे देशों को सस्ता ब्रैंट क्रूड मिलने लगा। भारत भी खाड़ी देशों से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल का आयात करता है। इसका सीधा फायदा भारत के लोगों को मिलने लगा है।

अमेरिका ने यह आयात घटाकर 35 फीसदी कर दिया

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जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2005 तक 60 फीसदी क्रूड ऑयल का आयात करता था। वर्ष 2013 तक अमेरिका ने यह आयात घटाकर 35 फीसदी कर दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रैंट क्रूड की कीमत 1 अगस्‍त 2014 को 103.45 डॉलर प्रति बैरल थी। 22 अगस्त को यह कीमत घटकर 100.99 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

अक्टूबर 2014 में ब्रैंट क्रूड की कीमत 88.66 डॉलर, 3 नवंबर को यह कीमत 84.9 डॉलर, 27 नवंबर को 72.68 डॉलर और 28 नवंबर को यह कीमत घटकर 72.58 डॉलर प्रति बैरल हो गई। एक बैरल में 158.98 लीटर तेल होता है। वर्ष 2013-14 के आकड़ों के मुताबिक भारत प्रति दिन 385,000 बैरल तेल का आयात करता है।

तेल की मांग कम होने के बावजूद ओपेक देशों ने यह फैसला किया है कि वह तेल का उत्पादन नहीं घटाएंगे। तेल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कम होने से भारत मे थोक महंगाई दर से खुदरा महंगाई दर में कमी देखने को मिली है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में तेल की कीमत कम होने के चलते भारत की तेल विपणन कंपनियों को घाटा भी कम हु‌आ है।

मई 2014 में जहां भारत की तेल विपणन कंपनियों का घाटा 318 करोड़ रुपए था। नवंबर 2014 में वह घटकर 188 करोड़ रुपए के स्तर पर आ गया है। आपको बताते चले कि केंद्र सरकार ने अपने बजट 2014-15 में ऑयल सब्सिडी पर 63,427 करोड़ रुपए का आवंटन किया है। आने वाले समय में इसका फायदा भी सरकार को मिलेगा। क्योंकि तेल की कीमत कम होने से सरकार को सब्सिडी में बचत होगी।

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