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गैंगरेपः चार्जशीट में क्यों नहीं किशोर का नाम

Fri, 04 Jan 2013 11:08 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 04 Jan 2013 11:08 PM IST
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why not juvenile named in delhi gangrape chargesheet

दिल्ली में गैंगरेप का शिकार हुई युवती के भाई ने चार्जशीट में नाबालिग आरोपी का नाम शामिल नहीं होने पर दुख जाहिर किया है। बलिया में भाई ने कहा कि उस आरोपी का अपराध सिर्फ इसलिए माफ नहीं किया जा सकता क्योंकि वह नाबालिग है। उसके बालिग होने में केवल चार महीने ही बाकी हैं।

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उसे अच्छी तरह पता था कि वह क्या कर रहा है। उसे बालिग ही माना जाना चाहिए। उसने कहा कि यदि दिल्ली पुलिस ऐसा नहीं करती है तो हम कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेंगे। बताया जा रहा है कि छह आरोपियों में से नाबालिग ने ही युवती के साथ सबसे ज्यादा दरिंदगी की थी।
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फिंगर प्रिंट का मिलान हुआ
दिल्ली पुलिस को गैंगरेप मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट मिल गई है। बस से मिले फिंगर प्रिंट का आरोपियों के फिंगर प्रिंट से मिलान हो गया है। राम सिंह, नाबालिग आरोपी, मुकेश और अक्षय ठाकुर बस में ही रहते थे। पवन और विनय वारदात वाले दिन ही बस में आए थे। विनय की हथेली का निशान बस से मिला है। हालांकि पवन के फिंगर प्रिंट बस से नहीं मिल पाए।
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कुल 13 धाराएं लगाईं
पुलिस ने इस मामले में 80 लोगों को गवाह बनाया है और आईपीसी की 13 धाराओं में मामला दर्ज किया है। दो धाराएं और बढ़ाई गई हैं। आरोपियों पर आईपीसी की धारा 412 (डकैती का सामान आरोपियों के कब्जे से मिलना) और 397 (डकैती के दौरान खतरनाक हथियार का प्रयोग करना) भी लगाई गई है।

इंसाफ के लिए जंग जारी, 40 ने सिर मुंडवाया
गैंगरेप की शिकार युवती को इंसाफ दिलाने की जंग जारी है। दिल्ली में जंतर मंतर पर शुक्रवार को करीब 40 लोगों ने अपना सिर मुंडवाया। इनमें कई महिलाएं भी थीं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार जनता की आवाज को जबरन दबाने की कोशिश कर रही है।

वहीं, संसद का विशेष सत्र बुलाकर दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा का कानून बनाने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे राजेश गंगवार और बाबू सिंह की हालत और बिगड़ गई है। शुक्रवार को राजेश के अनशन का 12वां और बाबू सिंह का 7वां दिन था।

संसद का नहीं करें इंतजार, खुद बनाएं सख्त कानून: हाईकोर्ट
दुष्कर्म और छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं से चिंतित बांबे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कहा है कि उसे कानून में बदलाव के लिए संसद का इंतजार नहीं करना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को खुद ही अपने कानून में बदलाव करने के लिए कहा है कि ताकि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके। अदालत ने राज्य सरकार को कानून में बदलाव पर विचार करने और इस संबंध में चार सप्ताह में हलफनामा दायर करने को कहा है।


फास्ट ट्रैक कोर्ट के मुद्दे पर विचार करेगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में किए जाने के मुद्दे पर विचार करेगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने महिलाओं की सुरक्षा के कानूनों को लागू करने पर विचार करने की मंजूरी भी प्रदान कर दी है। सुप्रीम कोर्ट ने फास्ट ट्रैक अदालतों की जरूरत पर सहमति जताते हुए कहा कि न्यायाधीशों के कई पद खाली हैं और अदालतों की स्थापना की जरूरत है।

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