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'आसाराम को साजिश रचने का आरोपी क्यों नहीं बनाया जा रहा?'

Mon, 13 Jul 2015 03:21 AM IST
Updated Mon, 13 Jul 2015 03:21 AM IST
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why not asaram treat as a conspirator in murder case?

उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व महानिदेशक ब्रजलाल का मानना है कि आसाराम बापू रेप केस में एक के बाद एक हो रही गवाहों की हत्या के पीछे साजिश साफ नजर आ रही है।

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सभी गवाहों को एक ही तरीके से मारा जा रहा है। जो समझौते के लिए मान जाता है, वह बच जाता है। जो चुप बैठने के लिए राजी नहीं होता, उसे हमेशा के लिए खामोश कर दिया जाता है। अभी और भी गवाह मारे जा सकते हैं क्योंकि पुलिस साजिश के रहस्य से परदा उठाने की कोशिश नहीं कर रही है।
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ब्रजलाल ने अभी तक हुई गवाहों की हत्या के बारे में गहराई से अध्ययन किया है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने दावा किया कि सात ऐसे कारक मौजूद हैं, जिनसे लगता है कि सभी हत्या एक ही गिरोह ने की है। शाहजहांपुर में कृपाल सिंह और मुजफ्फरनगर में अखिल की हत्या में मोडस ओपरेंडी (अपराध का तरीका ) बिल्कुल एक जैसा रहा।
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दोनों की हत्या रात पौने आठ और सवा आठ के बीच हुई। दोनों को पीछे से गोली मारी गई। दोनों को लगी बुलेट नहीं मिली। ऐसा लगता है कि गोली रिवाल्वर से मारी गई। हत्या से पहले दोनों का बाइक से पीछा किया गया। दोनो वारदात में हत्यारों की संख्या दो रही। दोनों में हत्यारों का पता नहीं चला।

आसाराम के गुर्गों के दो गुट काम कर रहे

why not asaram treat as a conspirator in murder case?

दोनों गवाहों से पहले आसाराम के पक्ष में शपथ पत्र देने के लिए कहा गया था। कृपाल सिंह शाहजहांपुर की ही बिटिया के साथ रेप के मामले में गवाह था, जबकि सूरत आश्रम में रसोइया रहा अखिल दो बहनों से रेप के मामले में कोर्ट में गवाही दे चुका था।

उनका कहना है कि आसाराम के गुर्गों के दो गुट काम कर रहे हैं। एक पहले गवाहों के पास समझौते के लिए जाता है। जो मान जाए, वह बच जाता है। जो न माने, वह मारा जाता है। हर बार समझौता कराने में अर्जुन भाई का नाम आ रहा है।

पूर्व डीजीपी का कहना है कि एक तो पुलिस इन घटनाओं का सच सामने नहीं ला रही है। दूसरा आसाराम को साजिश रचने (धारा 120बी) का आरोपी नहीं बनाया जा रहा। अगर मुख्तार अंसारी जेल में रहते कृष्णानन्द राय की हत्या कराने पर षड्यंत्र का मुल्जिम बन सकता है तो आसाराम क्यों नहीं?

पश्चिमी यूपी में तो यह ट्रेंड है, जिसमें तमाम गैंगस्टर जेल के अंदर से हत्या कराते हैं। ब्रजलाल का कहना है कि जब वे एडीजी (कानून व्यवस्था) और एसटीएफ के इंचार्ज थे, तब एनआरएचएम घोटाले में डाक्टर सचान और डाक्टर विनोद आर्य की हत्या हुई थी। उन्होंने मोडस ओपरेंडी के आधार पर ही इसका खुलासा कराया था।

दोनों हत्याओं में बेलेस्टिक इंवेस्टिगेशन कराई गई, जिससे पता चला कि हत्या में एक ही तरीके के असलाह इस्तेमाल किए गए हैं। आसाराम बापू रेप केस में इस तरह जांच नहीं कराई जा रही। इससे आशंका पैदा हो रही है कि गवाहों की हत्याओं का सिलसिला थमने वाला नहीं।

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