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अब तक क्यों नहीं पास हुआ रेप के खिलाफ कड़ा कानून?

Wed, 19 Dec 2012 11:05 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 19 Dec 2012 11:05 AM IST
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why no stren law against rape case in india

दिल्ली में बलात्कार के बढ़ते मामलों को लेकर सदन से लेकर सड़क तक गुस्सा देखा जा रहा है। अब सरकार पर इस बात का दबाव बढ़ गया है कि हाल ही में लोकसभा में पेश किए गए क्रिमिनल लॉ (संशोधन) बिल को मंजूर करे। इस कानून में बलात्कारियों और तेजाब फेंकने वालों के खिलाफ कड़ी सजा का प्रावधान है।

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बस दो दिन, कैसे होगा बिल पास
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकार शीतकालीन सत्र में बचे दो दिन में यह बिल पास करा सकेगी। संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा बुधवार के बाद स्थगित कर दी जाएगी जबकि लोकसभा बृहस्पतिवार तक चलेगी।
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आजीवन कारावास का कानून
क्रिमिनल लॉ (संशोधन) विधेयक को 4 दिसंबर को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने लोकसभा में पेश किया था। इसमें 'रेप' शब्द की जगह 'यौन दुर्व्यवहार' को जगह दी गई है। बिल में 'यौन दुर्व्यवहार' के लिए आजीवन कारावास का कानून है चाहे वह महिला हो या फिर पुरुष।
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तेजाब फेंकने पर 10 साल की सजा
नए संशोधन बिल में तेजाब फेंकने को भी अपराध माना गया है जिसमें अधिकतम 10 साल जेल की सजा का प्रावधान है। तेजाब फेंकने की कोशिश पर दोषी को 5-7 साल तक जेल का प्रावधान है।

अपराध की बढ़ जाएगी व्याख्या
फिलहाल आईपीएसी की धारा-375 में रेप शब्द का इस्तेमाल है। रेप की जगह यौन दुर्व्यवहार शब्द से अपराध की व्याख्या बढ़ जाती है और पुरुष भी इसके तहत कानून की मांग कर सकेंगे।

सहमति से सेक्स की बढ़ेगी उम्र सीमा
अगर शिकायतकर्ता 18 साल से कम उम्र का है तो अदालत या पुलिस स्टेशन में उसे आरोपी के सामने पेश होने की जरूरत नहीं होगी। संशोधन बिल में आपसी सहमति से सेक्स के लिए उम्र की सीमा 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।

नोटिस मिलने पर सदन में हो सकती चर्चा
महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा का कहना है कि सरकार को इस मसले पर आगे बढ़कर पहल करनी चाहिए। एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि मेरी लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार से बात हुई है। स्पीकर ने उन्हें आश्वासन दिया है कि यदि कोई सांसद इस मुद्दे पर नोटिस देता है तो सदन में जरूर चर्चा होगी। ऐसे में किसी महिला सांसद को इसमें पहल करनी चाहिए।

'हमारी बेटियां, बहनें और माताएं सुरक्षित नहीं'
इधर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पीड़ित लड़की से सफदरजंग अस्पताल में मुलाकात की। सोनिया ने दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखी चिट्ठी में कहा कि इस घटना से सभी स्तब्ध हैं। यह शर्म की बात है कि ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही है। दिल्ली जैसे शहर में हमारी बेटियां, बहनें और माताएं सुरक्षित नहीं हैं। सोनिया ने सरकार को तुरंत कठोरतम कदम उठाने को कहा है।


गृह मंत्री ने उच्चस्तरीय बैठक की
इधर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गृह मंत्री सुशील कुमार ने एक अहम बैठक की। इस बैठक में गृह राज्य मंत्री और दिल्ली पुलिस के आला अफसरों ने भाग लिया। बैठक के बाद शिंदे ने पत्रकारों को बताया कि वे इस मसले पर सदन में बयान देंगे।

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