आखिर क्या थे जोशी-मोदी की मीटिंग के मायने?
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केंद्रीय कैबिनेट में खुद को शामिल किए जाने की अटकलों के बीच वरिष्ठ भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।
सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में करीब 45 मिनट तक बातचीत हुई।
यह मुलाकात मीडिया में आ रही उन खबरों के बीच हुई, जिसमें कहा गया है कि कैबिनेट का जल्द विस्तार किया जा सकता है और रक्षा जैसे अहम मंत्रालयों को पूर्णकालिक मंत्री मिल सकते हैं।
रक्षा मंत्री बनाए जा सकते हैं जोशी
जोशी का नाम रक्षा मंत्री के संभावितों के तौर पर लिया जा रहा है। अभी रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार वित्त मंत्री अरुण जेटली के पास है। पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के बावजूद जोशी को मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिल सकी।
जोशी को संघ का भी पूरा समर्थन हासिल है। जोशी की मोदी से भेंट भाजपा अध्यक्ष और गृहमंत्री राजनाथ सिंह की शीर्ष संघ नेताओं से मुलाकात के बाद हुई। सूत्रों का कहना है कि जोशी ने मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में काम करना स्वीकार किया था।
पार्टी सूत्रों का यह भी कहना है कि वह सलाहकार की भूमिका पर भी विचार कर सकते हैं। लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद मोदी जोशी के घर गए थे और उन्होंने वहां पर एक घंटे से ज्यादा वक्त गुजारा था।