फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   why modi stops talks with pakistan

पढ़िए, पाक को करारा जवाब के पीछे की पूरी कहानी

Tue, 19 Aug 2014 08:40 PM IST
Updated Tue, 19 Aug 2014 08:40 PM IST
विज्ञापन
why modi stops talks with pakistan

लगभग तीन महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अपने शपथग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता भेजा तो ये माना जाने लगा कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के साथ संबंध बेहतर बनाने के इच्छुक हैं।

विज्ञापन


उन्होंने भारतीय सीमा पर पाकिस्तानी रेंजरों द्वारा की गई गोलीबारी पर भी वैसी टिप्पणी नहीं की, जैसी वे गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए या भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में चुनावी रैलियों में अक्सर किया करते थे।
विज्ञापन


सोमवार को जब ये खबर आई कि 25 अगस्त को प्रस्तावित भारत-पाक सचिवों की वार्ता के पहले पाकिस्तानी उच्चायोग ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को बातचीत के लिए बुलावा भेजा है तो मानो नर्मी और अनदेखी की इंतहा होने लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पाकिस्तान कदम-दर-कदम भारत के अंदरुनी मामलों में आगे बढ़ रहा था और प्रधानमंत्री मोदी आंखे बंद किए, शरीफ के साथ अपनी दोस्ती के तसव्वुर में खोए थे! हालांकि ये सच्चाई नहीं थी।

सोमवार को भारत सरकार के फैसले ने ये साबित कर दिया कि प्रधानमंत्री पाक की किसी भी हरकत को अनदेखा नहीं कर रहे हैं। पाक के खिलाफ अब भी वो उतने ही सख्त हैं, जितना कि लोकसभा चुनावों से पहले थे।

विदेश सचिव ने पाक को किया था मना

why modi stops talks with pakistan

दरअसल प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंधों के इच्छुक थे, लेकिन उन्होंने संबंधों की सीमाएं भी तय कर रखी थी, जिन्हें लांघना कतई पाकिस्तान के ‌हित में नहीं था।

पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने उन्हीं सीमाओं में से एक सीमा का उल्‍लंघन किया। मोदी सरकार की ओर से उन्हें स्पष्ट निर्देश थे कि यदि पाकिस्तान उच्चायोग ने कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से बातचीत करने की कोशिश की तो सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी जाएगी।

भारत की विदेश सचिव सुजाता सिंह ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित को सख्त निर्देश दिया था कि वो हुर्रियत नेताओं से मुलाकात न करें। लेकिन उन्होंने सुजाता सिंह के निर्देश की अनदेखी कर दी।

नतीजतन, भारत ने 25 अगस्त की सचिव स्तर की वार्ता रद्द कर दी। 26 मई को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ प्रधामंत्री मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने भारत आए थे, तब उन्होंने हुर्रियत के नेताओं से मुलाकात नहीं की थी।

शरीफ के फैसले को भारत के साथ संबंधों को सुधारने के दिशा में पहल के रूप में देखा गया था।

मोदी ने की थी नवाज से कड़े लहजे में बात

why modi stops talks with pakistan

उस मुलाकात को मोदी की ओर से उपमहाद्वीप में शांति कायम करने की कोशिश भी माना गया। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक, मोदी ने आतंकवाद का समर्थन करने के मुद्दे पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से कड़े लहजे में बात की थी।

उन्हीं दिनों लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकियों ने अफगानिस्तान में भारतीय उच्‍चायोग पर हमला किया था। वे भारतीय मिशन के अधिकारियों को बंधक बनाकर मोदी के शपथग्रहण समारोह में खलल डालना चाहते थे।

मोदी को इन बातों की पूरी जानकारी थी। उन्होंने शरीफ को आतंकवाद के समर्थन के मुद्दे पर चेतावनी भी दी थी। इस्लामाबाद को चेताया गया था कि बातचीत की जाएगी, लेकिन शर्तों के साथ।

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, पाकिस्तान को लेकर मोदी की नीतियां शुरू से ही पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव की नीतियों के करीब रही हैं, बजाय की अटल बिहारी वाजपेयी या मनमोहन स‌िंह की नीतियों के।

मिशन 44+ पर भी है नरेंद्र मोदी की नजर

why modi stops talks with pakistan

वहीं, प्रधामंत्री मोदी कश्मीर चुनावों को लेकर भी सजग थे। हुर्रियत नेताओं की पाकिस्तानी नेताओं से जब भी मुलाकात हुई, घाटी में विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं। कश्मीर में इसी साल चुनाव होने हैं।

मोदी के एजेंडे में पाकिस्तान से बातचीत से ज्यादा अहम कश्मीर में चुनाव है। मोदी के एक करीबी के मुताबिक, 2002 और 2008 में कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव हुए थे।

चुनावों की सफलता का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह को भी दिया गया था। मोदी के लिए कतई मु‌फीद नहीं होता के उनके प्रधानमंत्री रहते कश्मीर में शांतिपूर्ण चुनाव न हों।

वहीं, भाजपा कश्मीर में अपने मिशन 44+ के ज‌रिए बहुमत का ख्वाब भी देख रही है। पाकिस्तान के साथ बातचीत बंद कर मोदी पाकिस्तान विरोधी वोटों को भी अपने पक्ष में करने में कामयाब हो सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed