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मंगोलिया में तोहफे में मिला घोड़ा क्यों छोड़ आए मोदी ?

Thu, 28 May 2015 01:00 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 28 May 2015 01:00 PM IST
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why modi letup gift alight in mangolia

प्रधानमंत्री मोदी जब अपनी मंगोलिया की यात्रा पर थे तो उन्हें मंगोलिया के प्रधानमंत्री ने तोहफे में घोड़ा दिया था। लेकिन शायद उन्हें शायद ये नहीं पता था कि मोदी इसे भारत लेकर नहीं जा सकते।

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मोदी को जब ये घोड़ा गिफ्ट में मिला तो उन्होंने मंगोलियन घोड़े के साथ अपनी फोटो ट्वीट की, जिसका नाम 'कंथका' था, लेकिन मोदी उसे अपने साथ भारत न लाकर उसे वहीं भारतीय दूतावास की सुरक्षा में छोड़ आए।
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दरअसल, भारत में किसी भी राजनयिक को किसी भी प्रकार का जीव जंतु तोहफे में देने का प्रावधान नहीं है, जिस वजह से मोदी को उसे मंगोलिया के भारतीय दूतावास में ही छोड़ना पड़ा।
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क्यों हैं प्रतिबंधित?

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भारत में पर्यावरण मंत्रालय ने सन् 2005 में ही इस प्रकार के किसी भी तोहफे के आदान प्रदान पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध के अंतर्गत विदेशी धरती से भी इस तरह के तोहफे के हस्तांतरण से पशुओं को उपहार देना भारत में प्रतिबंधित है। यह चिड़ियाघर के जानवरों के आदान प्रदान के लिए भी है।

इससे पहले भारत में इस तरह तोहफा आखिरी बार राजग सरकार (1999-2004) के दौरान भारत में लाया गया था जब तत्कालीन विदेश मामलों के मंत्री जसवन्त सिंह को सऊदी के राजा ने बछड़ा और बछड़ी तोहफे में दिया था।

इससे पहले भी कई भारतीय नेताओं को विदेश से तोहफों में जानवर मिल चुके हैं जिसे उन्होंने भारत में लाया भी है। नेताओं की इस लिस्ट में राजीव गांधी, इंदिरा गांधी, जार्ज फर्नांडिस, सहित कई अन्य नेता भी शामिल हैं।

जानवरों को नहीं मिल पाता अनुकूल पर्यावरण

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कुछ ऐसे मामले भी सामने आएं हैं जिनमें जो तोहफे नेताओं को दिए गए थे, वो चिड़ियाघरों में भी मौजूद थे। तात्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन को उनके जिम्वॉव्बे की यात्रा के दौरान अफ्रीकी हाथी तोहफे में मिला था।

जिम्वॉव्बे ने दो हाथी तोहफे में दिए थे जिनमें से एक कुछ समय बाद मर गया। पर्यावरण मंत्रालय ने इस तरह के तोहफों के आदान प्रदान पर इसलिए भी रोक लगाई क्योंकि जो जीव जंतु दूसरे देश से आते थे, उन्हें उस तरह का पर्यावरण मिल पाना यहां मुश्किल होता है।

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