काशी को चुनकर मोदी ने साधे कई निशाने
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार मोदी ने अपने गृहराज्य गुजरात की वडोदरा सीट छोड़ दी और काशी के बन गए। वोटरों ने उन्हें एकतरफा जीत दिलाई थी इसलिए उन्होंने भी वाराणसी संसदीय सीट को प्रधानमंत्री का क्षेत्र होने का गौरव दिलाया।
इस मामले में जारी संशय दूर होने पर गुरुवार को ढोल-नगाड़े की धुन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुशियों का इजहार किया और दुगने उत्साह से सड़कों पर मिठाई बांटने निकल पड़े। जानकार मोदी के इस कदम को हिंदुत्व की सूक्ष्म धारा और उत्तर प्रदेश, बिहार में भाजपा की जड़ों को मजबूत बनाने का कदम मान रहे हैं।
‘मैं न आया हूं, न किसी ने मुझे भेजा है, मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है।’ नरेंद्र मोदी ने अपने नामांकन के दिन यह कहकर जाहिर कर दिया था कि वह भले ही विकास के नाम पर चुनाव लड़ रहे हों लेकिन भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों को छोड़ने वाले नहीं हैं।
काशी को है मोदी से बड़ी उम्मीद
सांसद बनने के बाद वह बनारस आए तो गंगा तट पर पहुंचे, प्रधानमंत्री बनने के बाद गंगा के नाम से मंत्रालय बनाया और उसकी जिम्मेदारी उमा भारती को सौंपी।
अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वर पुरी का कहना है कि काशी को मोदी ने नया घर बनाया तो लोगों ने हर-हर महादेव के घोष से उनका स्वागत किया। वह यहां विकास करेंगे और काशी नए रूप में दुनिया के सामने होगी।
लोगों की भावनाएं कुछ भी हों लेकिन राजनीति के जानकार मोदी के इस कदम को एक तीर से कई निशाना साधने वाला मानते हैं।
हिंदुत्व के प्रतीकों का केंद्र काशी
साम्यवादी विचारक प्रो. दीपक मलिक का कहना है कि भले ही भाजपा ने चुनाव विकास के नाम पर लड़ा हो लेकिन इस दौरान भी वह सूक्ष्म हिंदुत्व की धारा को लेकर चल रही थी। काशी इस तरह के प्रतीकों का केंद्र है।
वाराणसी में मोदी की मौजूदगी से भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सफलता की कहानी गढ़ी है तो अब मोदी की टीम गुजरात से माइग्रेट करके बनारस आ रही है। अमित शाह को उत्तर प्रदेश का नेता बनाने की कवायद चल रही है।
यूपी-बिहार के चुनाव पर मोदी की नजर
कांग्रेस के प्रदेश महासचिव और काशी विद्यापीठ में राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक प्रो. सतीश राय का कहना है कि कोई भी नेता जब दो स्थानों से चुनाव जीतता है तो वह अपने गृह क्षेत्र की ही सीट छोड़ता है।
इसकी परंपरा पुरानी है लेकिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीतिशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर मिश्र का कहना है कि बनारस में मोदी की उपस्थिति के चलते भाजपा और अपना दल को यूपी की 80 में से 73 सीटों पर सफलता मिली। बिहार में भी इसका प्रभाव दिखा। राम जन्मभूमि आंदोलन के बाद पहली बार पार्टी को इस क्षेत्र में अपनी जमीन वापस मिली है। अगले साल बिहार में विधानसभा का चुनाव है और उसके दो साल बाद यूपी में। ऐसे में मोदी काशी को विकसित करके अपने सांस्कृतिक प्रतिबद्धता दुनिया भर में स्थापित करेंगे।
बीएचयू के ही प्रो. आलोक राय मानते हैं कि इससे भाजपा को तो फायदा होगा ही, जनता को भी लाभ मिलेगा। पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते विकास की बड़ी योजनाओं को लागू करने में अड़चन नहीं आएगी। जाहिर है कि इसका लाभ पार्टी को मिलेगा।