नरेंद्र मोदी पर अचानक क्यों टूटा मायावती का कहर?
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चुनावी मौसम में नेता इंटरव्यू देने या मीडिया से बातचीत करने को लेकर कितने उत्साहित रहते हैं, इससे हम सभी वाकिफ हैं। लेकिन उत्तर प्रदेश की एक नेता कुछ अलग है। उनके अंदाज अलग हैं और राजनीति करने का तरीका भी।
आम तौर पर मीडिया से बातचीत और संवाददाता सम्मेलन को लेकर परहेज दिखाने वालीं बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने सोमवार को आनन-फानन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और नरेंद्र मोदी को खूब कोसा।
मायावती ने कहा कि भाजपा के पीएम पद के दावेदार सिवाय झूठ बोलने के और कुछ नहीं जानते। वो दलितों और पिछड़ों को बरगला रहे हैं, लेकिन जनता को उनके धोखे में नहीं आना चाहिए।
'भाजपा नहीं करती अंबेडकर का सम्मान'
भीमराव अंबेडकर की विरासत संभालने का दावा करने वाली बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती का कहना है कि भाजपा नाटक कर रही है और वो उन्हें कोई सम्मान नहीं देना चाहती।
उन्होंने कहा, "भाजपा अंबेडकर का कोई सम्मान नहीं करती। उसने मंडल आयोग की सिफारिशें भी लागू नहीं की थी। इसके बाद उन्होंने वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया।" उन्होंने मोदी की तरफ से पत्नी के नाम के खुलासे पर भी हमला किया।
मायावती ने कहा, "अब तक नरेंद्र मोदी ने इस बारे में कुछ नहीं कहा था। भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि मोदी का घर-परिवार नहीं है और वो खुद को देश की सेवा में न्योछावर करने को तैयार हैं। लेकिन हाल में मोदी ने अपनी औरत का खुलासा किया। इसी तरह वो देश को धोखा दे रहे हैं।"
दलित वोट बैंक पर तेज हुई लड़ाई
मायावती इससे भी पहले भी नरेंद्र मोदी पर हमला बोल चुकी है। उन्होंने पहला कहा था कि वो साम्प्रदायिक ताकतों को रोकने की हरसंभव कोशिश करेंगी और बसपा मोदी को भी रोकेगी।
लेकिन एक सवाल लाजिमी है कि इतने दिन बाद मायावती को अचानक भाजपा और नरेंद्र मोदी पर हमला बोलने की जरूरत क्यों पड़ी, वो भी तब जब खुद मोदी मायावती पर सीधा हमला करने से बच रहे हैं।
जाहिर है, चुनावी मौसम में हर हमले के पीछे की वजह सियासी है। इस मामले में भी ऐसा ही है। दरअसल, मायावती को नरेंद्र मोदी पर बार-बार हमला करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसका सबसे बड़ा कारण है दलित और पिछड़ा वोट बैंक।
भाजपा ने मारी वोट पर चोट?
दरअसल, नरेंद्र मोदी ने पहले चाय वाले और फिर पिछड़े तबके के परिवार से आने का ऐसा शिगूफा छोड़ा कि भाजपा को यह उम्मीद बंधने लगी कि वो उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक में सेंध लगा सकती है।
कुर्मी वोटबैंक पर निगाह रखते हुए पहले अपना दल की अनुप्रिया पटेल और फिर दलित नेता उदितराज को अपने पाले में कर भाजपा ने इन्हीं वोट तक पहुंचने की कोशिश की। जाहिर है, मायावती इससे कुछ चिंतित जरूर रही होंगी।
लेकिन हालिया हमले की वजह मोदी का अंबेडकर प्रेम था। दरअसल, अंबेडकर जयंती के मौके पर मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और दलितों पर डोरे डालते हुए कहा कि राहुल गांधी संविधान देने वाले बाबा साहेब अंबेडकर का अपमान कर रहे हैं।
अंबेडकर के नाम पर राहुल को कोसा
नरेंद्र मोदी ने कहा, "अगर अंबेडकर न होते, तो मेरे जैसा कोई शख्स इस तरह आपके सामने खड़ा न होता।" उन्होंने भगवान बुद्ध पर अंबेडकर की लिखी किताब की सौ प्रतियां खरीदने से मना करने पर जवाहरलाल नेहरू पर भी हमला बोला।
उन्होंने कहा कि गांधी परिवार के तीन सदस्यों के निधन के तुरंत बाद भारत रत्न दे दिया गया, जबकि अंबेडकर को अब तक यह सम्मान नहीं दिया गया। मोदी ने कहा, "जब एनडीए की सरकार सत्ता में आई, तब जाकर अंबेडकर का चित्र संसद में लगाया गया।"
जाहिर है, चुनावी मौसम में मोदी का दलित और अंबेडकर प्रेम वोट खींचने की कोशिश है। वो हाल तक विकास के एजेंडे की बात कर रहे थे, लेकिन अंबेडकर जयंती के मौके पर चौका मारना नहीं भूले। जाहिर है, मायावती को जवाबी हमला करना पड़ा।
जाति का खुलासा करे मोदीः मायावती
मायावती ने नरेंद्र मोदी से अपनी जाति का खुलासा करने को कहा। उन्होंने कहा, "भाजपा के प्रधानमंत्री पद के दावेदार दलितों और पिछड़ी जातियों को भ्रमित कर रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि अब तक उन्होंने अपनी जाति का खुलासा नहीं किया है। वो खुद को पिछड़ा बताते हैं, लेकिन जाति नहीं बताते।"
भाजपा इन दिनों मोदी लहर का दावा कर रही है और हालिया चुनावी पोल में उत्तर प्रदेश में भगवा दल को भारी फायदा होने की उम्मीद जताई गई है। उसे कुल 80 सीटों में से 51 सीटें मिलने की संभावना है।
दूसरी ओर, साल 2009 के चुनावों में 20 लोकसभा सीटों तक पहुंचने वाली बहुजन समाज पार्टी को इस बार नुकसान होने की आशंका है। पोल के मुताबिक मायावती के खाते में इस बार 10 सीट आ सकती हैं।
मुस्लिम वोट के बाद अब दलितों पर नजर
दरअसल, भाजपा नेता अमित शाह और सपा नेता आजम खां के बयानों से उठी ध्रुवीकरण की हवा के चलते हिंदू-मुस्लिम वोट बंटने की संभावना जताई जा रही है। लेकिन पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़ा वर्ग काफी ताकत रखते हैं।
और इस इलाके में अभी मतदान होना बाकी है। ऐसे में भाजपा और मोदी इस बात की कोशिश कर रहे हैं कि चाय वाले और पिछड़ा वर्ग वाला कार्ड खेलकर इस वोटबैंक में कुछ सेंध लगाई जाए। अगर ऐसा हुआ, तो नुकसान मायावती को होगा, जिसके लिए यह आधार वोट की तरह है।
ऐसे में बसपा की बॉस को आक्रामक होना पड़ा। और आने वाले कुछ दिनों में हमलों में और तेजी आएगी, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। दलित वोट बैंक पर अब तक बसपा का कब्जा था और भाजपा को दूर करने के लिए उसे हमलावर होना पड़ रहा है।