अंबानी का 'अकाउंट नंबर' देकर खुद फंसे केजरीवाल!
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ऐसा लगता है कि मुकेश अंबानी पर हमला करना आगामी लोकसभा चुनावों के लिए अब अरविंद केजरीवाल की मुख्य रणनीति का हिस्सा बन चुका है। कानपुर में हुई आम आदमी पार्टी की रैली में भी कुछ यही हाल रहा।
झाड़ू चलाओ, बेईमान भगाओ रैली को संबोधित करते हुए दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बार फिर नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी पर मुकेश अंबानी के हाथों में खेलते हैं।
गैस के दामों से जुड़ा मुद्दा एक बार फिर उठाते हुए केजरीवाल ने मोदी और राहुल की चुप्पी पर सवाल उठाया। और एक बार फिर कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके मालिक का स्विस बैंक में खाता है। उन्होंने रैली में दो तथाकथित अकाउंट नंबर भी बताए। लेकिन इन नंबरों को लेकर खुद केजरीवाल अब फंसते दिख रहे हैं।
मैंने नोट कर लिए थे नंबरः केजरी
अरविंद केजरीवाल ने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि मोदी बहुत अच्छे हैं और देश को बचाएंगे। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आप अंबानी को 4 डॉलर में गैस बेचेंगे या 8 डॉलर में? मैंने पत्र लिखा, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसकी वजह यह है कि वह अंबानी के हेलिकॉप्टर में सफर करते हैं।"
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने एक बार फिर दो नंबर बताए और कहा कि यह अंबानी के स्विस बैंक के खातों के नंबर हैं। उन्होंने मोदी को चेतावनी दी कि वह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो काला धन वापस लेकर दिखाएं।
उन्होंने कहा, "उनका कहना है कि वे काला धन वापस लेकर आएंगे। मैं जब रेवेन्यू कमिश्नर था, तो मेरे पास एक फाइल आई, जिसमें अंबानी का नंबर था। मैंने नोट कर लिया। मैं आपको अंबानी भाइयों के स्विस बैंक के खाते नंबर दे रहा हूं। यह नंबर हैं 5090160983 और 5090160984।"
गोपनीयता कानून का उल्लंघन?
लेकिन सवाल यहीं से खड़ा होता है। पहला सवाल यह कि जब केजरीवाल सरकारी अफसर थे, तो जाहिर है गोपनीयता का नियम उन पर भी लागू होता होगा। केजरीवाल और दूसरे ऐसे सरकारी अफसरों से उम्मीद की जाती है कि वह गोपनीय चीजों को जाहिर न करें।
हालांकि, अरविंद केजरीवाल शायद इस कानून या नियम को नहीं मानते। ऐसा इसलिए, क्योंकि अंबानी के तथाकथित अकाउंट नंबर उन्होंने पहली बार नहीं बताए। इससे पहले भी वो एक संवाददाता सम्मेलन यही नंबर मीडिया के सामने रख चुके हैं।
लेकिन कानपुर में उन्होंने ये दोनों नंबर रैली में सभी के सामने रखे। अगर यह वास्तव में मुकेश और अनिल अंबानी के नंबर हैं, तो क्या केजरीवाल ने इस तरीके से इन नंबरों को सामने रखकर सरकारी गोपनीयता कानून का उल्लंघन नहीं किया है?
खुलासा अब क्यों किया?
दूसरा सवाल यह उठता है कि अरविंद केजरीवाल ने इन नंबरों का खुलासा अब क्यों किया? जाहिर है, उन्होंने खुद माना है कि जब वह रेवेन्यू डिपार्टमेंट में थे, तब उनके हाथ फाइल लगी थी, जिसमें से यह तथाकथित नंबर उन्हें मिले।
जाहिर है, उन्हें यह सरकारी नौकरी छोड़े कई साल गुजर चुके हैं। लेकिन अन्ना आंदोलन से लेकर दिल्ली के विधानसभा चुनावों तक, उन्होंने आज तक इन अकाउंट नंबरों का जिक्र कभी नहीं किया।
लेकिन जैसे ही लोकसभा चुनाव सिर पर आए और कांग्रेस का खेल बिगड़ता दिखा, तो शायद आम आदमी पार्टी को समझ आ गया है कि अब हमला मोदी पर बोलना होगा। और इस हमले में सबसे असरदार उन्हें अंबानी और उनका 'स्विस खाता नंबर' लगने लगा है।
प्रशासन को क्यों नहीं सौंपे नंबर?
तीसरा सवाल यह है कि अरविंद केजरीवाल को अगर यह नंबर मिले थे और वाकई इनका ताल्लुक अंबानी भाइयों से है, तो ये उन्होंने प्रशासन को क्यों नहीं सौंपे।
अगर वो चाहते थे कि वाकई अंबानी भाइयों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई हो, तो उन्होंने संबंधित विभाग को ये नंबर क्यों नहीं सौंपे। जनता के बीच ये नंबर उछालने से केजरीवाल को क्या मिलेगा? शायद सियासी फायदा।
इस बीच रिलायंस ने साफ कर दिया है कि ये नंबर अंबानी भाइयों के नहीं हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज का कहना है कि दुनिया के कई मुल्कों में उनके बैंक खाते हैं, लेकिन सभी तय कानूनी प्रक्रिया से संचालित होते हैं। और उनका स्विस बैंक में कोई खाता नहीं है।