मायावती के हाथी की क्यों है धीमी चाल?
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लोकसभा चुनाव के फाइनल में हर सियासी दल ने बाजी मारने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मगर कहीं न कहीं बसपा का हाथी प्रचार अभियान की इस पूरी दौड़ में उत्तरप्रदेश में धीमी गति से चलता दिख रहा है। उत्तर प्रदेश में बसपा सुप्रीमो मायावती का चुनाव प्रचार अभियान बेहद देर से भी शुरू हुआ है।
पश्चिमी उत्तरप्रदेश की कई सीटों में मतदान दस अप्रैल को होना है। मतदान सिर पर आ गया है। मगर अपने तूफानी और आक्रामक चुनाव प्रचार अभियान के लिए मशहूर मायावती ने बृहस्पतिवार यानी सिर्फ एक हफ्ते पहले ही चुनाव प्रचार बिजनौर से शुरू किया है। वह तीन से सात अप्रैल तक चुनाव प्रचार करेंगी। जबकि आठ अप्रैल को उनका कोई चुनाव प्रचार कार्यक्रम अब तक नहीं बताया गया है।
दस अप्रैल को मतदान होने के चलते चुनाव आयोग के दिशा निर्देश के मुताबिक वह आठ अप्रैल को पांच बजे तक चुनाव प्रचार कर सकती हैं। मगर आठ अप्रैल का अभी तक उनका कोई चुनाव प्रचार नहीं है। जबकि इससे पहले भी मुजफ्फरनगर में दंगों के बाद मायावती पर उस इलाके का दौरा नहीं करने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
मायावती ने नहीं किया तेजी से प्रचार?
मतदान के तीसरे चरण में होने वाली पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सीटों पर ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार के बजाय देशभर में मायावती ने लगभग एक महीने में 12 रैली की है। इनमें महाराष्ट्र, जम्मू कश्मीर, हरियाणा, झारखंड, मध्यप्रदेश आदि राज्य शामिल हैं। अभी यूपी से बाहर 11 और रैलियां होनी है।
पार्टी के केंद्रीय कार्यालय से मिली सूचना के मुताबिक बसपा सुप्रीमो का पांच अप्रैल को गाजियाबाद, छह को मेरठ और बागपत, सात को कैराना और दिल्ली का चुनाव प्रचार का कार्यक्रम है। उत्तर प्रदेश में मायावती के चुनाव प्रचार कम करने के सवाल को हालांकि पार्टी के नेता खारिज करते हैं।
'ढोल पीट कर नहीं करते हैं काम'
बसपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं कि बहनजी लगभग 60 रैलियों में शिरकत करेंगी। उत्तर प्रदेश के बजाय देशभर में ज्यादा ध्यान देने के सवाल पर मौर्य कहते हैं कि पार्टी दूसरे प्रदेशों में भी खुद को मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
दूसरी पार्टियों के मुकाबले उत्तर प्रदेश में देर से शुरू हुए चुनाव अभियान के सवाल पर मौर्य कहते है कि दूसरी पार्टियों की अलग कार्यशैली है। हमारा काम करने का अलग तरीका है। हम ढोल पीट कर काम नहीं करते। बल्कि शांति से जमीन पर अपना प्रचार करते हैं। वहीं लालगंज से बसपा सांसद डॉ बलि राम कहते हैं कि मायावती का चुनाव प्रचार पहले चरण के बाद रफ्तार पकड़ेगा।
अभी वह देशभर में चुनाव प्रचार कर रही है। वह 80 से ज्यादा रैलियां करेंगी। पार्टी के अंदर कुछ नेता यह भी कहते है कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जिस तरह से मायावती वहां गई नहीं। वैसे ही उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रचार कम किया।