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कमिश्नर ने लगाई डांट तो बेहोश हुईं एडिश्नल कमिश्नर, पढ़िए पूरा मामला

Tue, 25 Aug 2015 09:05 AM IST
Updated Tue, 25 Aug 2015 09:05 AM IST
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why in uttar pradesh additional commissioner of allahabad has gone in unconscious condition?

सरकारी काम में लापरवाही के मसले पर कमिश्नर राजेश शुक्ला ने सोमवार को अपर आयुक्त (प्रशासन) से सख्त लहजे में पूछताछ की तो अपर आयुक्त बेहोश होकर वहीं गिर पड़ीं। कमिश्नर सहित तमाम अफसरों ने उन्हें बेली अस्पताल में भर्ती कराया।

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होश में आने के बाद अपर आयुक्त ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कमिश्नर राजन शुक्ला उनका उत्पीड़न कर रहे हैं और दबाव बनाते हैं कि वह कमिश्नर के कार्यालय में बैठें। हालांकि कमिश्नर ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उधर, शाम पांच बजे कनक त्रिपाठी को अस्पताल से रिलीव कर दिया गया।
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कमिश्नरी में चर्चा है कि अपर आयुक्त कनक त्रिपाठी छह अगस्त को हुई मंडलीय बैठक के बाद से ही कमिश्नर से नाराज हैं। दरअसल, उस बैठक में अपर आयुक्त अनुपस्थित थीं। इस पर कमिश्नर ने उनसे स्पष्टीकरण तलब कर लिया। सोमवार सुबह साढ़े दस बजे दोनों अफसरों का फिर आमना-सामना हो गया। कमिश्नरी से हर पंद्रह दिन में शासन को राजस्व संबंधी एक रिपोर्ट भेजी जाती है, जिसमें तालाब, ग्राम सभा की जमीन पर अतिक्रमण हटाए जाने संबंधी कार्रवाई का ब्यौरा होता है।
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फाइल पर उप सूचना निदेशक, अपर आयुक्त (प्रशासन), कमिश्नरी के प्रशासनिक अधिकारी, डीआईजी के हस्ताक्षर होते हैं। सबसे अंत में कमिश्नर हस्ताक्षर करते हैं और फिर रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। बताते हैं कि सोमवार को कमिश्नर के पास फाइल भेजी गई लेकिन उसमें डीआईजी के हस्ताक्षर नहीं थे। इस पर कमिश्नर ने अपर आयुक्त कनक त्रिपाठी को अपने कार्यालय में बुलाकर सख्त लहजे में पूछताछ की तो अपर आयुक्त ने भी पलटकर जवाब दे दिया कि यह जिम्मेदारी कर्मचारियों की है। इस पर कमिश्नर की आवाज भी तेज हो गई और अपर आयुक्त गश खाकर गिर पड़ीं।
 
मौके पर अपर आयुक्त डीपी गिरि और अपर आयुक्त उदयभानु त्रिपाठी भी मौजूद थे। कमिश्नर सहित दोनों अफसर उन्हें बेली अस्पताल लेकर पहुंचे। कमिश्नर डेढ़ घंटे बाद कमिश्नरी लौट आए। उसके बाद अपर आयुक्त को होश आया तो प्रेस प्रतिनिधियों को दिए अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि कमिश्नर लगातार उन्हें प्रताड़ित कर रहे हैं। हर काम में गलती ढूंढ़ते हैं और अपने दफ्तर में बैठने का दबाव बनाते हैं। वहीं, कमिश्नर ने इन आरोपों को लेकर उन्होंने हैरानी जताई और खंडन किया।

कहा कि उन्हें याद भी नहीं कि इससे पहले कभी उन्होंने अपर आयुक्त से सख्त लहजे में बात की हो। यह जरूर है कि छह अगस्त को हुई मंडलीय बैठक में अनुपस्थित रहने पर उन्होंने अपर आयुक्त से स्पष्टीकरण तलब किया था। रही बात काम की तो लापरवाही बरतने पर पूछताछ हर हाल में होगी और अफसरों को समय से काम भी करना होगा।

अपर आयुक्त का बढ़ गया था ब्लड प्रेशर

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अपर आयुक्त जब अस्पताल में भर्ती कराई गईं, उस वक्त उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ था। बेली अस्पताल के सीएमएस डीके सिंह ने बताया कि कनक त्रिपाठी का सीटी स्कैन एवं अन्य जांचें कराई गई हैं। मंगलवार को भी कुछ जांचें होंगी।

जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मालूम होगा कि उन्हें क्या दिक्कत है। फिलहाल अभी स्थिति सामान्य है और शाम पांच बजे उन्हें अस्पताल से रिलीव कर दिया गया। अपर आयुक्त को देखने एसआरएन अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. केके द्विवेदी भी बेली अस्पताल पहुंचे।

कमिश्नर राजन शुक्ला की इलाहाबाद में नियुक्ति के बाद से ही अफसरों पर काम समय से निपटाने का दबाव बढ़ गया है। कमिश्नर अपने कैंप कार्यालय के बजाय मुख्य दफ्तर में सुबह दस से शाम पांच बजे तक लगातार बैठते हैं। उन्होंने इस बंदिश को भी हटा दिया है कि जनता से सिर्फ दस से 12 बजे तक मिलेंगे। कार्यालय खुले रहने के दौरान लोग किसी भी वक्त मुख्य कार्यालय में उनसे मिल सकते हैं। कमिश्नर ने यह फरमान भी जारी किया है कि फील्ड वर्क नहीं है तो कमिश्नरी के सभी अफसर सुबह दस से शाम पांच बजे अपने-अपने कार्यालय में बैठेंगे और फाइलों को निर्धारित समय में निस्तारित करेंगे।

अपर आयुक्त कनक त्रिपाठी को न्यायिक कार्य सहित अन्य 24 कार्यों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। वहीं, अपर आयुक्त शेषमणि पांडेय न्यायिक कार्य के साथ 33 तरह के कार्यों और अपर आयुक्त डीपी गिरि 18 कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। काम के अतिरिक्त बोझ से अफसर परेशान हैं। कमिश्नर का कहना है कि इलाहाबाद में अपनी नियुक्ति के बाद उन्होंने किसी अपर आयुक्त को कोई नई जिम्मेदारी नहीं दी। कार्य विभाजन पूर्व कमिश्नर ने किया था और वही लागू है।

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