फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   why gandhi is not dead yet

जब चिढ़ गए चर्चिल, बोले- 'गांधी अब तक मरे क्यों नहीं हैं?'

Fri, 02 Oct 2015 03:06 PM IST
Updated Fri, 02 Oct 2015 03:06 PM IST
विज्ञापन
why gandhi is not dead yet

सितंबर, 1931 को एक ठंडे, नम दिन खादी की धोती पहने और गोल फ्रेम का चश्मा लगाए एक नाटा शख्स फॉकेस्टोन बंदरगाह पर उतरा। वहां पर कई प्रेस रिपोर्टर, सांसद और खुद कैंटरबरी के डीन उनके स्वागत में खड़े थे। अगले ढ़ाई महीनों तक उनका गंजा सिर, नंगे पैर और ब्रितानी प्रेस के शब्दों में ‘उनका लॉएनक्लॉथ और शॉल’ लंदन की सड़कों का आमफहम दृश्य बना रहा।

विज्ञापन


अब तक गांधी विश्व स्तर की शख्सियत बन चुके थे। नमक सत्याग्रह और असहयोग आंदोलन के अंतरराष्ट्रीय प्रेस कवरेज ने उन्हें पूरी दुनिया में मशहूर बना दिया था। जब वो यूस्टन रोड पर अपने दोस्त के घर रहने पहुंचे तो बारिश के बावजूद सैकड़ों लोग उनकी एक झलक पाने के लिए वहां मौजूद थे।
विज्ञापन


वैसे तो गांधी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने लंदन आए थे, लेकिन उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल ब्रिटेन के आम लोगों से नजदीकी के लिए किया।

वो लंकाशायर की उन कपड़ा मिल मजदूरों से मिलने गए, जिनके बारे में विंस्टन चर्चिल ने कहा था कि अगर गांधी का बस चला तो जल्द ही उनको काम मिलने के लाले पड़ जाएंगे। लेकिन इसके बावजूद उन मजदूरों ने बहुत गर्मजोशी से गांधी का स्वागत किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


'टाइम' पत्रिका ने इस यात्रा पर हल्की-फुल्की टिप्पणी करते हुए लिखा था, "महात्मा की इंग्लैंड यात्रा का एक ही ठोस परिणाम निकला है कि लंदन में बकरियों और उनके दूध के दाम बढ़ गए हैं।"

गांधी मशहूर अभिनेता चार्ली चैपलिन से भी मिले और इंग्लैंड के राजा ने भी उन्हें बकिंघम पैलेस में चाय पर बुलाया था। मशहूर इतिहासकार आर्थर हर्मन अपनी किताब 'गांधी एंड चर्चिल, द एपिक राइवेलरी' में लिखते हैं, "ये मुलाकात नए सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ऑफ इंडिया सर सैमुएल होर के सौजन्य से हुई थी।"

गांधी अपनी जिद पर अड़े

why gandhi is not dead yet

पहले तो राजा ने इस ‘विद्रोही फकीर’ से मिलने से इनकार कर दिया था। गांधी भी इस बात पर अड़ गए थे कि वो राजा से मिलने धोती और अपनी खादी की शॉल में ही जाएंगे।"

"बाद में होर के जोर देने पर ये बैठक हुई, लेकिन उन्होंने राजा को बुदबुदाते सुना कि ये ‘नाटा आदमी’ ‘पर्याप्त कपड़े’ भी नहीं पहने हुए था। चलते-चलते राजा गांधी से अपने आप को कहने से नहीं रोक पाए, ‘याद रखिए मिस्टर गांधी, मैं आपकी तरफ से अपने साम्राज्य पर किए गए किसी वार को बर्दाश्त नहीं करूंगा।’

गांधी ने मुस्कराकर जवाब दिया था, "मैं आपके महल में, आपकी मेहमाननवाजी के बाद, आपसे किसी राजनीतिक बहस में नहीं उलझना चाहूंग।"
बाद में जब गांधी से पूछा गया कि क्या आप समझते हैं कि शाही मुलाकात के लिए आपका परिधान उपयुक्त था, उन्होंने छूटते ही जवाब दिया था, "राजा ने हम दोनों के हिस्से के कपड़े पहन रखे थे।"

लॉर्ड इरविन भी प्रभावित

why gandhi is not dead yet

रॉबर्ट पेन अपनी किताब 'लाइफ एंड डेथ ऑफ महात्मा गांधी' में लिखते हैं, "इससे पहले भारत में ब्रिटेन के पूर्व वॉयसराय लॉर्ड इरविन जॉर्ज पंचम को बता चुके थे कि जब गांधी उनसे मिलने वॉयसराय हाउस आए थे, तब भी वो भवन के चमचमाते संगमरमरी हॉल में अटपटे से दिखाई दे रहे थे।"
"लेकिन तब भी आप उनकी छोटी लेकिन तेज आंखों के पीछे की नैतिक शक्ति को महसूस कर सकते थे। उनका दिमाग तब भी बहुत अधिक स्फूर्तिवान था।"

'राजद्रोही' गांधी

लेकिन उस समय ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के उभरते नेता विंस्टन चर्चिल को गांधी-इरविन की वो मुलाकात बहुत नागवार गुजरी थी। उन्होंने कहा था, "मिस्टर गांधी जैसे राजद्रोही, मिडिल टैंपिल वकील का अर्ध नग्न हालत में वॉयसराय के महल की सीढ़ियां चढ़ना और राजा के प्रतिनिधि से बराबर के स्तर पर बात करना बहुत खतरनाक और घृणास्पद था, खासकर तब जब वो ब्रिटिश सरकार के खिलाफ असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे। इस तरह का दृश्य भारत में अशांति को बढ़ा सकता है और वहां पर काम कर रहे श्वेत लोगों को परेशानी में डाल सकता है।"

जब गांधी को गोलमेज सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया गया तब भी चर्चिल ने उसका जोरदार विरोध करते हुए कहा, "गांधी ने अपना आन्दोलन वापस नहीं लिया है, उसे स्थगित भर किया है। इसको दोबारा शुरू करने के लिए उन्हें अपनी छोटी उंगली भर उठाने की देर है।"

पानी के साथ ग्लूकोज

why gandhi is not dead yet

1942 में जब ये पता चला कि गांधी अनशन पर जाने वाले हैं तो चर्चिल की वार कैबिनेट ने तय किया कि गांधी को मरने दिया जाएगा। लेकिन लिनलिथगो को शक था कि इस मसले पर वॉयसराय काउंसिल के कुछ भारतीय सदस्य शायद इस्तीफा दे सकते हैं।

जब चर्चिल को ये पता चला तो उन्होंने वायसराय को लिखा, "अगर कुछ काले लोग इस्तीफा दे भी दें तो इससे फर्क क्या पड़ता है। हम दुनिया को बता सकते हैं कि हम राज कर रहे हैं। अगर गांधी वास्तव में मर जाते हैं तो हमें एक बुरे आदमी और साम्राज्य के दुश्मन से छुटकारा मिल जाएगा। ऐसे समय जब सारी दुनिया में हमारी तूती बोल रही हो, एक छोटे बूढ़े आदमी के सामने जो हमेशा हमारा दुश्मन रहा हो, झुकना बुद्धिमानी नहीं है।"

जब गांधी का अनशन कुछ लंबा खिंच गया तो चर्चिल ने वॉयसराय लिनलिथगो को पत्र लिखा, "मैंने सुना है कि गांधी अपने अनशन के ड्रामे के दौरान पानी के साथ ग्लूकोज ले रहे हैं। क्या इस बात की जांच कराई जा सकती है? अगर इस जालसाजी का भंडा फूटता है तो ये हमारे लिए बेशकीमती होगा।"

मार्टिन गिलबर्ट अपनी किताब 'रोड टू विक्ट्री' में लिखते हैं कि लिनलिथगो ने बाकायदा इसकी जांच करवाई और चर्चिल के आरोप गलत पाए गए।

अब तक मरे क्यों नहीं?

why gandhi is not dead yet

गांधी के अनशन से चर्चिल इतने चिढ़ गए कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के प्रधानमंत्री जनरल स्मट्स को पत्र लिखा, "मैं नहीं समझता कि गांधी के मरने की कोई इच्छा है। मेरा मानना है कि वो मुझसे बेहतर खाना खा रहे हैं।"

जब बंगाल के सूखे के दौरान लार्ड वेवल ने भारत को तुरंत अनाज भेजे जाने की मांग की तो चर्चिल इतने नाराज हुए कि उन्होंने वेवल को एक तार भेजा कि "गांधी अब तक मरे क्यों नहीं हैं?"

जब गांधी ने भारत की आज़ादी के आश्वासन के बदले ब्रिटेन के युद्ध प्रयासों में मदद की पेशकश की तो चर्चिल ने कहा, "वॉयसराय को इस देशद्रोही से बात नहीं करनी चाहिए और उसे दोबारा जेल में डाल देना चाहिए।"

सालों बाद चर्चिल ने स्वीकार किया कि उनके चुनाव हारने से सिर्फ एक अच्छी बात ये हुई कि भारत को आजादी देने का फैसला जब हुआ तब वो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री नहीं थे।

पांच साल पहले जिस शख्स ने सार्वजनिक रूप से ये ऐलान किया था कि हम अनिश्चित काल तक भारत पर राज करते रहेंगे, ये फैसला लेना सबसे बड़ा अपमान होता।

गांधी का चर्चिल को पत्र

why gandhi is not dead yet

17 जुलाई, 1944 को गांधी ने चर्चिल को एक पत्र में लिखा था, "मैंने सुना है कि आप एक साधारण ‘नंगे फकीर’ को कुचल देना चाहते हैं। मैं बहुत लंबे समय से फकीर होने की कोशिश कर रहा हूं। नंगा होना और भी मुश्किल काम है। आपने मेरे लिए जिस शब्द का इस्तेमाल किया है, उसको मैं अपनी तारीफ के तौर पर लेता हूं, हालांकि ऐसा करने का शायद आपका इरादा नहीं था। मेरी दिली इच्छा है कि आप मुझ पर भरोसा रखें और अपने और हमारे लोगों के लिए मेरा इस्तेमाल करें।"

चर्चिल के करीब जाने की ये गांधी की आखिरी कोशिश थी। लेकिन चर्चिल को ये पत्र नहीं मिला। दो महीने तक अपने पत्र के जवाब का इंतजार करने के बाद गांधी ने वॉयसराय के निजी सचिव से संपर्क किया। उन्होंने उन्हें बताया कि वो पत्र लंदन पहुंचा ही नहीं।

गांधी ने उस पत्र को दोबारा भेजने का आग्रह किया, लेकिन तब तक चर्चिल के साथ सुलह करने का मनोवैज्ञानिक क्षण बीत चुका था। चर्चिल ने गांधी के खत का जवाब नहीं दिया।

अगर वो जवाब देना भी चाहते थे, तब भी वो कुछ कर सकने की स्थिति में नहीं थे क्योंकि 26 जुलाई, 1945 को ब्रिटेन की जनता ने दूसरे विश्व युद्ध में ऐतिहासिक जीत दिलवाने वाले विंस्टन चर्चिल को सत्ता से बेदखल कर दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed