कंधार कांड में सामने आया नया खुलासा
दुलत के अनुसार वे केंद्र सरकार से इस कदर नाराज थे कि बैठक में तब के रॉ प्रमुख एएस दुलत पर चिल्लाते रहे और फिर अपना इस्तीफा सौंपने के लिए राज्यपाल के पास चले गए। हालांकि राज्यपाल के समझाने पर वे स्थिति की गंभीरता समझ गए थे।
एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में दुलत ने बताया कि 24 दिसंबर को अपहरण की वारदात होने के बाद क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (सीएमजी) ने पूरे मामले को बिगाड़ दिया।
जब विमान ने अमृतसर में लैंड किया तो कोई भी निर्णय नहीं लेना चाह रहा था। पंजाब पुलिस ने अपने जवान भेज दिए थे पर असमंजस की स्थिति में कोई निर्देश ही नहीं दिया जा सका।
लोग बहस में उलझे रहे
उनमें से दो आतंकी मुस्ताक लतराम और मौलाना मसूद अजहर जम्मू-कश्मीर में कैद थे। इन दोनों की रिहाई के बारे में बात करने के लिए दुलत जम्मू में फारुख से मिले थे। उस बैठक को याद करते हुए दुलत ने बताया कि मुख्यमंत्री मुझ पर घंटों चिल्लाते रहे और कहा कि केंद्र गलती करने जा रहा है।
कुछ समय बाद जब उनका गुस्सा कुछ कम हुआ तो अपना इस्तीफा देने के लिए वे तत्कालीन राज्यपाल गिरीश चंद्र सक्सेना से मिलने चले गए। हालांकि राज्यपाल उन्हें शांत कराने में सफल रहे और अंत में फारुख अब्दुल्ला ने भी स्थिति को स्वीकार करते हुए आतंकियों की रिहाई मान ली।
बीजेपी ने सबसे ली थी राय
वहीं मामले में भाजपा सरकार की किरकिरी होते देख सरकार की ओर से एमजे अखबर ने सफाई दी है।
उन्होंने कहा कि तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने हाईजैक मामले में सभी दलों से एक्शन लेने से पूर्व राय मशविरा किया था और जो हाईलेवल मीटिंग में तय हुआ,सरकार ने किया।
इससे पूर्व कांग्रेस ने पूर्व एनडीए सरकार पर हाईजैक मामले में हमला बोलते हुए पूछा था कि क्या अटल सरकार ने एयर इंडिया के बंधकों को छुड़ाने के लिए फिरौती दी थी।
अटल के चेहरे पर था दुख
पूर्व रॉ प्रमुख के अनुसार वाजपेयी ने उनसे अंतिम मुलाकात में कहा था, ‘वह हमारे से गलती हुई है।’पूर्व प्रधानमंत्री को हमेशा लगता था कि 2002 के गुजरात दंगे एक गलती थी और इसका दुख उनके चेहरे पर साफ देखा जा सकता था।
गौरतलब है कि गुजरात दंगों के समय गुजरात में भाजपा सरकार ही थी और सीएम पद पर नरेंद्र मोदी आसीन थे।