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क्या जरूरी था गैंगरेप पीड़िता को सिंगापुर ले जाना?

Sat, 29 Dec 2012 09:40 AM IST
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली
चंदन जायसवाल/नई दिल्ली Updated Sat, 29 Dec 2012 09:40 AM IST
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why did rape victim sent to singapore

दिल्ली में चलती बस हुए सामूहिक बलात्कार की शिकार 23 वर्षीया लड़की की सिंगापुर में हुई मौत के बाद फिर सवाल उठ रहे हैं कि क्या उसे भारत से बाहर ले जाना जरूरी था।

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सवाल यह भी है कि क्या गैंग रेप पीड़िता को सफदरजंग हॉस्पिटल से सिंगापुर शिफ्ट करने का फैसला राजनीतिक था? क्योंकि उसका इलाज कर रहे डॉक्टरों के अनुसार पीड़िता के इलाज को लेकर सरकार मेडिकल तर्कों से ज्यादा सियासी फार्मूलों को इस्तेमाल करने में लगी रही।  
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वहीं कुछ विश्लेषक भी यहीं मानते है कि पीड़िता को भारत से बाहर ले जाने के पीछे राजनीतिक ज्यादा और इलाज संबंधी कारण कम रहे। यानी इस फैसले में सरकार का दबाव अधिक और डॉक्टरों की सहमति कम थी।
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इस मामले पर एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि जब प्रधानमंत्री का यहां ऑपरेशन और इलाज हो सकता है। विदेश से आए डॉक्टर देश में अटल जी के घुटने का ऑपरेशन कर सकते हैं तो फिर इस लड़की का इलाज यहां करने में क्या समस्या थी।

सियासी चाल से ज्यादा कुछ नहीं
एम्स के जेपीएन ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि सरकार के निर्देश पर पीड़िता को सिंगापुर भेजे जाने का निर्णय लिया गया था।  

इस मामले पर दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ऑर्गन ट्रांसप्लांट और गेस्ट्रो सर्जरी डिपार्टमेंट की डॉ. सिमरन नंदी का कहना है कि लड़की को यदि सिंगापुर भेजने की बजाय यहीं रखा जाता तो वह कुछ दिन और हमारे बीच रह सकती थी। जब पीड़िता खून से लथपथ थी, उसकी हालत बेहद नाजुक थी और उसे कई दिनों से वेंटिलेटर पर रखा जा रहा था तब ऐसे हालात में उसे सिंगापुर भेजना वाकई में संदेहास्पद था।


डॉ. नंदी का कहना था कि हमने इसी हफ्ते आंत ट्रांसप्लांट का ऑफर दिया था। इसके बावजूद पीड़िता को सिंगापुर शिफ्ट करना सियासी चाल से ज्यादा कुछ नहीं थी।

हंगामे का था डर
सूत्रों की मानें तो मंगलवार को ही आईबी के हेड नेहछल सिंह ने गृहमंत्री को खबर दे दी थी कि अगर लड़की को यहां कुछ हो जाता है तो युवा फिर से बवाल मचा सकते हैं। दूध से जला छाछ भी फूंक कर पीता है लिहाजा सरकार ने आनन-फानन लड़की को बाहर भेजने का फैसला कर लिया।

दरअसल लड़की की जिंदगी ही असल सवाल थी जिसके लिए तमाम चीजें दांव पर लगाई गईं। मतलब साफ है सरकार के इस फैसले में लड़की की सेहत नहीं सियासत ज्यादा हुई।

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