प्रणब दा के तीर से मोदी ने किए दो शिकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा की ओर से पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कोलकाता में अपनी चुनावी रैली में भाषण दिया, तो अपने सभी विरोधियों पर एक-एक करके निशाना लगाया।
सबसे पहले बारी आई कांग्रेस की, जिसे पटखनी देकर इस बार वह सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के ख्वाब देख रहे हैं। उसके बाद हमला बोला गया तीसरे मोर्चे पर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर अटैक करने से उन्होंने परहेज दिखाया।
लेकिन इस बीच मोदी के भाषण के जिस हिस्से ने सबसे ज्यादा चौंकाया, वह किसी की आलोचना नहीं बल्कि दिल खोलकर की गई तारीफ से जुड़ा है। गुजरात के मुख्यमंत्री ने प्रणब मुखर्जी की प्रशंसा करते हुए कांग्रेस पर हमला बोला, जिसमें कहा कि प्रणबदा दो बार देश के प्रधानमंत्री बन सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं होने दिया। मोदी ने एक तीर से दो शिकार किए।
कांग्रेसी नेताओं की दुखती रग दबाई?
नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर प्रणब मुखर्जी की तारीफ की, तो सभी को लगा कि इसकी वजह यह है कि अगर लोकसभा चुनाव के बाद त्रिशंकु संसद की स्थिति बनती है, तो अगली सरकार कौन बनाएगा, इसमें राष्ट्रपति की भूमिका काफी अहम हो जाएगी।
लेकिन मोदी के रणनीतिकारों का कहना है कि इस 'आम' वजह के अलावा इस तारीफ की चादर तले एक और अहम राजनीतिक कारण छिपा है। इसका सीधा लेना-देना भाजपा की उस योजना से है, जिसमें वह पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों पर अपना बेहद खराब रिकॉर्ड सुधारना चाहती है।
प्रणबदा यहां के कद्दावर नेता हैं और कांग्रेस की तरफ से उन्हें वो नहीं मिला, जिसके वो हकदार थे, यह टीस भी पुरानी है। प्रणब के साथ हुए 'अन्याय' की चर्चा कर मोदी उम्मीद बांध रहे हैं कि कांग्रेस से छिटकने वाला वोट भाजपा की झोली में गिर जाए। भाजपा के पूर्व अवतार जन संघ की नींव श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रखी थी, लेकिन वह इस जमीन पर कामयाब नहीं हो पाई है।
प्रणब के बहाने राहुल गांधी पर निशाना
नरेंद्र मोदी के सहयोगियों का कहना है कि प्रणब मुखर्जी की तारीफ का ताल्लुक राहुल गांधी का कद बढ़ने के बाद कांग्रेस के भीतर हो रहे 'शांत बदलावों' और वरिष्ठ नेताओं के दिमाग में राहुल के कामकाज के स्टाइल को लेकर पैदा हुई 'निराशा और भ्रम' से भी है।
मोदी का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव करीब आएंगे, कांग्रेस के अंदर चल रही उठापटक सामने आने लगेगी। खास तौर से राहुल के हाथों हो रही पार्टी की रिइंजीनियरिंग, जिसके तहत लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवार चुने जाने हैं।
उनके रणनीतिकार यह मान रहे हैं कि राहुल पार्टी के दरवाजे खोलने की कितनी भी बातें क्यों न कर लें, लेकिन मोदी को उम्मीद है बार-बार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की 'पतली हालत' रेखांकित कर वह यह दिखाते रहेंगे कि विरासत की राजनीति ने उनका कितना नुकसान किया है।
पहले भी करते रहे हैं प्रणब की तारीफ
भाजपा के पीएम पद के दावेदार 'राजनीतिक नौसीखिया' भी नहीं, जो यह सोचकर बैठ जाएं कि राष्ट्रपति जरा सी तारीफ सुनकर भावनाओं में इस कदर बह जाएंगे कि चुनावों के बाद भाजपा के पक्ष में फैसले करने लगें। इसके पीछे सोची-समझी रणनीति है।
मोदी ने पहली बार प्रणब मुखर्जी की तारीफ पिछले साल मार्च में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में की थी। दिसंबर 2012 में गुजरात में तीसरी जीत पर जब उन्हें सम्मानित किया जा रहा था, तो उन्होंने कहा कि भाजपा में वह ऊपर चढ़ पाए, लेकिन कांग्रेस में गांधी परिवार ने वरिष्ठ नेताओं की कीमत पर सीढ़िया चढ़ी हैं।
2012 में मोदी उन शुरुआती नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने प्रणब मुखर्जी को यूपीए की ओर से राष्ट्रपति पद का दावेदार बनने पर बधाई दी। मोदी इस बात से भी खुश नहीं थे कि एनडीए ने उनके खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारने का फैसला किया।
पीएम पद को लेकर गांधी परिवार को लपेटा
पिछले साल अक्टूबर में प्रणब मुखर्जी ने भाजपा को खुश भी किया। उन्होंने दो दिन के अपने बिहार दौरे के पर कतरने का फैसला किया, क्योंकि वह मोदी की हुंकार रैली से टकरा रहा था। शाहनवाज हुसैन और राजीव प्रताप रूडी ने उनसे मुलाकात कर कार्यक्रम बदलने का आग्रह किया था।
गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति ने मतदाताओं से स्थिर सरकार के लिए वोट करने को कहा और भाजपा के नेताओं ने इसका स्वागत किया। अराजकता वाले बयान को आम आदमी पार्टी पर निशाने के तौर पर लिया गया।
मोदी ने कल कहा था, "जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, तो राजीव गांधी कोलकाता में थे और वहां से लौटे। लोकतंत्र के नाते उस वक्त इंदिरा सरकार में सबसे वरिष्ठ मंत्री प्रणब मुखर्जी थे। अच्छा होता अगर उन्हें देश का प्रधानमंत्री बनाया गया होता।"
कांग्रेस, वाम दलों की जवाबी फायरिंग
नरेंद्र मोदी ने कहा, "लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया। गांधी परिवार को लगा कि कुछ चल रहा है। इसलिए जब राजीव गांधी की सरकार बनी, तो प्रणब मुखर्जी को मंत्री तक नहीं बनाया गया।"
भाजपा नेता ने कहा, "2004 में एक बार फिर प्रणबदा सबसे वरिष्ठ नेता थे। स्वाभाविक है कि सोनिया गांधी उन्हें प्रधानमंत्री नहीं बनते देखना चाहती थी। उस वक्त प्रणबदा को मौका मिलना चाहिए था, लेकिन मनमोहन सिंहजी को पीएम बना दिया गया।"
हालांकि, मोदी के इस हमले पर वाम मोर्चा और कांग्रेस ने जवाबी हमला बोला है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा, "उनकी टिप्पणी में कोई दम नहीं है। उन्होंने केवल माहौल बनाने के लिए यह बयान दिया। देश के सबसे ऊंचे संवैधानिक पद को राजनीति में घसीटने की निंदा की जानी चाहिए।"
राष्ट्रपति चुनावों के वक्त कहां थे मोदी?
वाम मोर्चा के अध्यक्ष विमान बोस का कहना था, "प्रधानमंत्री न बनाए जाने पर मोदी अब प्रणब मुखर्जी के प्रति संवेदनाएं दिखा रहे हैं। उनकी और भाजपा की यही संवेदना तब कहां गई थी, जब राष्ट्रपति चुनावों के वक्त उनके खिलाफ उम्मीदवार उतारा गया? ये लाग दोगली बातों के विशेषज्ञ हैं।"
बोस ने प्रस्तावित थर्ड फ्रंट की आलोचना करने पर भी मोदी पर निशाना साधा। उनहोंने कहा, "अगर कोई गलतबयानी करे, तो जरूरी नहीं कि मैं भी उसके स्तर तक गिरकर ऐसा कोई बयान दूं। यह बंगाल की संस्कृति और सभ्यता नहीं है।"
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने बंगाल में आए बदलाव को लेकर मोदी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, "दंगा कराने वाला हीरो यह कैसे समझ जा सकता है कि ममता बनर्जी के आने के बाद बंगाल में क्या परिवर्तन आया है?"