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यूपी में फीकी पड़ने लगी अमित शाह की चमक?

Sat, 21 Nov 2015 06:33 PM IST
अनिल यादव वरिष्ठ पत्रकार
अनिल यादव वरिष्ठ पत्रकार Updated Sat, 21 Nov 2015 06:33 PM IST
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Why Charisma of Amit Shah gone in UP?

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद उत्तर प्रदेश में अभी से भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की राजनीतिक समझ और काबिलियत पर सवाल उठाए जाने लगे हैं।

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पार्टी के भीतर पुरानी गुटबाजी नए जोर के साथ सिर उठा रही है जिसका असर जारी पंचायत चुनावों में साफ दिखाई दे रहा है। भाजपा नेताओं का कहना है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो दो साल बाद उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के टिकट बांटने के वक्त तक सिरफुटौवल का नजारा होगा।
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बीते लोकसभा चुनाव से ऐन पहले अमित शाह को उत्तर प्रदेश का पार्टी प्रभारी बनाया गया था। राज्य में आम चुनावों में मिली शानदार जीत को अमित शाह के नेतृत्व और सांगठनिक क्षमता का करिश्मा बताकर प्रचारित किया गया था। बड़े नेता भी उनके सामने मुंह खोलने से बचते थे, उनका कहा, अंतिम होता था लेकिन अब जैसे उनकी चमक फीकी हो रही है।
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राम जन्मभूमि आंदोलन के नेताओं में एक पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद का कहना है, "अनुभवहीन नेताओं और गैर-जिम्मेदार बयानबाजी के कारण हमें ऐसे राज्य में भी हारना पड़ा जहां जीत की संभावना ज्यादा थी। पिछले लोकसभा चुनाव के बाद से अनुभवी कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं की उपेक्षा हुई है।"

'यूपी में हारी तो 2019 में होगी मुश्‍किल'

Why Charisma of Amit Shah gone in UP?

पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह ने कहा, "पार्टी सामूहिक विश्वास और सामूहिकता की भावना से चलती है। काम करने के तरीके पर जो सवाल उठ रहे हैं, उनकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।"

एक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि लालकृष्ण आडवाणी समेत दूसरे नेताओं के अनुभव से फायदा लेना ही पार्टी के लिए इन परिस्थितियों में ठीक रहेगा। पार्टी के पूर्व सांसद और स्तंभकार राजनाथ सिंह सूर्य ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को उत्तर प्रदेश में भाजपा का चेहरा घोषित करने पर जोर देते हुए कहा कि अगर भाजपा उत्तर प्रदेश भी हार गई तो 2019 के आम चुनाव में मुश्किल होगी।

कार्यकर्ताओं में अमित शाह को “जुमलेबाज” के उपनाम से जाना जाने लगा है हालांकि यह बात कोई ऑन रिकार्ड नहीं कहना चाहता क्योंकि सत्ताधारी पार्टी में सबको अपने कामों और राजनीतिक भविष्य की चिंता है।

उन्होंने मोदी के कालाधन वापस लाने के वायदे को चुनावी जुमला कहा था जबकि खुद कार्यकर्ताओं को यकीन था कि मोदी इस दिशा में गंभीर प्रयास करेंगे।

शाह की फटकार के बावजूद बयानबाजी जारी

Why Charisma of Amit Shah gone in UP?

गुटबाजी का आलम यह है कि हाल में हुए जिला पंचायत चुनावों में कम से कम पांच सौ जगहों पर पार्टी के तीन या अधिक उम्मीदवार एक दूसरे के खिलाफ खड़े हुए और हारे।

अंदरूनी झगड़ों के कारण डेढ़ सौ से दो सौ जगहों पर पार्टी उम्मीदवार ही नहीं तय कर पाई। रास्ता निकाला गया कि जो भी जीतेगा पार्टी उसे अपना मान लेगी।

अमित शाह की अवहेलना का एक और प्रमाण यह है कि भड़काऊ बयान देकर सरकार की किरकिरी कराने वाले सांसद साक्षी महाराज, विधायक संगीत सोम और मंत्री महेश शर्मा को उन्होंने फटकारा था लेकिन इसके बावजूद वे बयानबाजी कर रहे हैं। संगीत सोम तो बिना संगठन की अनुमति के तमाम कार्यक्रमों में पहुंच रहे हैं और बोल रहे हैं।

विरोधियों का कहना है कि शाह की फटकार सिर्फ दिखाने के लिए थी, वास्तव में इन नेताओं को धार्मिक ध्रुवीकरण के लिए अगले विधानसभा चुनाव तक माहौल गरमाए रखने के लिए कहा गया है।

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