फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   BJP Strategy Behind Praising Bal Thackrey - Maharashtra Assembly Elections 2014

जानिए, बाल ठाकरे को आदर देने के पीछे भाजपा का 'खेल'

Fri, 10 Oct 2014 03:11 PM IST
वेद विलास उनियाल/अमर उजाला, नई दिल्ली
वेद विलास उनियाल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Oct 2014 03:11 PM IST
विज्ञापन
BJP Strategy Behind Praising Bal Thackrey - Maharashtra Assembly Elections 2014

महाराष्ट्र राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने प्रचार में सोची समझी रणनीति के तहत शिवसेना और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे को लेकर नकारात्मक टिप्पणी नहीं कर रही है। बल्कि भाजपा इससे एक कदम आगे जाकर अपनी रैलियों में बाल ठाकरे के प्रति खासा आदर दिखा रही है।

विज्ञापन


इससे जहां एक तरफ उसे चुनाव के बाद की परिस्थितियों में शिवसेना से किसी गठबंधन की उम्मीद बने रहने की संभावना दिखती है, वहीं उसकी कोशिश इस बात की है कि शिवसेना मराठी अस्मिता का कार्ड नहीं खेले।
विज्ञापन


बाल ठाकरे के निधन के बाद राज्य में पहली बार विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। भाजपा की पुरजोर कोशिश है कि यह चुनाव भाजपा बनाम शिवसेना न बने।

धर्मनिरपेक्षता बनाम राष्ट्रीयता-हिंदुत्व की राजनीति

BJP Strategy Behind Praising Bal Thackrey - Maharashtra Assembly Elections 2014

भाजपा और शिवसेना दोनों के गठबंधन को बचाने की कोशिश में एक कदम आगे और तीन कदम पीछे चलने का रवैया दिखा। जिस तरह की परिस्थितियां बनी उससे यही लगा कि पच्चीस साल के दोनों सहयोगी अलग होने की मंशा बना चुके थे।

केवल अपने लिए बड़े सौदे का हक जताकर दूसरे को केवल टटोला ही जा रहा था। इस स्थिति में भाजपा शिवसेना के सामने आसन्न संकट इसी बात को लेकर था कि जिस तरह वोटों का धुव्रीकरण लोकसभा में हुआ था, वह छिन्न-भिन्न हो जाता। लेकिन कांग्रेस और राकांपा के गठबंधन के टूटने पर भाजपा और शिवसेना दोनों के लिए वोटों के एक तरफ सिमटने का खतरा कम हो गया।

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर वोटों के लिए जो कवायद चलती थी और फिर उसके हिसाब से रणनीति बनती थी, वह पासा उलट गया। जहां कांग्रेस और एनसीपी ने इस बात को ताड़ लिया कि अब शिवसेना या भाजपा राष्ट्रीयता व हिंदुत्व के नारों का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर बुलंद नहीं करेगी, वहीं शिवसेना और भाजपा ने भी महसूस किया कि एनसीपी और कांग्रेस के लिए फिलहाल राज्य में धर्मनिरपेक्षता का राग अलापने का कोई फायदा नहीं होगा। धर्मनिरेपक्षता की आह्वान पर जो वोट एकजुट हो सकते थे उनका दो खेमों में बंटना तय है।

खेल पलट सकता है मराठी अस्मिता का मुद्दा

BJP Strategy Behind Praising Bal Thackrey - Maharashtra Assembly Elections 2014

चारों बड़े दलों में कोई अपने खूंटे बचाने की चिंता कर रहा है, तो कोई अपने विस्तार के लिए ललक रहा है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मराठवाड़ा की दो सीटों में सिमट गई थी। एनसीपी के चलते कांग्रेस मराठवाड़ा, पश्चिम महाराष्ट्र में अपने लिए उवर्रक जमीन नहीं पा रही है। इसी तरह कांग्रेस के क्षत्रप जगह-जगह अड़चने पैदा कर रहे हैं। इन दोनों दलों की शक्ति भाजपा शिवसेना के विरोध करने से ज्यादा एक दूसरे को मिटाने पर खत्म हो रही है।

भाजपा भले ही मुख्यमंत्री के लिए किसी बड़े नाम को आगे न कर पा रही हो। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीस सभाओं का आयोजन साफ जताता है कि वोट मोदी के नाम पर ही मांगे जा रहे हैं। इसी कड़ी में भाजपा चारों दलों की आपसी गुत्थमगुत्था को सहने को तो तैयार है, लेकिन वह इस बात से सर्तक है कि बाल ठाकरे के नाम पर मराठी अस्मिता की संवेदना जगी तो उसका खेल पलट सकता है।

मुंबई भाजपा के एक नेता अपने नाम का जिक्र नहीं करना चाहते, उनका कहना है कि भाजपा किसी भी सूरत में इस चुनाव को शिवसेना और उनकी पार्टी के बीच की लड़ाई बनाकर नहीं रखना चाहते। इसलिए किसी भी रूप में इस संघर्ष को पंद्रह वर्ष सत्ता में रहे गठबंधन और भाजपा के बीच की लडाई के रूप में ही रखना है। मुंबई में गुजराती बनाम मराठी की धीमी लौ भी जल रही है। भाजपा ऐसे में नहीं चाहेगी कि ऐसा विवाद तूल पकड़े।

विज्ञापन

शिवसेना का सीधा विरोध क्यों नहीं कर रही भाजपा?

BJP Strategy Behind Praising Bal Thackrey - Maharashtra Assembly Elections 2014

स्वाभिमानी शेतकरी संगठन या राष्ट्रीय समाज पक्ष जैसे दलों के प्रभाव से भाजपा मराठवाड़ा और पश्चिम महाराष्ट्र में जिस जमीन को देख रहा है, उसे विवादों के चलते उलझाना नहीं चाहती। शिवसेना गठबंधन में रहते हुए भी भाजपा की अलग-अलग पहलुओं में आलोचना करती आई है। इसलिए शिवसेना की उसके प्रति खुली आलोचना उतना महत्व नहीं रखती, लेकिन इसके विपरीत भाजपा अगर शिवसेना को जवाब देती और विरोध के स्वर उठाती तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही होता।

भाजपा सीधा विरोध कर यह संकेत भी नहीं देना चाहती कि केंद्र में सत्ता पाने के बाद वह अपने साथी दलों के प्रति निर्मम हो गई है। इसलिए बाल ठाकरे शिवसेना के लिए अभी भी श्रद्धेय बने हुए हैं।

इस मामले में शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक प्रेम शुक्ला कहते हैं कि भाजपा का बाल ठाकरे को आदर देना उनके अपने अंदर का डर है। इससे वह बाल ठाकरे या शिवसेना के विरोध में एक शब्द नहीं कह रही है। दरअसल भाजपा इस बात पर डरी है कि वह शिवसेना से नाता तोड़कर मराठी वोट खो सकती है। सिंधुदुर्ग, रत्नागिरी में भाजपा का असर ही नहीं है। मुंबई, कोंकण और थाना में भाजपा की जो पहचान है, वह शिवसेना के दम पर बनी है। मुंबई में उसे शिवसेना से अलग होने की कीमत चुकानी पड़ेगी। इसके अलावा अलग विदर्भ की मांग केवल भाजपा नहीं कर रही। इस स्थिति में वह विदर्भ क्षेत्र की 62 सीटों पर पूरा भरोसा नहीं कर सकती। यही कारण है कि भाजपा की मंशा शिवसेना को समेटने की है, लेकिन बाहरी तौर पर वह आदर दिखा रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed