साक्षी के खिलाफ इतनी सख्त क्यों हो गई BJP?
विहिप नेता अशोक सिंघल ने पिछले वर्ष कहा था कि देश के हर हिंदू को पांच बच्चे पैदा करना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई थी कि हिंदुओं की आबादी कम होती जा रही है। वह दिन दूर नहीं, जब हिंदू ही भारत में अल्पसंख्यक हो जाएंगे।
पिछले सप्ताह भाजपा के बड़बोले नेता साक्षी महाराज ने रियायत देते हुए कहा कि हिंदुओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करना चाहिए। साक्षी के बयान के अगले ही दिन प्रवीण तोगड़िया ने हिंदुओं को तीन बच्चे पैदा करने की शपथ दिला दी। संख्या के मामले में उन्होंने जरूर उदारता बरती।
बच्चे पैदा करने की वकालत इन सभी नेताओं पर भारी पड़नी थी। हुआ भी वही। सिंघल, साक्षी और तोगड़िया सभी पर तीखे हमले किए गए। सिंघल का मामला पुराना है। बयान लोकसभा चुनाव के पहले दिया गया था। चर्चा हुई लेकिन वैसी नहीं, जैसा बवाल साक्षी महाराज के बयान पर हो गया।
तोगड़िया के बयान पर भी वैसा बम नहीं फूटा, जैसे धमाके साक्षी महाराज के बयान पर कर दिए गए।
शाह ने साक्षी से 10 दिन में मांगी बयानों पर सफाई
बच्चों के बयान पर भाजपा आलाकमान ने साक्षी महाराज को नोटिस पकड़ा दिया। उन्हें 10 दिनों में सफाई देने को कहा गया। भाजपा की सख्ती का मतलब क्या है?
जानकारों ने बताया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साक्षी को नोटिस देने का फैसला पिछली कई चेतावनियों को अनदेखा करने के बाद किया। साक्षी के बयानों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी परेशान दिखे। मोदी और शाह ने साक्षी को कई बार नसीहतें दी, लेकिन बड़बोलेपन की रौ में उन्होंने नसीहतों का धुंआ उड़ा दिया।
हालांकि ये पहली बार है कि किसी नेता को बयान के कारण भाजपा ने नोटिस दिया और बयान भी ऐसा जिसे भाजपा के सहयोगी संगठन दिनरात की गपों में उलीच देते हैं। आखिर भाजपा को ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि वह साक्षी महाराज के खिलाफ ऐसी सख्ती बरत दे?
सोशल मीडिया में करा दी BJP की फजीहत
लोकसभा चुनावों में भाजपा का एक नारा बहुत मशहूर हुआ था, 'बहुत हुई महंगाई की मार, अबकी बार मोदी सरकार।' साक्षी के बयान के बाद सोशल मीडिया में उस नारे का नया वर्जन उछाला गया- 'अबकी बार, बच्चे चार'।
दरअसल सोशल मीडिया ने ही साक्षी बयानों खिलाफ पहली बार मोर्चा खोला। फेसबुक और टि्वटर पर साक्षी के बयान के कारण भाजपा की बखिया उधेड़ी गई। #SakshiMaharaj टि्वटर पर कई दिनों तक ट्रेंड करता रहा।
संसद सत्र तो नहीं चल रहा था, लेकिन साक्षी के बयान के कारण भाजपा की कम फजीहत नहीं हुई। मीडिया के सवालों से बचने के लिए भाजपा प्रवक्ताओं ने चार बच्चों के बयान को साक्षी का निजी बयान कहकर पल्ला झाड़ लिया।
विवादित मुद्दों से भाजपा ने बना ली दूरी
लोकसभा चुनावों के बाद से ही भाजपा ने उन सभी मुद्दों से दूरी बनाने की कोशिश की, जिन पर विवाद होने या वोटरों के छिटकने की संभावना थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित कई संगठनों ने लव जेहाद का मुद्दा जोरशोर से उठाया लेकिन केंद्र सरकार ने मामले पर चुप्पी साधे रखी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने तो ये तक कह दिया कि उन्हें नहीं पता की लव जेहाद क्या है?
धर्मांतरण के मसले पर आरएसएस और विहिप के आक्रामक रुख के बाद भी भाजपा ने उसे राजनीतिक एजेंडा बनने नहीं दिया। संसद में विपक्ष के हंगामे के बाद भी भाजपा ने धर्मांतरण के बजाय बहस को धर्म परिवर्तन रोधी कानून तक सीमित रखा।
लगातार विधानसभा चुनावों में व्यस्त भाजपा ने अपने तमाम राजनीतिक बहसों को विकास के इर्दगिर्द ही रखने की कोशिश की।
भाजपा की कोशिशों का मतलब क्या है?
जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने विवादों से बचने के लिए अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता जैसे वर्षों पुराने कोर एजेंडे को भी हाशिये पर डाल दिया। पिछले सात महीने में भाजपा ने वैचारिक स्तर पर रूपातंरण का प्रयास किया। हालांकि ये रूपांतरण कितना वास्तविक है, ये वक्त ही तय करेगा।
पार्टी ने उन सभी मुद्दों को दरकिनार किया, जो उसकी दक्षिणपंथी छवि के अनुकूल थे। वह उदार दक्षिणपंथी के रूप उभरने की दिशा में आगे बढ़ रही है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सिमटने के बाद पैदा हुए निर्वात भरने की ये कोशिश भी है।
विभिन्न राज्यों में जीत के साथ केंद्रीय स्तर की पार्टी के रूप में कांग्रेस का विकल्प बनकर उभरी भाजपा वैचारिक स्तर पर भी कांग्रेस का विकल्प बनने की कोशिश में है। विकास के मुद्दे पर आक्रामक रुख और कोर एजेंडों पर खामोशी भाजपा की उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।
साक्षी महाराज पर अनुशासानत्मक कार्रवाई भाजपा की नई छवि गढ़ने की कोशिश का ही हिस्सा है।