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गुजरातः बीजेपी नेताओं के लिए क्यों हो गई है 'नो एंट्री'

Mon, 16 Nov 2015 01:07 PM IST
दर्शन देसाई\ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
दर्शन देसाई\ बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए Updated Mon, 16 Nov 2015 01:07 PM IST
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why bjp leaders ban in gujarat?

गुजरात में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने हार्दिक पटेल और उनके सहयोगियों को देशद्रोह का आरोप लगाकर क़रीब एक महीने से जेल में बंद कर रखा है।

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सरकार को लगता है कि इन गिरफ़्तारियों से आरक्षण समर्थक पटेलों का आंदोलन ख़त्म हो जाएगा, लेकिन पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएसएस) और सरकार पटेल ग्रुप (एसपीजी) मिलकर इस आंदोनल को फैलाने में जुटे हुए हैं। पीएसएस और एसपीजी की कार्रवाइयों ने आगामी स्थानीय निकाय चुनाव में बीजेपी की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।
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22 नवंबर को छह नगर निगमों और 29 नवंबर को 317 नगरपालिकाओं, तहसील पंचायतों और ज़िला पंचायतों के चुनाव होने वाले हैं। आनंदी बेन पटेल सरकार का खेल बिगाड़ने के लिए नौजवान पटेल दीवाली में घर-घर जाकर सत्तारूढ़ पार्टी को वोट न देने और किसी निर्दलीय या कांग्रेसी उम्मीदवार को वोट देने की अपील कर रहे हैं।
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पूरे राज्य में कई रिहायशी कॉलोनियों के बाहर बीजेपी उम्मीदवारों को निशाना बनाते 'नो एंट्री' के बैनर लगाए गए हैं। प्रदर्शन कर रहे पाटीदार अपने समर्थकों और लोगों से कह रहे हैं कि वो आरक्षण की उनकी मांग का समर्थन न करने के लिए कांग्रेस और बीजेपी को सबक सिखाने के लिए ईवीएम पर नोटा का बटन दबाएं।

यहां तक कि मुख्यमंत्री आनंदी बने पटेल के चुनाव क्षेत्र में आने वाले अहमदाबाद के घातोलोडिया और चंडलोडिया इलाक़ों में 'नो एंट्री' लिखे पोस्टरों-बैनरों को हटाने के लिए बीजेपी को पुलिस की मदद लेनी पड़ी।

पटेल समुदाय से की कांग्रेस को वोट देने की अपील

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सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली ज़िले के धारी विधानसभा क्षेत्र के प्रभावशाली बीजेपी विधायक नलिन कटोडिया ने तो पार्टी को नज़रअंदाज़ कर कई बार पटेल समुदाय से कांग्रेस को वोट देने की खुलेआम अपील की ताकि 'जन विरोधी' भाजपा को हराया जा सके। सौराष्ट्र दक्षिण और उत्तर गुजरात में कई ज़िले ऐसे हैं जहां बीजेपी नेताओं के अपनी पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होनी की घटनाएं लगातार हो रही हैं।

पिछले 10 दिन में भारतीय किसान संघ के संयोजक समेत प्रमुख किसान नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस की सदस्यता ले ली है। यह सब सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्रदेश पार्टी अध्यक्ष भारत सोलंकी और पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल की मौजूदगी में हुआ है।

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल को सूरत के जलापोर जेल में दिवाली की शुभकामनाओं के 3000 ग्रीटिंग कार्ड मिले हैं जिनमें उनके आंदोलन का समर्थन किया गया है। जनवरी से पहले हार्दिक पटेल के पुलिस हिरासत से छूटने की उम्मीद नहीं है।

पटेल आंदोलन का असर इस बात से भी आंका जा सकता है कि सत्तारूढ़ बीजेपी पटेल बहुल मेहसाना ज़िले में अपने क़ब्जे वाली उझा नगरपालिका चुनाव के लिए एक भी उम्मीदवार उतार नहीं पाई। नगरपालिका के मौजूदा सदस्यों ने बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया और इनमें से कुछ ने तो स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा।

उझा नगरपालिका में नामांकन की अंतिम तारीख 10 नवंबर तक 36 सीटों पर कुल 155 नामांकन भरे गए, जिनमें से 149 निर्दलीय उम्मीदवार थे और छह कांग्रेस से थे। उझा क़स्बे में मसालों का एशिया का सबसे बड़ा बाज़ार है। यहीं पर पाटीदारों की देवी उमिया माता का मंदिर भी है।

यहीं पर टूटा था पुलिस का कहर?

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यह वही जगह है जहां पटेल आंदोलन काफी उग्र रहा है। अहमदाबाद में 25 अगस्त को हार्दिक की महारैली के बाद पुलिस का कहर सबसे अधिक यहीं टूटा था। मेहसाणा मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और नितिन पटेल का गृह जनपद है। यह लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रहा है।

इंदिरा गांधी की 1984 में हुई हत्या के बाद चली कांग्रेस लहर में इसी इलाक़े ने बीजेपी को दो सीटें दिलाईं थीं।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने और गुजरात छोड़कर जाने के बाद हो रहे ये स्थानीय चुनाव आनंदी पटेल सरकार के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं हैं। इन चुनावों में राज्य की 6।38 करोड़ की आबादी में से 3।55 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे।

राज्य सरकार ने पहले पाटीदार आंदोलन के चलते क़ानून-व्यवस्था के बहाने निकाय चुनावों को स्थगित करने की कोशिश भी की थी। लेकिन गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के बाद ये चुनाव कराए जा रहे हैं।

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