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BJP की बैठक में नहीं गए शाह, राजनाथ?

Mon, 25 Aug 2014 11:09 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा) Updated Mon, 25 Aug 2014 11:09 AM IST
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why amit shah and rajnath singh absent from up bjp meeting.

वृंदावन में यूपी भाजपा की कार्यसमिति की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह उद्घाटन करने नहीं आए तो पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह भी समापन करने नहीं पहुंचे। उद्घाटन की औपचारिकता कलराज मिश्र ने पूरी की थी तो समापन राष्ट्रीय महासचिव रामलाल ने की। लोकसभा चुनाव के बाद एकजुटता दिखाने की पहली ही परीक्षा में भाजपा फेल हो गई। बड़े नेताओं के बीच खींचतान और केंद्र के कुछ नेताओं की प्रदेश संगठन के कामकाज से नाराजगी की चर्चा अलग रही। समझा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव जीतने की परीक्षा भाजपा के लिए कितनी कठिन साबित होने वाली है।

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बैठक के भीतर भले ही कोई कुछ न बोला हो लेकिन बाहर कार्यकर्ता यह कहते भी सुने गए कि जब अमित शाह नहीं आए तो राजनाथ क्यों आते। राजनाथ 15 माह पहले चित्रकूट में हुई कार्यसमिति की बैठक में भी समय देकर नहीं आए थे।
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दरअसल, राजनाथ व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के बीच रिश्ते लंबे समय से सहज नहीं है। यह बात लोकसभा चुनाव के दौरान और कई अन्य कई कार्यक्रमों में भी दोनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी से परहेज रखने से उजागर हो चुकी है।
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...ये तो होना ही था

why amit shah and rajnath singh absent from up bjp meeting.

पार्टी की तरफ से अमित शाह के न आने के पीछे विधानसभा व लोकसभा सीटों के उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों पर विचार का तर्क दिया गया तो राजनाथ के न आने की वजह एक महत्वपूर्ण बैठक को बताया गया। जानकारी के मुताबिक यह तो होना ही था। वाजपेयी ने संगठन के भीतर से लेकर बाहर तक जिस तरह राजनाथ समर्थकों के पर कतरे हैं, उसके बाद रिश्तों में तल्खी होना स्वाभाविक है। वहीं, राष्ट्रीय पदाधिकारियों की सूची आने के बाद यह संशय नहीं रह गया है कि शाह भले ही कुछ न बोल रहे हों, लेकिन यूपी की स्थितियों से वह बहुत प्रसन्न नहीं है। इसी कारण उन्होंने इस बैठक को बहुत महत्व नहीं दिया।

भगवा झंडाबरदार भी गायब
माना जा रहा था कि सत्ता के वनवास से मुक्ति के बाद हो रही इस पहली बैठक में भगवा चेहरे जरूर रहेंगे। एकजुटता दिखेगी। पर, ऐसा नहीं हुआ। शाह व राजनाथ ही नहीं बल्कि अन्य कई छोटे व बड़े चेहरे भी गायब रहे। कार्यकर्ताओं की निगाहें कल्याण सिंह, उमा भारती, वरुण गांधी, योगी आदित्यनाथ, डॉ. मुरली मनोहर जोशी को तलाशती ही रह गईं। साक्षी महराज और सावित्री बाई फूले जैसे भगवाधारी भी गायब रहे।

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

‘प्रदेश में सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। पर, भेदभाव छोड़ना पड़ेगा। इनको टिकट कि उनको टिकट की मानसिकता त्यागनी होगी। खींचतान से उबरना पड़ेगा।’ बैठक के उद्घाटन सत्र में भले ही कलराज मिश्र ने यह अपेक्षा की हो, लेकिन बैठक से जिस तरह से इन नेताओं ने दूरी बनाई, उससे साफ हो गया कि लोकसभा में बड़ी जीत के बावजूद किसी नेता का मन बड़ा नहीं हो पाया है। एकजुट होने जैसी बातें सिर्फ उपदेश हैं।

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