5 साल के निचले स्तर पर थोक महंगाई दर
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सरकार के अच्छे दिन जारी हैं। दो दिन पहले खुदरा महंगाई दर में कमी और औद्योगिक उत्पादन में बढ़ोतरी के बाद अब थोक महंगाई दर में बड़ी राहत मिली है।
शुक्रवार को अक्तूबर माह के लिए जारी थोक महंगाई दर का आंकड़ा 1.77 फीसदी पर रहा। थोक महंगाई की दर पिछले पांच साल के न्यूनतम स्तर पर है। इस साल सितंबर में महंगाई दर 2.38 फीसदी थी, तो पिछले साल अक्तूबर में यह दर 7.24 फीसदी के स्तर पर थी।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक हालांकि अक्तूबर में आलू की कीमतों में 82.11 फीसदी का उछाल रहा। खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर 2.70 फीसदी पर रही, वहीं गैर खाद्य पदार्थों की कीमतों में 1.41 फीसदी की गिरावट रही।
इस दौरान निर्माण क्षेत्र की महंगाई दर 2.43 फीसदी आंकी गई। सब्जी के दाम में अक्तूबर में सालाना आधार पर 19.61 फीसदी ऊपर रहे। इसके विपरीत गेहूं में 1.92 फीसदी, तो अंडा, मांस-मछली में 2.58 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
उपभोक्ता को क्यों नहीं मिलती राहत?
इस दौरान प्याज की कीमतों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। इस साल अक्तूबर में प्याज के भाव में 59.77 फीसदी की कमी आई। अक्तूबर माह में खाद्य पदार्थों में सबसे अधिक फलों की कीमतों में 19.35 फीसदी का इजाफा रहा।
पेट्रोल के दाम में सालाना आधार पर 7.03 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इस दौरान फाइबर्स की कीमतों में तो 18.89 फीसदी की गिरावट रही। खाद्य तेल के दाम में भी 2.44 फीसदी की कमी रही।
थोक महंगाई दर में कमी के बावजूद खुदरा बाजार में आम उपभोक्ता को राहत नहीं दिखती इसका सबसे बड़ा करण है कि सामान के आपूर्ति तंत्र में खामी और बिचौलियों का हावी होना।
पेट्रोल और प्याज की कीमतों में गिरावट से थोक महंगाई दर की आंकड़े में कमी दिखी लेकिन खुदरा बाजार में उस अनुपात में कीमतें नीचे नहीं आई। डीजल की कीमत में कमी के बावजूद उपभोक्ता को भाड़े में कमी का सुख नहीं मिला।