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जेल में लालू और मसूद, मुश्किल में सरकार
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Wed, 16 Oct 2013 03:41 PM IST
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सजायाफ्ता सांसदों और विधायकों की सदस्यता खत्म करने के कानून ने एक बार फिर सरकार को मुश्किल में डाल दिया है।
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टीओआई की खबर के मुताबिक अब सरकार इस दुविधा में फंस गई है कि अलग-अलग मामलों में सजा पा चुके राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, जदयू सांसद जगदीश शर्मा और कांग्रेस नेता रशीद मसूद की सदस्यता खत्म होने की घोषणा कौन करेगा।
सरकार को डर है कि इन्हें संसदीय सदस्यता से अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया में कोई चूक सरकार को कोर्ट तक ले जा सकती है। ऐसे में राज्यसभा और लोकसभा ने फिर से कानून मंत्रालय से सलाह मांगी है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाए।
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हालांकि, कानून मंत्रालय पहले भी यह साफ कर चुका है कि आदेश के अनुसार सांसदों और विधायकों को सजा मिलते ही वह संसद सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएंगे। इसके लिए किसी प्रक्रिया को अपनाने की जरूरत नहीं है।
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रिक्ति की घोषणा कौन करेगा
अब यह संशय भी है कि इन सदस्यों की जगह पर रिक्ति की घोषणा कौन करेगा। उपचुनाव के जरिए दोनों में सदनों में इनकी जगह कोई और आएगा। लालू और शर्मा लोकसभा में सांसद हैं और मसूद राज्यसभा में सांसद हैं।
एक अधिकारी के मुताबिक सांसद अयोग्य तो हो जाएगा लेकिन किसी संस्था को तो रिक्ति की घोषणा करनी होगी। यह कौन करेगा। संसद से इस संबंध में पूछे जाने पर कानून मंत्रालय ने अटॉर्नी जनरल से सलाह मांगी है।
किसी भी कानूनी भूल से बचने के लिए सचिवालयों को भी सावधान रहने के लिए कहा गया है। इसी कारण इन सांसदों पर फैसला लेने में भी देरी हो रही है।
अधिकारी के मुताबिक सरकारी कार्य विभाजन के अनुसार कानून मंत्रालय चुनाव के लिए नोडल बॉडी का काम करता है और राष्ट्रपति सांसदों की नियुक्त करते हैं। रिक्तियों की घोषणा करने में इनकी भूमिका पर विचार किया जा रहा है।
रशीद मसूद सबसे पहले शिकार
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अध्यादेश के जरिए पलटने की कोशिश में भी सरकार को किरकिरी झेलनी पड़ी थी। कांग्रेस नेता रशीद मसूद सबसे पहले इस कानून की जद में आए। उन्हें मेडिकल सीटों में गड़बड़ी करने के चलते चार साल की सजा हुई है।
वहीं, चारा घोटाले में दोषी पाए गए लालू प्रसाद यादव को पांच साल और जगदीश शर्मा को चार साल की सजा सुनाई गई थी।
सु्प्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार दो साल से ज्यादा की सजा पाए सांसदों और विधायकों की सदस्यता रद्द हो जाएगी और वो चुनाव लड़ने के अयोग्य हो जाएंगे।