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अब कौन संभालेगा पोंटी चड्ढा का कारोबार?
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 20 Nov 2012 08:22 AM IST
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उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े कारोबारी पोंटी चड्ढा की हत्या के बाद उनका हजारों करोड़ रुपये का कारोबार अब कौन संभालेगा? ये अभी तक सवाल बना हुआ है। पोंटी की तीन संतानें हैं। दो बेटियां और बेटा मोंटी। पोंटी के छोटे भाई राजिंदर सिंह उर्फ राजू की भी भूमिका इसमें अहम हो सकती है।
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पोंटी के दादा गुरुबचन सिंह चड्ढा के छह बेटे हुए- कुलवंत सिंह, हरभजन सिंह, सुरिंदर सिंह, गुरुबख्श सिंह, सुरजीत सिंह और हरिंदर सिंह। कुलवंत सिंह, हरभजन सिंह और सुरिंदर सिंह का परिवार मुरादाबाद में रहता है। बाकी भाई मुंबई चले गए थे।
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इनमें कुलवंत सिंह के तीन बेटे हुए गुरुदीप सिंह उर्फ पोंटी, राजिंदर सिंह उर्फ राजू और हरदीप सिंह उर्फ सतनाम। शनिवार को हुए खूनी संघर्ष में पोंटी और सतनाम की जान चली गई। उनके पिता कुलवंत एक साल पहले ही बीमारी के कारण चल बसे थे। सो, अब कुलवंत के परिवार में एक बेटा राजू और पोता (पोंटी के बेटे) मनप्रीत सिंह उर्फ मोंटी चड्ढा ही बचे हैं।
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सुरिंदर सिंह के परिवार के पास गिन्नी बार एंड रेस्टोरेंट हैं। शराब के कारोबार में उनके परिवार का ज्यादा दखल नहीं है। भाई हरभजन सिंह शुरू से कुलवंत के साथ ही रहे। इसलिए उनका दखल शराब व रीयल एस्टेट कारोबार में तो है, मगर उन्होंने खुद को मुरादाबाद तक ही सीमित रखा।
हरभजन सिंह चड्ढा पोंटी के चाचा तो हैं ही, मगर इनमें एक रिश्ता और भी है। इनकी पत्नियां आपस में बहने हैं। इस वजह से चाचा-भतीजे का रिश्ता हमेशा अच्छा बना रहा। पर अब नए हालात में यह रिश्ता क्या मोड़ लेता है, इस पर लोगों की नजर रहेगी।
हरभजन के बेटे हरवीर उर्फ टीटू और चीकू हैं। इनके पास मुरादाबाद में शराब की कुछ दुकानों के अलावा चड्ढा सिनेमा, होटल 24, चड्ढा कांप्लेक्स और मुरादाबाद में रीयल एस्टेट का कारोबार है। यहां थोक के शराब कारोबार में पोंटी की भी पार्टनरशिप थी लेकिन यहां का अधिकांश काम हरभजन सिंह व उनके बेटों के नियंत्रण में ही है।
जबकि वेव मल्टीप्लेक्स से लेकर वेव रीयल एस्टेट का काम पोंटी का अपना खड़ा किया और फैलाया हुआ है। पोंटी ने अपने दम पर जो हजारों करोड़ का साम्राज्य बनाया, उसकी विरासत को लेकर मोंटी या पोंटी के भाई राजिंद्र सिंह का ही नाम चर्चा में आ रहा है।
पोंटी की चीनी मिलों पर करोड़ों का बकाया
चड्ढा ग्रुप की चीनी मिलों पर गन्ना कमीशन का करोड़ों रुपये बकाया है। गन्ना खरीद पर समितियों को जो कमीशन दिया जाता है वह भी नहीं दिया गया। विभाग ने मिलों को नोटिस जारी कर दिया है। शासन को भी रिपोर्ट भेजी जा रही है। वैसे तो प्रदेश में इस ग्रुप की नौ मिलें हैं लेकिन इनमें मुरादाबाद मंडल में अमरोहा, धनौरा, चांदपुर और बिजनौर मिल है।
दरअसल चीनी मिलों द्वारा जो गन्ने की खरीद की जाती है उस पर भारत सरकार द्वारा घोषित रेट का तीन फीसदी गन्ना कमीशन देना होता है। लेकिन चीनी मिलें इस कमीशन का भुगतान कभी समय से नहीं करतीं। यही वजह है कि गन्ना समितियों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है।
किसानों के लिए संचालित की जाने वाली योजनाओं का भी लाभ समितियां नहीं दे पाती हैं। मंडल की सभी तेइस चीनी मिलों पर समितियों का कमीशन बकाया है। गन्ना आयुक्त ने कमीशन की अदायगी न करने वाली मिलों पर कार्रवाई का आदेश दिया है।
चीनी मिल बकाया कमीशन लाखों में
बिजनौर 52.64 लाख
चांदपुर 71.05 लाख
अमरोहा 38.06 लाख
धनौरा 137.16 लाख
पिछड़ सकता है पेराई सत्र
चड्ढा ग्रुप की चीनी मिलों का पेराई सत्र पिछड़ सकता है। इन सभी मिलों ने मिल संचालन की तिथि भी घोषित कर दी थी लेकिन अब पोंटी चड्ढा की मौत के बाद माना जा रहा है कि विलंब हो जाएगा। गन्ना विभाग भी मान रहा है कि तय समय पर इन मिलों का चलना मुश्किल है।