'आप' की सरकार में किसे मिलेगा कौन सा मंत्रालय?
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मंत्रियों के नाम तय होने के बाद अब विभागों के बंटवारे की चर्चा तेज हो गई है। बुधवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच मंत्रियों को दिए जाने वाले विभागों को लेकर माथापच्ची जारी रही। सूत्रों के मुताबिक मनीष सिसौदिया को परिवहन मंत्रालय का कार्यभार सौंपा जा रहा है। मनीष ने पटपड़गंज विधानसभा सीट से बीजेपी के नकुल भारद्वाज को 11478 वोटों से हराया था। मनीष सिसोदिया समाजिक कार्यकर्ता से पहले पत्रकार रह चुके हैं।
कानून और उद्योग मंत्री बनेंगे सोमनाथ भारती!
आईआईटी से पढ़ाई कर चुके सोमनाथ भारती को कानून, श्रम व उद्योग मंत्रालय का प्रभार सौंपे जाने की उम्मीद है। आईआईटी दिल्ली से पढ़ चुके सोमनाथ भारती ने बीजेपी की आरती मेहरा को हराकर अपनी जीत दर्ज की है। 39 साल के भारती आईआईटी दिल्ली alumni एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं।
सत्येंद्र को मिलेगी सीपीडब्ल्यूडी की कमान!
युवा सौरभ के हाथों में होगी हेल्थ मिनिस्ट्री!
26 साल की राखी देखेंगी शिक्षा मंत्रालय का कामकाज!
26 साल की राखी बिड़ला को शिक्षा व समाज कल्याण मंत्रालय मिलने की संभावना है। पत्रकारिता की नौकरी छोड़कर राजनीति में आई राखी बिड़ला सबसे कम उम्र की मंत्री बनेंगी। राखी ने कांग्रेस सरकार के मंत्री राजकुमार चौहान को हराकर अपना रास्ता बनाया है। मंगोलपुरी विधानसभा सीट से राजकुमार चौहान 4 बार जीत चुके हैं। विधायक बनने से पहले राखी के पास महज 50 हजार रुपये की संपति थी, जो उन्होंने चुनाव आयोग को घोषित की थी।
12वीं पास गिरीश्ा के जिम्मे होगा महिला विकास मंत्रालय
खाद्य आपूर्ति, महिला और बाल विकास विकास विभाग गिरीश सोनी को मिल सकता है। दिल्ली की मादीपुर विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर आए गिरीश सोनी ने बीजेपी के कैलाश संकला को हराया था। महज 1103 वोटों की अंतर से जीतकर आए सोनी की शिक्षा 12वीं तक हुई है। 1980 से 'भारत की जनवादी नौजवान सभा' के साथ काम किया और मादीपुर के महासचिव के पद पर रहते हुए शिक्षा एवं रोजगार के लिए संघर्षरत आम आदमी की आवाज बने। गिरीश सोनी की समाज में साफ़ छवि है एवं इलाके की समस्याओं के लिए लोगों के साथ मिलकर लड़ते रहे हैं। बिजली-पानी आन्दोलन के दौरान गिरीश सोनी ने घर-घर जाकर लोगों को आन्दोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
केजरीवाल रख सकते हैं बिजली और जल मंत्रालय
सूत्रों की मानें तो गृह, ऊर्जा, वित्त व टैक्स, जल बोर्ड, पर्यावरण, जैसे बाकी सभी मंत्रालय अरविंद केजरीवाल खुद अपने पास रख सकते हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि बिजली व पानी अरविंद की सरकार के कोर मुद्दे हैं। जबकि राजस्व की अरविंद को गहरी समझ है। इन सबके अलावा 6 मंत्रियों को कुछ अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा जा सकता है।