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जेटली-अमरिंदर में से कौन मारेगा मैदान?

Wed, 30 Apr 2014 01:03 PM IST
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, अमृतसर
सलमान रावी/बीबीसी संवाददाता, अमृतसर Updated Wed, 30 Apr 2014 01:03 PM IST
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who will get victory in amritsar seat, arun or amarinder?

पंजाब की किसी सीट पर अगर सबसे कड़ा संघर्ष दिखता है तो वो है अमृतसर की सीट, जहाँ से भारतीय जनता पार्टी के अरुण जेटली अपना पहला लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। आख़िरी वक़्त में इस सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को उतारकर मुकाबले को रोचक बना दिया है।

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अरुण जेटली 'बाहरी' बताए जा रहे हैं क्योंकि वो 'दिल्ली वाले' हैं। मगर उम्मीदवार बनते ही उन्होंने अमृतसर में अपना एक मकान भी ले लिया है जिसके गृह प्रवेश का अनुष्ठान सिख और हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ किया गया।
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शायद उन्हें पता है कि अमृतसर की सीट हासिल करने के लिए उन्हें दोनों को साथ लेकर चलना पड़ेगा। शिरोमणि अकाली दल के साथ भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन से उन्हें उम्मीद तो बंधी है मगर उन्हें ये भी पता है कि ग्रामीण इलाकों में सिख वोट बहुत महत्वपूर्ण हैं।
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जेटली की चुनौती

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जहाँ तक अमृतसर शहर की बात की जाए तो ये हिंदू बहुल है जबकि ग्रामीण इलाकों में जाट-सिखों की आबादी ज़्यादा है। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू का टिकट काट कर जेटली को पंजाब की चुनावी पिच पर उतारा। यह उनके लिए अपने आप में एक बड़ी चुनौती है।

अमृतसर शहर की पांच विधानसभा सीटें हैं, अमृतसर मध्य, उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम। ग्रामीण सीटों में मुख्य रूप से अटारी, राजासांसी, अजनाला और मजीठा शामिल हैं। जानकार मानते हैं कि 1984 में हुए दंगे अमृतसर में चुनावी मुद्दा कभी नहीं रहे हैं।

मगर वरिष्ठ पत्रकार शम्मी सरीन कहते हैं कि 1984 के दंगों का मुद्दा हमेशा से ही चुनावों में हावी रहा इसलिए ये संघर्ष भी कहीं न कहीं सिखों और हिंदुओं के वोटों के बीच ही होता नज़र आ रहा है। उनका कहना है कि अमृतसर की सीट पर सिख होने का लाभ मिलता ही है।

पहले लोकसभा चुनाव में ही कड़ी टक्कर का सामना करना जेटली के लिए मज़ेदार अनुभव रहेगा और अब वो नरेंद्र मोदी की 'लहर' का हवाला देते हुए लोगों से कहते हैं कि वो भारतीय जनता पार्टी को वोट दें ताकि केंद्र में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने और शिरोमणि अकाली दल केंद्र से पंजाब के लिए योजनाएं ला पाए।

अमरिंदर का दावा भी मज़बूत

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हालांकि कांग्रेस के उम्मीदवार और पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जेटली को नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अमृतसर में रोड शो के दौरान बीबीसी से बात करते हुए वो कहते हैं, "कौन हैं जेटली। वो दिल्ली के नेता हैं जो अमृतसर से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्हें यहाँ से कुछ लेना देना नहीं है।"

अमरिंदर का आरोप है कि केंद्र के ख़िलाफ़ सत्ता विरोधी लहर से ज़्यादा पंजाब में राज्य सरकार के ख़िलाफ़ सत्ता विरोधी लहर देखी जा सकती है।

उनका कहना है कि रेत की कीमतों में बढ़ोतरी, नशाखोरी, संपत्ति कर, बेरोज़गारी और माफ़िया राज ऐसे मुद्दे हैं जिनसे पंजाब के लोग तंग आ चुके हैं।

आम आदमी पार्टी का भी जोर

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वहीं आम आदमी पार्टी ने आँखों के मशहूर सर्जन दलजीत सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। आम आदमी पार्टी के पक्ष में भी लोगों के बीच काफी रुझान देखने को मिल रहा है।

लेकिन अकेले अपने बूते सीट निकालना अभी इस नई पार्टी के लिए उतना आसान नहीं दिखता। हाँ, जानकार ये ज़रूर मानते हैं कि दलजीत सिंह के खड़े होने का नुकसान कांग्रेस को ही ज़्यादा होगा।

पंजाब में सत्ता विरोधी लहर दोनों के ख़िलाफ़ है यानी कि राज्य और केंद्र सरकारों के ख़िलाफ़। मगर यह देखना दिलचस्प होगा कि इसका ज़्यादा नुकसान किसे होता है, शिरोमणि अकाली दल के गठबंधन को या फिर कांग्रेस को।

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