जानिए किसके साथ हैं वाराणसी के दो लाख बुनकर?
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लोकसभा चुनाव में बुनकर किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे, इसका फैसला तो मतदान के ऐन पहले सामने आएगा, लेकिन इस मुद्दे पर बुनकर बिरादराना तंजीम के सरदारों ने अभी से मंथन शुरू कर दिया है। हालांकि जरूरी नहीं कि तंजीम के फैसले से सभी बुनकर इत्तेफाक रखें।
बनारस में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या सवा तीन लाख है। इनमें करीब दो लाख बुनकर हैं।
चुनाव में बुनकर किस प्रत्याशी के पक्ष में वोट करेंगे, इसे तय करने में बुनकर बिरादराना तंजीम के सरदारों का अहम रोल होता है।
बुनकर तंजीमों के सरदारों ने शुरू किया मंथन
सरदार मीटिंग कर प्रत्याशी पर सहमति बनाते हैं और फिर मतदान से 12-15 घंटे पहले फैसले का ऐलान कर दिया जाता है।
पिछले चुनावों में देखा गया है कि सरदारों के फैसले से बड़ी बाजार, पीलीकोठी, छित्तनपुरा, पठानीटोला, सरैया, जलालीपुरा, बजरडीहा, मदनपुरा, रेवड़ी तालाब, कोटवां और लोहता आदि के बुनकर प्रभावित होते रहे।
बुनकर बिरादराना तंजीम चौदहों के सरदार मकबूल हसन की मानें तो मतदान से पहले रात में फैसला लेने का मकसद दबाव से बचने और बुनकरों को एकजुट रहकर मतदान करने का संदेश देना है।
बुनकरों के वोटों की अपनी अहमियत
बकौल हसन, हालांकि कई बुनकर इलाकों में फैसले को तरजीह नहीं भी दी जाती है। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है।
लल्लापुरा के उम्रदराज बुनकर इदरीस अंसारी कहते हैं कि चुनाव में बुनकर वोटों की अपनी अहमियत है। रात में होने वाले फैसलों का ही असर था कि 2001 के विधानसभा चुनाव में शहर उत्तरी से अब्दुल कलाम ने भाजपा को हराने में कामयाबी हासिल की थी और लगातार तीन बार विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधत्व किया था।
1984 में कांग्रेस के श्यामलाल यादव भी बुनकरों के समर्थन से जीत कर संसद पहुंचे थे।
वाराणसी में इस बार त्रिकोणीय मुकाबला
इदरीस स्वीकारते हैं कि बुनकरों के बंट जाने से नुकसान भी हुआ है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में वोट बंट जाने से शहर उत्तरी की सीट भाजपा की झोली में चली गई।
इस बार चुनाव मैदान में भाजपा के नरेंद्र मोदी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के अजय राय के बीच मुकाबला है।
ऐसे में बुनकर किस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे, यह सरदारों ने मीटिंग कर तय करना शुरू कर दिया है। लेकिन किसके पक्ष में मतदान होगा, इसका पत्ता मतदान के एक दिन पहले रात में ही खुलेगा।
क्या है काशी की बुनकर बिरादराना तंजीम
बुनकर बहुल कई मुहल्लों को मिला कर तंजीम बनती हैं। इनमें बुनकर बिरादराना तंजीम पांचों, बारहों, चौदहों, बाइसी और बावनी प्रमुख हैं।
इनके नाम इनके मुहल्लों की संख्या के अनुसार होते हैं।
तंजीमों के मुहल्लावार सरदार होते हैं और इन सरदारों पर तंजीम का एक सरदार होता है, जिसका निर्देश सभी मुहल्ला सरदार मानते हैं।