कौन होगा लोकसभा में नेता विपक्ष?
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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पद का फैसला अगले चार दिनों में हो सकता है। इस आशय का आश्वासन देने के साथ ही लोकसभा स्पीकर ने कहा है कि वह इस संबंध में नियमों का अध्ययन करने के साथ ही हाल ही में भेजी गई अटार्नी जनरल की राय का भी अध्ययन कर रही हैं।
हालांकि पूर्व में इस पद के लिए जरूरी 10 फीसदी सीटों के अभाव में नेता प्रतिपक्ष का पद रिक्त होने की बात कह कर स्पीकर ने साफ संकेत दिया है कि इस मामले में कांग्रेस को निराशा हाथ लगेगी। नई लोकसभा के गठन के बाद से ही नेता प्रतिपक्ष के सवाल पर विवाद जारी है।a
'नियमों के आधार पर लूंगी फैंसला'
कांग्रेस का कहना है कि संविधान में कहीं भी इस पद के लिए 10 फीसदी सीट को अनिवार्य बनाए जाने का प्रावधान नहीं किया गया है। जबकि भाजपा पहली से चौथी लोकसभा और वर्ष 1980 व 1984 में विपक्ष के किसी भी दल के पास 10 फीसदी सीटें न रहने के कारण इस पद को रिक्त रखे जाने का हवाला दे रही है।
इस मामले में लोकसभा स्पीकर ने कहा, ‘मैं सभी नियमों और अटार्नी जनरल के पत्र का भी अध्ययन करूंगी। मुझे देखना होगा कि उनमें क्या है और क्या नहीं। लोकसभा अध्यक्ष कुछ नहीं कर सकता। मुझे नियमों के अनुसार चलना होगा।’
भाजपा और सरकार की ओर से इस बार भी किसी को नेता प्रतिपक्ष नहीं बनाए जाने के दिए जा रहे संदेशों के बीच अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने राय दी थी कि कांग्रेस इसकी पात्रता नहीं रखती और पहली लोकसभा के बाद से ऐसी पार्टी को यह पद देने का कोई उदाहरण नहीं मिलता, जिसके पास न्यूनतम सांसदों की संख्या नहीं हो।