आखिर किसने लीक किया था रेल बजट?
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मीडिया में रेल बजट के लीक होने पर राज्यसभा में मचे संग्राम के बाद सभापति हामिद अंसारी ने सरकार से इस मामले में सरकारी गोपनीयता के उल्लंघन का पता लगाने के लिए कहा है।
हालांकि उन्होंने इस मामले पर विशेषाधिकार हनन संबंधी नोटिस को खारिज कर दिया है। इस संदर्भ में कांग्रेस नेता मधुसूदन मिस्त्री, हनुमंत राव, शांताराम नाइक और रजनी पाटिल समेत छह सदस्यों ने विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था।
रेल बजट पेश होने वाले दिन भी सदस्यों ने इस मामले को सदन में उठाया था। सभापति ने कहा कि सदस्यों के नोटिस पर जांच पिछले उदाहरणों, रिकार्ड और मामलों के आधार पर की गई है।
यह पाया गया कि रेल बजट में शामिल कई प्रस्ताव 8 जुलाई को यानी रेल बजट पेश होने वाले दिन एक अखबार में रिपोर्ट किए गए थे। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रेल मंत्री के बजट भाषण के अंश को भी मीडिया ने पहले ही रिपोर्ट कर दिया था।
यदि सरकारी गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन किया गया है तो सरकार को इस ओर देखना चाहिए। अंसारी ने कहा कि हालांकि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं। इसलिए बजट प्रस्ताव के लीक होने को विशेषाधिकार हनन में नहीं रख सकते हैं।
विरोधी दलों का हंगामा, सरकार से कार्रवाई की मांग
सभापति की इस बात पर विरोधी दलों ने जमकर हंगामा किया। उन्होंने सरकार से इस मामले पर कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने इसे गंभीर मसला बताते हुए इस मामले में सरकार से कार्रवाई करने को कहा। सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि दस्तावेज की गोपनीयता से समझौता करना गंभीर मामला है। इस पर सरकार को कोई निर्देश देना चाहिए।
सदन में भारी हंगामे को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि ऐसे मामलों पर पहले क्या किया गया है, सरकार इससे प्रेरणा लेते हुए मामले पर कार्रवाई करेगी। सरकार सदन का सम्मान करती है और सभापति की ओर से आए सुझाव और निर्देशों का पालन किया जाएगा और उसी आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
लेट होने पर गौड़ा और सिन्हा ने मांगी माफी
लोकसभा में शुक्रवार को रेल बजट पर चर्चा के दौरान देरी से पहुंचने को लेकर रेल मंत्री सदानंद गौड़ा और राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को माफी मांगनी पड़ी।
दोपहर दो बजे रेल बजट पर चर्चा की शुरुआत करने के लिए जब कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी खडे़ हुए उस वक्त सदन में न तो रेल मंत्री और न ही उनके सहायक मौजूद थे।
चौधरी के समर्थन में तृणमूल कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के सदस्य भी खड़े हो गए। पीठासीन अधिकारी के वी थॉमस ने कहा कि सदन में दो मंत्री (संतोष गंगवार और अनंत गीते) मौजूद हैं और चर्चा के महत्वपूर्ण बिंदुओं को लिख रहे हैं, लेकिन वे लोग नहीं माने।
सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आपत्ति जताते हुए कहा कि रेल बजट पर चर्चा की शुरुआत पूर्व रेल मंत्री कर रहे हैं, लेकिन सदन में रेल मंत्री मौजूद नहीं हैं। यह बहुत ही आपत्तिजनक और हास्यास्पद है। इसी हंगामे के बीच पहले रेल राज्य मंत्री और फिर रेल मंत्री पहुंच गए और उन्होंने देर से पहुंचने के लिए सदस्यों से माफी मांगी।