काम का दिखावा करने वालों को मिलता है प्रमोशन, जानिए क्यों?
सप्ताह में 80 घंटे काम के बोझ का दावा करने वाले एक तिहाई पुरुष सही मायनों में दफ्तर के लिए महज 50-60 घंटे ही काम करते हैं लेकिन फिर भी उन्हें प्रमोशन मिल जाता है।
अमेरिका में विश्व स्तरीय 82 फर्मों में हुए अध्ययन में पाया गया कि दफ्तर में के पुरुष कर्मचारी आमतौर पर अपने मित्रों और परिजनों से मिलने के लिए चतुराई वाली रणनीति अपनाते हैं।
शोधकर्ताओं के दावा किया कि महिलाएं भी आगे बढ़ने के लिए दफ्तर में इसी तकनीक को अपनाती हैं। बोस्टन यूनिवर्सिटी में ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर की सहायक प्रोफेसर एरिन रीड ने अमेरिका की सबसे शक्तिशाली फर्मों में ऐसे कर्मचारियों के व्यवहार का अध्ययन किया और पाया कि 31 फीसदी लोग समय खत्म होने के बावजूद फर्म के समर्पित कार्यकर्ताओं जैसा दिखावा करते हैं।
बोनस और प्रमोशन पाने में सफल
‘श्रेष्ठ कर्मचारियों’ का यह समूह सुदूर यात्रा की जरूरत कम बताते हुए स्थानीय क्लाइंटों के साथ बैठक करने की योजना बनाता है। दफ्तर में अपने काम को असली स्वरूप देने के लिए ऐसे कर्मचारी अपना ई-मेल अपडेट रखते हैं और उस पर हर वक्त ऑललाइन बने रहते हैं।
एक कंसल्टेंट ने कहा कि-‘‘हमारे ई-मेल प्रोग्राम में आप देख सकते हैं कि वास्तव में कौन ऑनलाइन है और कौन नहीं।’’ इस तरह से ये लोग खुद को काम में बहुत व्यस्त बताते हुए बोनस और प्रमोशन पाने में सफल हो जाते हैं।
इस तरह करते हैं काम का दिखावा
लोकल मीटिंग- यात्रा का समय बचाने के लिए लोकल ग्राहकों से मीटिंग तय करना।
खुद के बदले दूसरों को भेजना - कर्मचारी आपस में एक दूसरे से मिलकर ग्राहक से मिलने के लिए खुद के बदले दूसरे को भेजना।
ग्राहक की जरूरत की समझ- कंपनी के ग्राहकों की जरूरतों की अच्छी तरह समझते हैं।
हर समय उपलब्ध-चौबीस घंटे फोन पर संपर्क के लिए तैयार, हमेशा मेल पर ऑनलाइन रहते हैं ताकि लगे कि काम व्यस्त में व्यस्त हैं।
लैंगिक भेदभाव से जल्दी खत्म होता है महिलाओं का कैरियर
लैंगिक भेदभाव और बढ़ती उम्र में होने वाले अनुचित व्यवहार के कारण महिलाओं का कैरियर 45 वर्ष की उम्र आने तक समाप्त हो जाता है। यूके सरकार की ओर से कराए अध्ययन में यह बात सामने आई है।
अध्ययन में पाया गया कि फर्में प्रौढ़ महिलाओं को प्रमोशन, प्रशिक्षण और भर्ती करने से परहेज करती हैं। पुरुषों को भी बढ़ती उम्र में भेदभाव का सामना करना पड़ता है लेकिन उनका कैरियर महिलाओं की तुलना में करीब एक दशक बाद 55 साल की उम्र तक खत्म होता है।
शोधकर्ता डॉ. अल्टमैन का कहना है कि कई नियोक्ताओं की यह गलत धारणा होती है कि जो स्टाफ अधिक बुजुर्ग है वह नई तकनीक नहीं सीख सकता है, और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया जा सकता है।