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मोदी और केजरीवाल को किसने दे दी नसीहत!

Tue, 11 Mar 2014 09:14 AM IST
Updated Tue, 11 Mar 2014 09:14 AM IST
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Who gave advise to Modi and Kejriwal

सीट बंटवारे को लेकर भाजपा में हो रहे भीतरी घमासान में पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता कूद पड़े हैं। उन्होंने मोदी, केजरीवाल को नसीहत दी और कांग्रेस को लताड़ा है। ये हैं जसवंत सिंह। परोक्ष रूप से आम आदमी पार्टी के साथ ही भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को नसीहत दी है।

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उन्होंने कहा कि देश में अतिवाद की राजनीति को ज्यादातर लोग पसंद नहीं करते हैं और हमेशा ही मध्य मार्ग को सराहा जाता रहा है। 15वीं लोकसभा में दार्जिलिंग का प्रतिनिधित्व करने जसवंत सिंह को भाजपा में मध्यमार्गी नेता माना जाता है। उन्होंने यह नसीहत देकर वास्तव में पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी की तरह मोदी की परेशानी ही बढ़ाई है।
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सिंह ने कांग्रेस व भाजपा का बगैर नाम लिए कहा कि देश के प्रमुख राजनीतिक दलों को आत्म विश्लेषण की जरूरत है कि आखिरकार आम आदमी पार्टी जैसे दल ने राजनीति में अपनी जगह कैसे बनाई है।
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'देश की राजनीति का खालीपन'

Who gave advise to Modi and Kejriwal

जसवंत सिंह ने कहा कि राजनीति में ऐसा क्या खालीपन है, जिसे आप पार्टी भर रही है? उन्होंने लीला फाउंडेशन को लिखे एक आलेख में कहा कि यदि आप पार्टी अपने मिशन में नाकाम भी रहती है, तो भी उनके उठाए सवाल जिंदा रहेंगे।

उन्होंने वर्तमान हालात का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय राजनीति में इस विकल्प की संभावना हमेशा बनी रहेगी। भाजपा नेता ने कहा कि आज देश में कांग्रेस अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है, जबकि भाजपा प्रमुख आवाज बनने के प्रयास में है।

अतिवाद की राजनीति के बारे में इंदिरा गांधी व इमरजेंसी का उदाहरण देकर कहा कि तब किस तरह लोगों ने अतिवाद की राजनीति को नकार दिया था। उन्होंने कहा कि भारत का स्वाभाव ही उदार और समायोजन राजनीति का रहा है।

'आजादी के बाद भी शांति नहीं है देश में'

Who gave advise to Modi and Kejriwal

आजादी के समय देश के बंटवारे का जिक्र कर सिंह ने कहा कि 1947 में सोचा गया था कि अब समस्याएं खत्म हो जाएंगी व शांति कायम हो जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं, तब से दक्षिणी एशिया अशांत ही है।

सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में लाहौर बस यात्रा शांति कायम करने का एक प्रयास था। भाजपा जैसे दल के लिए इस कार्य को एक व्यक्ति के प्रयास तक छोड़ना उचित नहीं है।

इस मामले में पूरी पार्टी के स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है अन्यथा परिणाम निराशाजनक हो सकते हैं।

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