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आखिर किसकी ‘टोपी’ पहनेगी जनता?

Sat, 11 Jan 2014 06:55 PM IST
Updated Sat, 11 Jan 2014 06:55 PM IST
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Who, after all, the

इसे मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के राजनीति के मैदान में आते ही छा जाने का जादू कहें या उनकी प्रचार के दौरान दी गई इस खुली चुनौती का असर कि, ‘भाजपा व कांग्रेस को राजनीति तो हम सिखाएंगे। लेकिन यह साफ है कि भाजपा ने आप स्टाइल टोपी पहनकर अब उसे सबसे बड़ी चुनौती मान लिया है।’

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ऐसा नहीं है कि आप स्टाइल में टोपी लगाकर ही भाजपा ने उसकी राह पर चलने की शुरुआत की है, इससे पहले भी वह कई बार आप के पीछे चल चुकी है। राजनीति के जानकारों के अनुसार अब अरविंद से ही राजनैतिक दलों का एजेंडा तय होने लगा है।
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आम आदमी का पोस्टर अभियान

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लगभग दस माह पूर्व आम आदमी पार्टी के संयोजक व मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के ऑटो को पोस्टर के जरिए प्रचार का अपना बड़ा माध्यम बनाया था। कुछ ही समय बाद ऑटो के पीछे पोस्टरों के माध्यम से भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विजय गोयल ने पार्टी का प्रचार शुरू कर दिया।

इसके बाद भ्रष्टाचार को ‘आप’ का सबसे बड़ा मुद्दा बनाने पर ईमानदार छवि के डॉ. हर्षवर्धन को केजरीवाल के सामने भाजपा का सीएम प्रोजेक्ट किया गया। आप के दस रुपये में सदस्यता अभियान चलाने के बाद भाजपा ने एक वोट एक नोट का नारा देकर इससे मिलता जुलता अभियान चलाया। झुग्गी झोपड़ी में आप की पैठ बढ़ने पर भाजपा नेताओं ने भी वहां का रुख किया। आप के चुनाव मैनेजमेंट में सोशल मीडिया व एसएमएस के जरिये प्रचार को भी भाजपा ने बड़े स्तर पर अपनाया था।

राजघाट पर ‌छिड़ी जंग, पहले कौन?

किसी भी आंदोलन से पहले अन्ना व आप नेताओं के राजघाट जाने के बाद आज भाजपा भी राजघाट पर बैठी। हालांकि बिजली के दाम घटाने का मुद्दा सबसे पहले बनाने पर भाजपा व आप दोनों अपने-अपने दावे करते हैं। दरअसल, भाजपा सूत्रों के अनुसार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने आम आदमी पार्टी को गंभीरता से लेने की हिदायत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी हुई थी, जोकि अब सार्वजनिक हो चुकी है।

मोदी को प्रधानमंत्री बनाने में कोई अड़चन न आए इसके लिए भाजपा ने भी अब आप को बड़ी चुनौती मान लिया है। इसी कड़ी में अब मीडिया व दलों के हमले की परवाह किए बिना आप की सबसे बड़ी नकल करते हुए मैं आम आदमी हूं की टोपी की तर्ज पर भगवा टोपी पहन ली। राजघाट पर भाजपा के नेताओं के सिर पर इस टोपी को देखकर मीडिया व अन्य लोग आज भौंचक्के रह गए।

ऐसे में आगामी लोकसभा चुनाव में जनता किसकी टोपी पहनती है या कौन जनता को अपनी टोपी पहनाने में कामयाब होता है यह देखना होगा। लेकिन राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा है कि आप को अपनी योजनाओं में अब और अधिक गोपनीयता बरतनी होगी, क्योंकि दिल्ली भाजपा ही नहीं अन्य राज्यों में भी कई दल इसकी राह पर चल चुके हैं।

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