{"_id":"996a7792-646d-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"whistle-blower-sanjiv-kumar-also-awarded-10-years-in-jail-in-jtb-teachers-scam","type":"story","status":"publish","title_hn":"संजीव ने ही किया खुलासा, फिर भी पाई 10 साल की सजा ","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
संजीव ने ही किया खुलासा, फिर भी पाई 10 साल की सजा
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Tue, 22 Jan 2013 02:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा के बहुचर्चित जूनियर शिक्षक भर्ती घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत ने इनेलो मुखिया ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला के अलावा प्राथमिक शिक्षा के पूर्व निदेशक संजीव कुमार, चौटाला के पूर्व ओएसडी विद्याधर और इनेलो के मौजूद विधायक शेर सिंह बादशामी को भी 10 साल की सजा सुनाई है। इस ममाले में 4 अन्य दोषियों का भी 10 साल की सजा सुनाई गई है।
विज्ञापन
दिलचस्प बात यह है कि पूर्व आईएएस अधिकारी संजीव कुमार ही वह व्हिसिल ब्लोवर हैं, जिन्होंने इस मामले का खुलासा किया था। लेकिन कोर्ट ने उन्हें भी घोटाले में दोषी पाया और 10 साल की सजा सुनाई।
विज्ञापन
दरअसल चौटाला ने घोटाले को अंजाम देने के लिए ही 1985 बैच के आईएएस अधिकारी संजीव कुमार को शिक्षा विभाग का निदेशक बनाया था। चौटाला ने घोटाले के लिए ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पद से दो आईएएस के ट्रांसफर कर दिए थे। आईएएस अफसर आरपी चंद्रशेखर (तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक) ने अप्रैल 2000 में योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी करने का प्रस्ताव दिया था, जिसके अगले ही दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
विज्ञापन
इसके बाद 1986 बैच की आईएसएस अधिकारी रजनी शेखर सिब्बल शिक्षा विभाग की निदेशक बनाया गया। जब उन्होंने इस नियुक्तियों की सूची में बदलाव करने से इनकार कर दिया तो उनका भी ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 1985 बैच के अधिकारी संजीव कुमार को शिक्षा विभाग का निदेशक बनाया गया। इन पर आरोप लगा कि इनकी निगरानी में ही भर्ती की सारी कार्रवाई को अंजाम दिया गया। सीबीआई अदालत ने उन्हें मामले में दोषी करार दिया।
अपने उम्मीदवारों को भी भर्ती करवाना चाहते थे संजीव
संजीव कुमार पर आरोप लगा कि प्रदेश में परीक्षा के बाद योग्य उम्मीदवारों की जो सूची बनी उनमें अन्य आरोपियों के अलावा संजीव कुमार के उम्मीदवार भी थे। परीक्षा के बाद जब नतीजे घोषित करने की बारी आई तो अजय चौटाला व शेर सिंह बडशामी ने संजीव कुमार को धमकाते हुए उनके उम्मीदवारों के नाम सूची से काटकर नई सूची बनाई और नतीजे घोषित करने के लिए कहा। यहीं से पूरे भर्ती घोटाले का खुलासा होना शुरू हो गया।
अपने आप को ठगा महसूस होने पर संजीव कुमार 2003 में सुप्रीम कोर्ट गए। उन्होंने याचिका दायर करके योग्य व अयोग्य उम्मीदवारों की दो सूचियां पेश कीं। सूत्रों का यह भी कहना है कि जब मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी तो संजीव कुमार के कार्यालय में आग लग गई और उसमें उम्मीदवारों की सूची सहित जेबीटी भर्ती का काफी रिकार्ड जल गया।
याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक यूनिट ने इस मामले में प्राथमिक जांच के बाद 2004 में केस दर्ज किया था। हालांकि, संजीव कुमार पूरे मामले का खुलासा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए थे, लेकिन सीबीआई की जांच में वह भी दोषी पाए गए। उम्मीदवारों की सूचियों का घालमेल उनके दस्तखतों के बाद ही हो सका था।
संजीव को दोषी ठहराकर जज भी हो गए थे दुख्री
आईएएस अफसर संजीव कुमार को दोषी ठहराकर सीबीआई के विशेष जज भी दुखी हो गए थे। विशेष जज विनोद कुमार ने अपने फैसले में कहा था ‘मैं आपको अपनी अंतरआत्मा से माफ करता हूं।’ संजीव कुमार ने अदालत द्वारा खुद को दोषी ठहराए जाने के बाद जज से कहा था कि न्याय व्यवस्था के प्रति मेरा विश्वास बुरी तरह हिल चुका है और मैं खुद को संभाल नहीं पा रहा हूं।
उन्होंने न्यायाधीश से कहा कि खुद के दोषी पाए जाने के बाद उन्हें लग रहा कि उनसे बड़ी गलती हो गई। उन्होंने कहा, ‘मैं उन सभी लोगों से जाकर माफी मांगना चाहता हूं जो इस मामले में दोषी करार दिए गए।’ उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि ‘मैंने ही इस पूरे मामले को उजागर किया और आज मैं ही दोषी हूं।’
उन्होंने कहा था कि ‘मैं तिहाड़ के जेल नंबर पांच में जाना चाहता हूं, जहां अन्य दोषियों को रखा गया है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि न तो आपने कोई अपराध किया और न मैंने कोई गलती। इसके बावजूद मेरे कारण सब सलाखों के पीछे हैं।’
अपनी भावुकता पर काबू पाने के बाद उन्होंने जज से दी जाने वाली सजा में रियायत बरतने की मांग की और कहा कि यदि उन्हें जेल भेजा गया तो इससे उनके बच्चों का बड़ा नुकसान होगा और साथ ही उनके करियर को भी धक्का पहुंचेगा।
उन्होंने कहा, ‘कल जब आप फैसला सुना रहे थे तब आप वह व्यक्ति नहीं थे जिसे मैंने सुनवाई के दौरान देखा था।’
इस पर न्यायाधीश ने कहा कि वह भी इंसान हैं और उनसे भी गलती हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले को ऊपरी अदालत के न्यायाधीश हो सकता है कि अलग नजरिये से देखें और कुमार को वहां राहत मिल जाए।