आखिर कहां से होती है इस्लामिक स्टेट को हथियारों की सप्लाई?
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हाल ही में आए एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन जिन हथियारों का इस्तेमाल करता है उसका निर्माण दुनिया के करीब 21 देशों में हुआ है। इनमें चीन, अमेरिका और रूस के नाम भी शामिल हैं। युद्ध के दौरान आतंकियों के पास से बरामद हुए हथियारों की जांच करने से इस बात का पता चला की इनका निर्माण किन किन देशों में हुआ है।
कंफ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च की यह रिपोर्ट पिछले महीने की 6 तारीख को जारी की गई थी जो इस बात की ओर इशारा कर रही थी कि इस्लामिक स्टेट ने अपनी नई फौज को इराक और सीरिया तबाही मचाने के लिए जो हथियार मुहैया कराया है उसका निर्माण दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में होता है। इतना ही नहीं इसमें कुछ नए नवेले देशों का नाम भी शामिल है जिनमें सूडान प्रमुख है।
फ्रांस की राजधानी पेरिस में हुए आंतकी हमले और उसमें करीब 129 लोगों की मौत के बाद ओबामा ने ऐसे संगठनों से सख्ती से निपटने की बात कही थी लेकिन इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद उनकी यह बातें महज एक झूठा आश्वासन ही नजर आता है। सामने आने के बाद उनका यह बयान महज एक भ्रामक टिप्पणी के अलावा और कुछ नहीं जान पड़ता।
ज्यादातर यूरोपीय देश
रिपोर्ट के मुताबिक इन हथियारों को खरीदने के लिए इनके पास पैसा कहां से आता है इस सवाल के जवाब में खुफिया एजेंसियों का कहना है कि आईएस के आय का मुख्य श्रोत तेल की ब्रिक्री है। तेल बेचने से इनके पास जो पैसा आता है वह इतना ज्यादा होता है कि इनको हथियार खरीदने के लिए उसकी कमी महसूस नहीं होती। इतना ही नहीं हथियार बनाने वाली कंपनी और इसके डीलर लगातार ऐसे संगठनों से लाभ कमाने के लिए संपर्क में रहते हैं।
बरामद किए गए हथियारों से यह भी पता चला है कि इनमें से अधिकतर हथियारों का निर्माण अमेरिका के मिसोरी में स्थित एक हथियारों का निर्माण करने वाले एक प्लांट में हुआ है। इसके अलावा दुनिया के अन्य देशों में बने हथियारों के बारे में छानबीन के दौरान पता चला।
लंदन में स्थित इस रिसर्च एजेंसी ने हथियारों की छानबीन के लिए एक विशेषज्ञों की टीम उत्तरी सीरिया और उत्तरी ईराक के इलाकों में भेजी थी। इस टीम ने करीब 1700 से ज्यादा कारतूस बरामद किए और उनका परीक्षण किया जिससे यह पता चला की इन कारतूसों में से ज्यादातर का निर्माण यूरोपीय देशों में ही हुआ है। इसके बाद कुछ अन्य कारतूसों का निर्माण रूस और चीन में भी हुआ है।