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EXCLUSIVE: देखिए जशोदाबेन का स्कूल और घर

Sat, 12 Apr 2014 07:49 AM IST
अंकुर जैन/अहमदाबाद से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
अंकुर जैन/अहमदाबाद से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए Updated Sat, 12 Apr 2014 07:49 AM IST
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where does jashodaben live after sepration of modi?

पहली बार मोदी ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार कर लिया है कि जशोदाबेन उनकी पत्नी हैं। मोदी अभी तक पत्नी के बारे में जानकारी देने वाले कॉलम को खाली छोड़ देते थे।

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कांग्रेस ने इस मुद्दे पर उनके ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है। वहीं जशोदाबेन के घर वाले इस ख़बर को लेकर उत्साहित भी है और चिंतित भी।

जशोदाबेन के घर वाले कहते हैं कि बरसों की भक्ति रंग लाई है और मोदी ने आख़िरकार उनको पत्नी का दर्जा दे दिया। जब जशोदाबेन 15 साल की थीं और मोदी 17 साल के थे, तब गुजरात के उंझा के नज़दीक ब्रह्मवाड़ा गांव में उनका विवाह हुआ था।

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यशोदाबेन की सुरक्षा को लेकर चिंता

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परिवार वाले कहते हैं मोदी की बारात दो दिनों तक गाव में रुकी थी और शादी रीति रिवाज़ों के मुताबिक हुई थी। पर शादी के तीन साल के बाद दोनों अलग हो गए। इन दिनों जशोदाबेन एक रिटायर्ड स्कूल टीचर की ज़िन्दगी बसर कर रही हैं और उंझा में अपने छोटे भाई अशोक के साथ रहती हैं।

अशोक भाई ने बताया, "वे इन दिनों चार धाम की यात्रा पर गई हैं। उनका अधिकतर समय पूजा-पाठ में गुज़रता है। जशोदाबेन अपने विवाहित जीवन के बारे में किसी से बात नहीं करतीं। अब जब नरेंद्र मोदी ने उन्हें अपनी पत्नी माना है तो मैं उनको अपना 'बनेवी' (जीजाजी) कह सकता हूँ।"

वो कहते हैं, "मुझे लगता है कि ये जशोदाबेन की भक्ति ही है कि आज तकरीबन 50 साल बाद ये हुआ।"

अशोक भाई उंझा में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं और वे दस साल के थे जब मोदी और उनकी बहन की शादी हुई थी। वो कहते हैं, "मैं और परिवार में सभी लोग चाहते हैं कि मोदी प्रधानमंत्री बने पर मैं जशोदाबेन की सुरक्षा को लेकर चिंतित हूँ।"

भाई एक फैक्ट्री में मजदूर हैं

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जशोदाबेन के छोटे भाई कमलेश मोदी मानते हैं कि उनकी बहन को औपचारिक रूप से पत्नी के तौर पर नरेंद्र मोदी के स्वीकार कर लेने के बाद वह बहुत खुश होंगी। कमलेश भाई कहते हैं, "जशोदाबेन नरेंद्र मोदी के बारे में अख़बार में और न्यूज़ चैनल पर रोज़ खबरें देखा करती हैं।"

कमलेश बताते हैं, "कितनी बार हम उसे कहते कि क्यों देखती हो पर वह हमें चुप करा देती। आज जब मोदी ने उन्हें अपनी पत्नी माना है तो हम बहुत ख़ुश हैं। मेरी उनसे इस बारे में बात नहीं हुई है पर मैं मानता हूँ कि वे भी बहुत ख़ुश होंगी।" कमलेश भाई उंझा से नज़दीक एक इसबगोल फैक्ट्री में मज़दूर हैं।

उन्होंने कहा, "हमें मोदी के प्रति हमेशा से गौरव रहा है कि हमारे यहाँ का कोई आज प्रधानमंत्री बनने जा रहा है।" जब उनसे पूछा गया कि वे किसे वोट देते हैं तो कमलेश भाई ने कहा, "मैं किसी को नहीं बताता।"

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'गृह त्याग किया'

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नरेंद्र मोदी का परिवार भी उनके बचाव में आगे आ गया है। नरेंद्र मोदी के भाई सोमा भाई दामोदर दास मोदी का कहना है कि 40-50 साल पहले की घटना का मूल्यांकन मोदी की आज की प्रतिष्ठा के आधार पर करना सही नहीं है।

वे कहते हैं, "मोदी ने सांसारिक भोग विलास को छोड़कर गृह त्याग कर रखा है। परिवर की करबद्ध प्रार्थना है कि मोदी की आज से बचपन की 40-50 साल पहले की घटना का आज की उनकी प्रतिष्ठा के आधार पर मूल्यांकन न किया जाए। 40-50 साल परिवार बहुत ही ग़रीब था और हम लोग रुढ़िवादी बंधनों में चलने वाले परिवार की संतान हैं।"

सोमा भाई दामोदार दास मोदी आगे कहते हैं, "परिवार में शिक्षा नाम मात्र की थी। हमारे माता-पिता ने छोटी उम्र में हमारे भाई का विवाह करवाया। उनके लिए देश सेवा एकमात्र धर्म था। सांसारिक भोगविलास को छोड़कर गृह त्याग कर दिया। आज 45-50 साल बाद भी नरेंद्र भाई परिवार से अलिप्त हैं।"

'कोई मलाल नहीं'

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जशोदाबेन के बारे में सोमा भाई ने बताया कि उन्होंने अपने पिता के घर रहकर टीचर का काम करके अपनी जिंदगी गुज़ारी है। उधर पेंशन में ज़िन्दगी बसर कर रही जशोदाबेन ने कभी मोदी या अपनी शादी को लेकर कोई मलाल व्यक्त नहीं किया।

जशोदाबेन के परिवार वाले कहते हैं कि जब भी कोई मोदी के बारे में कुछ आपत्तिजनक बोलता था वह उसे चुप करा देती थीं।

मोदी से अलग होने के बाद जशोदाबेन ने धोलका से अपनी पढाई पूरी की और सरकारी स्कूल में टीचर की नौकरी से 2009-10 में सेवानिवृत हुई। अब वे अपना सारा वक़्त भगवान की भक्ति में बिताती हैं।

घर वाले कहते हैं कि जशोदाबेन स्कूल के बच्चों में लोकप्रिय थीं। उनके मन में मोदी के लिए कभी कोई दुर्भावना नहीं आई क्योंकि घर के बुज़ुर्ग कहते थे कि नरेंद्र मोदी को कभी शादी नहीं करनी थी पर उनके पिताजी ने उनकी शादी करवा दी।

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