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विकलांगों के लिए जहां कैंप ‘लगा’, वह गांव ही नहीं
बुलंदशहर/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Oct 2012 01:08 AM IST
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विकलांगों को ट्राइसाइकिल और अन्य सामान वितरित करने के लिए कैंपों के आयोजन को लेकर अब नए खुलासे हो रहे हैं। रिकार्ड में जिन गांवों में लुईस खुर्शीद के डा. जाकिर हुसैन मेमोरियल विकलांग कल्याण ट्रस्ट की ओर से कैंप लगाने का जिक्र है, उन गांवों का नाम ही गलत है।
ट्राइसाइकिल दिए जाने वाले पात्र ही नहीं, मुहर-हस्ताक्षर सब कुछ फर्जी बताए जा रहे हैं। 2 अप्रैल, 2010 को बुरहानपुर में कथित विकलांग कल्याण कैंप के बारे में विकलांग कल्याण विभाग ने रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनपद में बुरहानपुर नाम का कोई गांव ही नहीं है।
बुरहानपुर खुर्द है, जिसमें कभी कैंप नहीं लगाया गया। इसकी सत्यापन रिपोर्ट पर जिला विकलांग कल्याण अधिकारी और सीएमओ के हस्ताक्षर मुहर फर्जी हैं। इस रिपोर्ट में जिन 42 विकलांगों को पात्र दर्शाया गया है, उनको कभी कोई सहायता ही नहीं मिली है।
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जहांगीराबाद में विकलांग कैंप में ट्रस्ट ने ऊंचागांव निवासी गजराज सिंह को 16 अगस्त 2011 को उपकरण दिया जबकि उनकी मौत 2009 में हो गई थी। दरअसल, 2007 में जहांगीराबाद में कैंप लगा था। ट्रस्ट ने वही पुरानी पात्र सूची दोहरा दी और मृतक गजराज सिंह को उपकरण देना दर्शा दिया।
ऐसा ही बुगरासी क्षेत्र के गांव बरहाना में दिखाया गया। यहां मुन्नी, कुमारी फहीम और प्रीति पुत्री राजेश गोस्वामी को भी ऊंचागांव कैंप में उपकरण दिया जाना दिखाया गया था। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंप से संबंधित रिकार्ड में अस्पताल के नाम के साथ ही एनजीओ की रिपोर्ट पर चिकित्साधिकारी की मुहर भी फर्जी है।
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ट्राइसाइकिल दिए जाने वाले पात्र ही नहीं, मुहर-हस्ताक्षर सब कुछ फर्जी बताए जा रहे हैं। 2 अप्रैल, 2010 को बुरहानपुर में कथित विकलांग कल्याण कैंप के बारे में विकलांग कल्याण विभाग ने रिपोर्ट दे दी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनपद में बुरहानपुर नाम का कोई गांव ही नहीं है।
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बुरहानपुर खुर्द है, जिसमें कभी कैंप नहीं लगाया गया। इसकी सत्यापन रिपोर्ट पर जिला विकलांग कल्याण अधिकारी और सीएमओ के हस्ताक्षर मुहर फर्जी हैं। इस रिपोर्ट में जिन 42 विकलांगों को पात्र दर्शाया गया है, उनको कभी कोई सहायता ही नहीं मिली है।
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जहांगीराबाद में विकलांग कैंप में ट्रस्ट ने ऊंचागांव निवासी गजराज सिंह को 16 अगस्त 2011 को उपकरण दिया जबकि उनकी मौत 2009 में हो गई थी। दरअसल, 2007 में जहांगीराबाद में कैंप लगा था। ट्रस्ट ने वही पुरानी पात्र सूची दोहरा दी और मृतक गजराज सिंह को उपकरण देना दर्शा दिया।
ऐसा ही बुगरासी क्षेत्र के गांव बरहाना में दिखाया गया। यहां मुन्नी, कुमारी फहीम और प्रीति पुत्री राजेश गोस्वामी को भी ऊंचागांव कैंप में उपकरण दिया जाना दिखाया गया था। जिला विकलांग कल्याण अधिकारी की रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंप से संबंधित रिकार्ड में अस्पताल के नाम के साथ ही एनजीओ की रिपोर्ट पर चिकित्साधिकारी की मुहर भी फर्जी है।