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शिवसेना का सवाल, गरीबों के अच्छे दिन कब आएंगे

Mon, 19 Jan 2015 04:36 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 19 Jan 2015 04:36 PM IST
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When will 'Acche Din' come for the poor, asks Shiv Sena.

पिछले सप्ताह मैकडोनॉल्ड के पुणे स्थित रेस्टोरेंट से एक गरीब बच्चे को भगाए जाने के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने मैकडोनाल्ड विवाद को लेकर महाराष्ट्र सरकार को कठघरे में खड़ा किया है।

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डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है है 'गरीबों के अच्छे दिन कब आएंगे?' शिवसेना ने लिखा है कि एक रेस्टोरेंट में गरीब बच्चे के भगाए जाने से देश में मौजूद गरीब और अमीर के बीच की खाई सामने आई है।
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सामना के संपादकीय में लिखे लेख के जरिए शिवसेना ने कहा है कि इस प्रकार की घटनाओं पर चर्चा जारी रहेगी लेकिन इन चर्चाओं मात्र से ही गरीबी दूर करना संभव नहीं है।
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इस लेख में आगे लिखा है कि उनकी पार्टी सडकों पर घूम रहे, फ्लाईओवर के नीचे खड़े, लाल बत्ती पर खड़े ऐसे बच्चों की तलाश करेगी। लेकिन इन बच्चों का क्या होगा? इसके अलावा भी इस लेख के जरिए कई बातें लिखी गई हैं।

गरीबों के अच्छे दिन कब आएंगे?

When will 'Acche Din' come for the poor, asks Shiv Sena.

देश में मौजूद गरीबी और लाचारी पर प्रहार करते हुए शिवसेना ने भाजपा के चुनावी नारे 'अच्छे दिन आएंगे' की ओर इशारा करते हुए पूछा है कि वास्तव में ऐसे लोगों के लिए अच्छे दिन कब तक आएंगे?

लेख में आगे लिखा है कि ऐसा कोई कानून नहीं है जिससे कि महंगे भोजनालयों में गरीब बच्चों को जाने से रोका जा सके। लेकिन ऐसे (मैकडोनाल्ड) भोजनालय गरीबों के लिए नहीं हैं। इन गरीबों को अपना पेट भरने के लिए क्यों भटकना पड़ता है? गरीबों को बड़ा पाव जैसी सस्ती चीजें खाकर क्यों भूख मिटाने को मजबूर होना पड़ रहा है?

पुणे रेस्टोरेंट के मामले में गरीब बच्चे के पास कुछ खरीदने के लिए पैसे नहीं थे, फिर भी यहां कुछ लोग ऐसे लोग मौजूद हैं हैं जो कुछ रुपये खर्च करके गरीब बच्चों के लिए खुशी खरीदते हैं।

लेकिन रेस्टोरेंट ने बच्चे को बाहर भगाकर ये साबित किया कि गरीबों के लिए उनके यहां जगह नहीं है। इतना नहीं इस प्रकार की लाचारी देश को दो भागों में बांटने का काम करती है।

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