काश! सलमान जैसा नसीब इनका भी होता
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सलमान खान को 13 साल बाद 5 साल की सजा हुई लेकिन 3 घंटे के अंदर ही जमानत भी मिल गई।
पूरे देश में लगभग 2.54 लाख ऐसे अण्डर ट्रायल लोग है जिन्हें जमानत नहीं मिल पा रही है। इनमें कई ऐसे लोग भी है जो निर्दोष हैं लेकिन इनके लिए जमानत मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगता है।
एक आंकलन के अनुसार पूरे देश की जेलों में बंद 3.81 लाख कैदियों में से 2.54 लाख कैदी विचाराधीन हैं। केवल 1.27 लाख कैदी ही अपनी सजा पूरी कर रहे हैं।
अपना बेल बॉंन्ड भरने को नहीं पैसा, इसलिए है जेल में
सरकार के अपने आंकलन के अनुसार इन विचाराधीन कैदियों में से कई तो ऐसे हैं जिन्हें अगर सजा हो तो वो अपनी सजा से भी ज्यादा का वक्त काट चुकें हैं।
कई विचाराधीन तो छोटी-छोटी चोरियों में बंद हैं क्योंकि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वे अपना बेल बॉंन्ड भर सकें, जिस वजह से उन्हें जेल में ही रहना पड़ रहा है।
कई ऐसे मामले भी हैं जिनमें विचाराधीन कैदी सालों साल जेल में रह जाते हैं लेकिन उनकी सुनवाई का नम्बर भी नहीं आता। कैदियों को लेकर कोई सेंट्रल डाटा बैंक नहीं है।
कैदियों को छोड़ने की हो चुकी है पहल
कैदियों को लेकर कोई सेंट्रल डाटा बैंक नहीं है। पिछले साल सितम्बर में सुप्रीम कोर्ट ने दिसम्बर 2014 तक सभी विचाराधीन कैदियों को छोड़ने की समय सीमा तय की थी, जो अपनी होनी वाली सजा से ज्यादा का वक्त विचाराधीन होकर काट दी है।]
कानून मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के समय सीमा तय करने के बाद कितने विचाराधीन कैदी छोड़े गए हैं, इसकी सूची अभी तक सरकार के पास नहीं है।
वहीं इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट से पहले गृह मंत्रालय भी एडवाइजरी जारी कर राज्यों और सभी 24 उच्च न्यायालयों से धारा 436 (ए) के लागू करने की बात कही थी। जिसके अंतर्गत उन कैदियों को छोड़ने का प्रावधान है जो अपने मामले के विचाराधीन रहने के दौरान ही आधे से ज्यादा की सजा पूरी कर लेते हैं।
समीक्षा पैनल होगा स्थापित
सरकार और कोर्ट ऐसी पहल पहली बार नहीं कर रहे हैं, लेकिन इससे पहले जारी किए गए आदेशों के अनुपालन में गंभीरता नहीं दिखाई गई है। गृह मंत्रालय देश भर के कैदियों का एक डाटा बैंक तैयार करने की पहल कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, सरकार ने भी राज्यों और सभी 24 हाईकोर्ट से एक समीक्षा पैनल स्थापित करने को कहा है। जो प्रत्येक तीन महीने पर विचाराधीन कैदियों की समीक्षा करेंगे। इस पैनल में प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला जज होंगे।