जब छोटी सी घटना से खुला करोड़ों का घोटाला
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शहर के एक्सईएन प्रथम के दफ्तर में हुई एक छोटी सी घटना बिजली विभाग का ऑनलाइन बिलिंग सर्वर हैक किए करोड़ों का घोटाला उजागर कर गई। 16 अक्टूबर 2014 की सुबह एक अनजान शख्स एक्सईएन के कम्प्यूटर में छेड़छाड़ करते पकड़ा गया था फिलहाल उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
लेकिन कम्प्यूटर में क्या छेड़छाड़ की, इसकी जांच शुरू हुई तो पूरे पूर्वांचल में सिस्टम हैक करके बकाया घटाने की जालसाजी का खुलासा हुआ।
एचसीएल का पूर्व कर्मचारी संदीप गुप्ता 16 अक्टूबर को शास्त्री चौक स्थित बिजली दफ्तर में एक्सईएन एके सिंह के कंप्यूटर पर छेड़छाड़ करते पकड़ा गया था। अगले दिन एक्सईएन ने एचसीएल के अफसरों से कम्प्यूटर में हुई छेड़छाड़ के बाबत जानकारी मांगी।
18 अक्टूबर को एचसीएल की ओर से छह बिलों में बकाया घटाने की रिपोर्ट दी गई। पता चला कि शहर के तीनों अधिशासी अभियंता के गलत हस्ताक्षर से अलग-अलग क्षेत्र के तीन फर्जी एसडीओ के नाम पर एचसीएल से आईडी जारी कराई गई है।
एसटीएफ की जांच में पता चला करोडों का घोटाला
इसी बीच पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम की तत्कालीन एमडी डॉ. काजल ने इसका संज्ञान लेते हुए बनारस में एफआईआर दर्ज कराई। छह बिलों में हुई छेड़छाड़ की जांच में लगी एसटीएफ को करोड़ों के घोटाले का पता चला।
पुलिस इसे संगठित गिरोह का काम मानकर इस जालसाजी में शामिल अन्य की तलाश में लगी हुई है। शुक्रवार को एसटीएफ लखनऊ से तीन लोगों को गिरफ्तार किया। जिन्हें पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच गोरखपुर लेकर आई है।
छुट्टी के दिन जारी हुई थी आईडी
शहर के तीनों डिविजन के एक्सईएन के फर्जी दस्तखत से तीन फर्जी एसडीओ की आईडी एचसीएल के डाटा सेंटर से जिस दिन जारी हुई उस रोज बकरीद की छुट्टी थी।
बड़ा सवाल यह भी है कि छुट्टी के दिन एचसीएल टेक्नॉलजी लिमिटेड ने बिना तय प्रक्रिया के आईडी जारी करने के लिए भेजी गई रिक्वेस्ट को मंजूर कैसे कर लिया। ऐसे में एचसीएल की भूमिका पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं।
बकाया उड़ाने की जगह करते थे फ्रिज
शहर में इन छह मामलों के खुलासे में एक लाख दस हजार रुपये का गोलमाल प्रकाश में आया था। जो अब एसटीएफ की जांच में करोड़ों के घोटाले के रूप में उजागर हुआ है।
ऐसे जारी होती है आईडी
नियम के मुताबिक एक्सईएन अधीक्षण अभियंता को किसी अभियंता के लिए आईडी और पासवर्ड जारी कराने के लिए अनुरोध भेजता है। यहां से यह अनुरोध एपीडीआरपी के नोडल अफसर को अग्रसारित किया जाता है। जो फिर इसे जांचकर एचसीएल को भेजता है। एचसीएल इसे लखनऊ स्थित डाटा सेंटर को भेजती है। लेकिन इस मामले में फर्जी ढंग से सीधे एचसीएल को रिक्वेस्ट भेज दी गई थी।
जांचा जाएगा तीन साल का रिकॉर्ड
ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम में सेंधमारी करके करोड़ों के राजस्व की चपत लगाने का खुलासा होने के बाद यूपी पावर कार्पोरेशन की ओर से तीन साल के दौरान हुए बिल संशोधन का रिकार्ड जांचने का निर्णय लिया गया है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि तीन साल का रिकॉर्ड खुला तो घोटाले की रकम से लेकर इसमें शामिल लोगों की संख्या भी चौंकाने वाली होगी। इस जांच से बिल संशोधन से जुड़े लिपिक समेत कई अभियंताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
यह बेहद गंभीर मामला है। पूरे प्रकरण पर यूपी पावर कॉर्पोरेशन लखनऊ कार्यालय से निगाह रखी जा रही है। अभी वहां से इस संबंध में कोई निर्देश नहीं मिला है, लेकिन सुनने में आया है कि विभिन्न कार्यालयों से बिल रिवीजन की डिटेल मंगाई जाएगी।
राकेश सिन्हा, प्रवक्ता, एमडी, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड