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...जब ‘बकवास’ शब्द पर ही छिड़ गई सरकार और विपक्ष में जंग

Thu, 14 May 2015 10:46 PM IST
Updated Thu, 14 May 2015 10:46 PM IST
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when member of upper house discuss about world 'bakwas'

राज्यसभा में बुधवार को ‘बकवास’ शब्द को लेकर जमकर बहस छिड़ गई। सरकार के मंत्रियों और विपक्ष के बीच इस पर तीखी नोंक झोंक तक की नौबत आ गई। ‘बकवास’ शब्द संसदीय है या असंसदीय, यह मसला वाद विवाद का विषय बन गया।

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पक्ष-विपक्ष की बहस के बाद सभा पीठ की ओर इसे असंसदीय शब्द ठहराया गया और सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया। दरअसल, ये विवाद तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन के बयान से शुरू हुआ।
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काले धन से संबंधित विधेयक को लेकर उन्होंने केंद्र और भाजपा को निशाने पर लेते हुए कहा कि इस सरकार ने काले धन पर बड़े-बड़े वायदे और जुमले दिए। मगर हकीकत में कुछ नहीं किया। इसलिए भाजपा को बकवास जुमला पार्टी कहना ही ठीक होगा।
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उन्होंने इस शब्द का कई बार इस्तेमाल किया। उस समय भाजपा की तरफ से किसी ने विरोध नहीं किया। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मेजें थपथपा कर ब्रायन का हौसला बढ़ाया। मगर उनके बोलने के बाद ही वाणिज्य राज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि माननीय सदस्य कुछ ज्यादा ही उत्साह में हैं और वे संसद के नियम कानून ही भूल गए।

'यह असंसदीय शब्द है'

when member of upper house discuss about world 'bakwas'

पीठ को ‘बकवास’ शब्द को ध्यान में लेते हुए इसे सदन की कार्यवाही से हटाना चाहिए। यह असंसदीय शब्द है। इसके बाद केंद्रीय दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इसका विरोध किया।

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि ‘बकवास’ शब्द का मतलब रबीस (अंग्रेजी का शब्द) होता है। यह असंसदीय शब्द है। वहीं विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि माननीय मंत्री नजमा जी गलत जानकारी दे रहे हैं। इसका मतलब रबीस नहीं होता। बकवास शब्द का मतलब बहुत ज्यादा बोलना होता है।

इसके बाद ब्रायन ने कहा कि वह अपने शब्द वापस लेते हैं और बीजेपी को बहुत ज्यादा जुमला पार्टी कहते है। इसे लेकर भी कई केंद्रीय मंत्रियों ने ऐतराज जताया। बाद में सभा पीठ की कुर्सी पर बैठे उनकी पार्टी के ही सांसद सुखेंदू राय ने नियम पुस्तिका देखकर निर्णय लिया कि ‘बकवास’ शब्द असंसदीय है। इसे कार्यवाही से हटाया जाता है।

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