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क्या होगी मोदी की 'कश्मीर नीति'?

Mon, 19 May 2014 08:24 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू Updated Mon, 19 May 2014 08:24 AM IST
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what will be kashmir policy of narendra modi

प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेन्द्र मोदी अपने कश्मीर एजेंडे को वाजपेयी फॉर्मूले पर आगे बढ़ा सकते हैं। यह फॉर्मूला इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत के सिद्धांत पर टिका है। इसमें अलगाववादियों से वार्ता भी शामिल है।

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कश्मीर समस्या का समाधान मोदी की प्राथमिकताओं में शुमार है लिहाजा नई सरकार अपनी पारी शुरू करने के साथ ही इस दिशा में पहल कर सकती है। कश्मीर के तमाम सियासी दलों के अलावा अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं को भी मोदी से मसले के हल की उम्मीद है।
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कश्मीर में सियासी दिग्गजों और अलगाववादी से लेकर कट्टरपंथी तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की नीतियों के कायल रहे हैं। मोदी ने उसी दिशा में कदम बढ़ाने के संकेत पहले ही दे दिए हैं।

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समाधान की उम्मीद संग खतरे भी

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समस्या के समाधान की उम्मीद भरी किरण के साथ कुछ नए खतरे भी पैदा हुए हैं। चुनाव में करारी हार के बाद नेशनल कांफ्रेंस खिसके जनाधार को फिर से हासिल करने की कोशिश में ज्यादा तल्ख मुद्दे उठा सकता है। चूंकि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं इसलिए पीडीपी भी नरम होने का जोखिम नहीं उठा सकती।

लिहाजा नेकां और पीडीपी में उग्र मुद्दों को उठाने की होड़ कश्मीर में नई समस्याएं पैदा कर सकता है। नेकां ने कश्मीर को पूर्ण स्वायत्तता का राग चुनाव के दौरान ही छेड़ दिया है। अब इस मुद्दे को और हवा दी जा सकती है।

मुख्य धारा के सियासी दलों नेकां और पीडीपी के बीच यह होड़ केंद्र की नई सरकार के लिए नई समस्याएं पैदा कर सकता है। साथ ही परोक्ष तरीके से अलगाववादियों के एजेंडे को ही मजबूती देगा।

जम्मू कश्मीर में संघ प्रचारक रहे मोदी

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पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला के सगे भाई और नेकां के एडीशनल जनरल सेक्रेटरी डा. मुस्तफा कमाल कहते हैं कि उनकी पार्टी केंद्र में बनने वाली नई सरकार से कोई टकराव नहीं चाहती है। कश्मीर में संसाधनों की कमी है लिहाजा केंद्र के उदार सहयोग से ही विकास संभव है।

चुनाव के दौरान नेकां नेताओं का मोदी से टकराव तात्कालिक था। नई सरकार से कश्मीर समस्या के समाधान की उम्मीद है। नेकां मानती है कि स्वायत्तता ही समाधान का रास्ता दिखाएगी। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती को भी केंद्र की नई सरकार से उम्मीदें हैं। हुर्रियत कांफ्रेंस के उदारवादी नेता मीरवाइज उमर फारूक मोदी से समस्या के हल की उम्मीदें जाहिर कर चुके हैं।

नरेन्द्र मोदी जम्मू कश्मीर में संघ के प्रचारक और भाजपा के प्रभारी रह चुके हैं। इसलिए उन्हें हालात की जानकारी है। वह मुरली मनोहर जोशी के साथ श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने भी आए थे। उन्होंने अपनी चुनावी अभियान की शुरूआत भी कठुआ जिले के हीरानगर से ही की थी। वह संकेत दे चुके हैं कि वाजपेयी फार्मूले से ही समाधान संभव है।

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