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वाराणसी में उमड़ा जनसैलाब, आएगा किसके काम?

Sun, 11 May 2014 04:50 PM IST
संजय प्रसाद सिंह/अमर उजाला, वाराणसी
संजय प्रसाद सिंह/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 11 May 2014 04:50 PM IST
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what think varanasi in this election

देश की सबसे हाईप्रोफाइल संसदीय सीट वाराणसी में भले ही अभी वोटिंग नहीं हुई हो। लेकिन वोटिंग और चुनावी नतीजों से पहले ही लोग चौंक गए हैं। उनके चौंकने की वजह, कुछ और नहीं बल्कि सियासी दलों की एक बाद एक आयोजित रोड शो और रैलियों में उमड़ा जनसैलाब है।

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मोदी के नामांकन जुलूस में शहर ने सड़कों पर जनसैलाब के जो नजारे देखे, वैसे ही कुछ अनुभूति बाद में केजरीवाल और फिर प्रचार अभियान के आखिरी दिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव के रोड शो में भी हुई।
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हर रोड शो अपने आप में एक नई लकीर खींचने के साथ सियासी हलकों में एक नई बहस छेड़ गया। अब प्रचार अभियान का सिलसिला थमने के बाद भी यह भीड़ चुनावी चर्चाओं के केंद्र में है।

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मोदी ने खींची लकीर, फिर चला सिलसिला

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हर गली-नुक्कड़ पर प्रत्याशियों के चुनावी भविष्य की संभावनाएं इसी भीड़ के बीच तलाशी जा रही हैं। सभी प्रमुख पार्टियों के दिग्गजों के माथे पर बल पड़ गए हैं।

अबकी चुनावी मुहिम में गंगा की लहरों की तरह काशी की सड़कों पर सियासत की लहर चली और जनसैलाब उमड़ा। पार्टियों की सियासत भले अलग रही हो लेकिन काशीवासियों के समर्थन का अंदाज बिल्कुल गंगा की लहरों की तरह ही सबके साथ अपने पूरे प्रवाह में दिखा।

नामांकन के लिए मोदी का रोड शो शुरू हुआ तो समर्थकों, कार्यकर्ताओं के हुजूम से सड़कें पट गईं। शहर के लिए किसी सियासी रोड शो या जुलूस में ऐसा जनसैलाब अभूतपूर्व था।

आप, कांग्रेस के बाद सपा ने उलझाया गणित

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केजरीवाल की बारी आई तो उनके साथ भी समर्थकों, कार्यकर्ताओं का हुजूम कुछ कम नहीं था। आप की सफेद चादर से सड़कें ढंक सी गईं।

फिर कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी और सपा के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यहां रोड शो के लिए उतरे तो काशीवासियों ने उन्हें भी कतई मायूस नहीं होने दिया।

भीड़ उमड़ी तो फिर देखने वाले बस चौंकते रह गए। सियासी माहौल भांप पाना हर किसी के लिए जैसे मुश्किल होने लगा। अब रोड शो में एक के बाद एक उमड़े जनसैलाब के अपने-अपने तरीके से निहितार्थ निकाले जा रहे हैं।

स्थानीय और बाहरी भीड़ के बीच फर्क समझाया जा रहा है लेकिन आम जनता ही नहीं, खुद सियासी दिग्गज भी इसे लेकर पसोपेश में हैं कि चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा।

जनता ने किसी को नहीं किया निराश

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इस मामले पर वाराणसी की जनता क्या सोचती है अगर इस पर गौर करें तो रामकटोरा के दिनेश कहते हैं, "जिनके पास कोई काम नहीं वे लोग सभी के जुलूस में शामिल हो रहे हैं। वोट किसे देना है, शहर के लोग इसके लिए पहले से ही अपना मन बना चुके हैं। मतगणना के बाद यह साफ हो जाएगा कि जनता किसके साथ है।"

नेवादा के मनोज विश्वकर्मा के मुताबिक, "पार्टियां भीड़ जुटाने के लिए लोगों को रुपये दे रही है। रोड शो में भले ही बड़ी तादाद में लोग शामिल हुए हों लेकिन सच्चाई इससे अलग है। लोग जिसको वोट देने का मन बना चुके हैं, उसी को देंगे।"

वहीं सुंदरपुर के छोटेलाल सिंह ने कहा, "शहर के अधिकतर लोग सभी पार्टियों के रोड शो में शामिल हो रहे हैं। रोड शो में जाना उनके लिए एक तरह से मौजमस्ती करना है। रोड शो की भीड़ के जरिये किसी भी तरह से सियासी परिदृश्य का आंकलन नहीं किया जा सकता। लोग वोट तो उसे ही देंगे, जिसे वह चाहते हैं।"

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